स्कन्द षष्ठी 21 मई: गुरु पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें राहुकाल

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स्कन्द षष्ठी 21 मई: गुरु पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें राहुकाल

सारांश

21 मई को स्कन्द षष्ठी पर गुरु पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि — तीन शुभ योगों का दुर्लभ मेल बन रहा है। व्रत, जाप और दान के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। राहुकाल दोपहर 2 से 3:43 बजे तक — पूजा की योजना उसी के अनुसार बनाएँ।

मुख्य बातें

स्कन्द षष्ठी इस वर्ष 21 मई 2025 (गुरुवार) को ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी तिथि पर मनाई जाएगी।
इस दिन गुरु पुष्य योग , सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ त्रि-संयोग बन रहा है।
पुष्य नक्षत्र गुरुवार से 22 मई की सुबह 2:49 बजे तक रहेगा।
राहुकाल दोपहर 2:00 से 3:43 बजे तक — इस दौरान पूजा और शुभ कार्य वर्जित।
अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 11:51–12:45) और ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:05–4:46) पूजा के लिए उत्तम।
इस दिन उपवास, स्कन्द मंत्र जाप और दान विशेष रूप से फलदायी माने गए हैं।

ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी तिथि यानी 21 मई 2025 (गुरुवार) को स्कन्द षष्ठी का पर्व मनाया जाएगा। देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के पुत्र भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) को समर्पित इस तिथि पर इस वर्ष गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ त्रि-संयोग बन रहा है, जो इसे विशेष रूप से शुभ बनाता है।

तिथि और मुख्य समय

पंचमी तिथि गुरुवार सुबह 8 बजकर 26 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ होगी। सूर्योदय सुबह 5 बजकर 27 मिनट और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 8 मिनट पर होगा। गुरुवार को पुष्य नक्षत्र रहेगा, जो 22 मई की सुबह 2 बजकर 49 मिनट तक रहेगा; इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र प्रारंभ होगा।

शुभ मुहूर्त

इस दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त — सुबह 4:05 से 4:46 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त — दोपहर 11:51 से 12:45 बजे तक। विजय मुहूर्त — दोपहर 2:35 से 3:29 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त — शाम 7:07 से 7:28 बजे तक। अमृत काल — शाम 8:47 से रात 10:18 बजे तक।

अशुभ समय और राहुकाल

श्रद्धालुओं को ध्यान रखना चाहिए कि राहुकाल दोपहर 2:00 बजे से 3:43 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या नई शुरुआत करने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त यमगण्ड सुबह 5:27 से 7:10 बजे तक और गुलिक काल सुबह 8:53 से 10:35 बजे तक रहेगा।

गण्ड योग सुबह 10:58 बजे तक, करण बालव सुबह 8:26 बजे तक और कौलव करण शाम 7:20 बजे तक रहेगा।

तीन योगों का दुर्लभ संयोग

गुरुवार को पुष्य नक्षत्र पड़ने के कारण गुरु पुष्य योग बन रहा है, जिसे हिंदू पंचांग में अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी विद्यमान रहेंगे। पंचांग के अनुसार इन तीनों योगों के एक साथ आने से इस दिन किए गए उपवास, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

व्रत और पूजा विधि

स्कन्द षष्ठी को कन्द षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान कार्तिकेय की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। स्कन्द मंत्र का जाप, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान देना इस दिन विशेष रूप से फलदायी माना गया है। पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त का चयन सर्वोत्तम रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस प्रकार की खबरें श्रद्धालुओं को सटीक समय-सारणी देने में तभी सार्थक होती हैं जब मुहूर्त और राहुकाल की जानकारी स्पष्ट और व्यावहारिक हो। यह ध्यान देने योग्य है कि धार्मिक पंचांग की गणनाएँ स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार कुछ मिनट भिन्न हो सकती हैं, इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग से भी पुष्टि करनी चाहिए। आस्था और व्यावहारिकता के इस संगम में मीडिया की भूमिका केवल सूचना देना है, धार्मिक निर्देश नहीं।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्कन्द षष्ठी 2025 कब है?
स्कन्द षष्ठी इस वर्ष 21 मई 2025 (गुरुवार) को ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी तिथि पर मनाई जाएगी। पंचमी तिथि उसी दिन सुबह 8 बजकर 26 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी।
21 मई को कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
21 मई को गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग — तीनों एक साथ बन रहे हैं। पुष्य नक्षत्र गुरुवार को पड़ने के कारण गुरु पुष्य योग बन रहा है, जो 22 मई की सुबह 2:49 बजे तक रहेगा।
21 मई 2025 को राहुकाल कब है?
गुरुवार 21 मई को राहुकाल दोपहर 2:00 बजे से 3:43 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजा-पाठ, व्रत संकल्प या कोई भी शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
स्कन्द षष्ठी पर पूजा के लिए सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:05–4:46), अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 11:51–12:45) और विजय मुहूर्त (दोपहर 2:35–3:29) सर्वोत्तम माने जाते हैं। राहुकाल (दोपहर 2:00–3:43) से बचना आवश्यक है।
स्कन्द षष्ठी व्रत में क्या करना चाहिए?
इस दिन उपवास रखना, भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) की विधिवत पूजा करना, स्कन्द मंत्र का जाप करना और ब्राह्मणों व जरूरतमंदों को दान देना विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना गया है। इस वर्ष तीन शुभ योगों के संयोग से इन कार्यों का फल कई गुना बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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