भुजंगासन: रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और हृदय-फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

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भुजंगासन: रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और हृदय-फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

सारांश

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में योग और प्राणायाम का महत्व बढ़ गया है। आइए जानें कैसे पूर्ण भुजंगासन आपकी रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर हृदय और फेफड़ों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

Key Takeaways

  • पूर्ण भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है।
  • यह फेफड़ों और हृदय के लिए लाभकारी है।
  • नियमित अभ्यास से श्वसन तंत्र में सुधार होता है।
  • यह तनाव और थकान को दूर करता है।
  • शुरुआत में विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए।

नई दिल्ली, ५ मार्च (राष्ट्रीय प्रेस)। आज के तेज़ और भागदौड़ वाले युग में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना बहुत ज़रूरी हो गया है। इसके लिए योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना एक उत्कृष्ट उपाय है।

इस दिशा में, भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लोगों को योग और प्राणायाम की विभिन्न गतिविधियों के लाभों और उनके सही तरीकों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। इनमें से एक बेहद महत्वपूर्ण योग आसन है पूर्ण भुजंगासन

आयुष मंत्रालय का कहना है कि पूर्ण भुजंगासन न केवल आपकी रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, बल्कि यह फेफड़ों और हृदय के लिए भी अत्यंत लाभदायक है। इसलिए, इसे आज ही अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

मंत्रालय ने इसके नियमित अभ्यास के लाभों को साझा करते हुए बताया है कि पूर्ण भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले आपको भुजंगासन की स्थिति में आकर सामान्य श्वास लेना चाहिए।

इसके बाद, घुटनों को मोड़कर पंजों को ऊपर उठाएं। फिर, सिर, गर्दन और कंधों को पीछे की ओर तानें। इसके बाद, पैरों (तलवों) से सिर को छूने का प्रयास करें। कुछ क्षण रुकें और फिर धीरे-धीरे वापस आएं। इसके बाद, आराम से लेटें और अपनी श्वास और हृदय गति को सामान्य होने दें।

पूर्ण भुजंगासन करने का सबसे उपयुक्त समय सुबह खाली पेट ब्रह्ममुहूर्त होता है, लेकिन इसे शाम में भी भोजन के ४-५ घंटे बाद किया जा सकता है। नियमित रूप से इस क्रिया के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, पेट की चर्बी कम होती है, और श्वसन तंत्र में सुधार होता है।

यह आसन पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है और पीठ दर्द में भी राहत प्रदान करता है। इसके साथ ही, यह तनाव और थकान को दूर कर शरीर में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है। हालांकि, शुरुआत में पूर्ण भुजंगासन को किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही धीरे-धीरे सीखना चाहिए, क्योंकि इसे गलत तरीके से करने पर चोट लगने का खतरा हो सकता है।

Point of View

विशेष रूप से पूर्ण भुजंगासन की विशेषताओं पर। यह आसन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। यह एक सरल और प्रभावी अभ्यास है जिसे कोई भी अपने दैनिक जीवन में शामिल कर सकता है।
NationPress
08/03/2026

Frequently Asked Questions

भुजंगासन करने का सही समय क्या है?
पूर्ण भुजंगासन करने का सबसे सही समय सुबह खाली पेट होता है, लेकिन इसे शाम में भी भोजन के ४-५ घंटे बाद किया जा सकता है।
भुजंगासन के लाभ क्या हैं?
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, फेफड़ों और हृदय के लिए फायदेमंद है, पाचन शक्ति को सुधारता है, और तनाव को दूर करता है।
क्या भुजंगासन करना सुरक्षित है?
हाँ, लेकिन शुरुआत में इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए ताकि चोट लगने का खतरा न हो।
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