18 मई 2026 पंचांग: ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया पर सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग, जानें राहुकाल और शुभ मुहूर्त
सारांश
मुख्य बातें
रविवार, 18 मई 2026 को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, जो शाम 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन प्रभावी रहेगा और अमृत सिद्धि योग भी उपलब्ध रहेगा — इन दोनों शुभ योगों का एकसाथ आना इस रविवार को नए कार्यों, यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए विशेष रूप से अनुकूल बनाता है। सनातन परंपरा में पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — के आधार पर दिन की शुभता तय की जाती है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
18 मई 2026 को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 29 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 7 मिनट पर। चंद्रोदय सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर और चंद्रास्त रात 9 बजकर 9 मिनट पर होगा। उदयातिथि के नियम के अनुसार, तिथि परिवर्तन शाम को होने के बाद भी पूरे दिन द्वितीया का ही मान माना जाएगा।
नक्षत्र और योग
इस दिन रोहिणी नक्षत्र सुबह 11 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद मृगशिरा नक्षत्र आरंभ होगा। सुकर्मा योग रात 9 बजकर 48 मिनट तक प्रभावी रहेगा। अमृत सिद्धि योग सुबह 11 बजकर 32 मिनट से आरंभ होकर 19 मई की सुबह 5 बजकर 28 मिनट तक चलेगा। गौरतलब है कि सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन बना रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने के लिए उत्तम माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 6 मिनट से 4 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह 8 बजकर 44 मिनट से 10 बजकर 8 मिनट तक उपलब्ध रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 34 मिनट से 3 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इन मुहूर्तों में शुरू किए गए कार्य फलदायी माने जाते हैं।
राहुकाल और अशुभ समय
रविवार को राहुकाल सुबह 7 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा — इस अवधि में कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ न करने की परंपरागत सलाह है। यमगंड सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक और फिर दोपहर 3 बजकर 29 मिनट से 4 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इन अवधियों में सावधानी बरतना उचित रहेगा।
दिन का समग्र महत्व
सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का एकसाथ संयोग इस रविवार को विशेष रूप से उल्लेखनीय बनाता है। यह संयोग नए व्यवसाय, गृह प्रवेश, यात्रा और बड़े निर्णयों के लिए अनुकूल माना जाता है। राहुकाल और दुर्मुहूर्त से बचते हुए शुभ मुहूर्तों का सदुपयोग करना इस दिन का सर्वोत्तम उपाय है।