7 मार्च का पंचांग: चैत्र कृष्ण चतुर्थी के दिन अमृतकाल और सर्वार्थ सिद्धि योग, जानें अशुभ समय
सारांश
Key Takeaways
- चैत्र कृष्ण चतुर्थी का महत्व समझें।
- अमृतकाल और सर्वार्थ सिद्धि योग में कार्य करें।
- शुभ मुहूर्त का लाभ उठाएं।
- अशुभ समय से बचें।
- धार्मिक कार्यों का महत्व।
नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है। यह प्रतिदिन के शुभ और अशुभ समय की जानकारी देता है, ताकि महत्वपूर्ण कार्य सही मुहूर्त में किए जा सकें। 7 मार्च को चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस दिन दो प्रमुख शुभ योग एक साथ आ रहे हैं: अमृतकाल और सर्वार्थ सिद्धि योग.
यह संयोग विशेष माना जाता है, क्योंकि सर्वार्थ सिद्धि योग में लगभग सभी प्रकार के कार्य सफल होते हैं, और अमृतकाल में किए गए कार्यों का फल अमृत समान होता है। सर्वार्थ सिद्धि योग 7 मार्च की सुबह 11 बजकर 15 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन, यानी 8 मार्च की सुबह 6 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। अमृतकाल सुबह 3 बजकर 53 मिनट से 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। अर्थात् 7 मार्च दोपहर से लेकर पूरी रात और अगली सुबह तक यह शुभ समय उपलब्ध रहेगा।
इस योग में नए कार्यों की शुरुआत करना, पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान-पुण्य, विवाह जैसे शुभ संस्कार या कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेना बहुत फलदायी माना जाता है। विशेषकर यदि आप कोई नया व्यवसाय, शिक्षा या धार्मिक कार्य आरंभ करना चाहते हैं, तो यह समय अत्यंत उपयुक्त है। शनिवार को सूर्योदय 6 बजकर 40 मिनट और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 25 मिनट पर होगा। चित्रा नक्षत्र सुबह 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, उसके बाद स्वाती नक्षत्र का आरंभ होगा। चतुर्थी तिथि शाम 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पंचमी का आरंभ होगा। हालाँकि, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन चतुर्थी का मान रहेगा।
शनिवार को भगवान श्रीराम भक्त हनुमान, सूर्यपुत्र शनिदेव और माता दुर्गा को समर्पित किया जाता है। इस दिन भगवान की भक्ति भावना के साथ पूजा करने से शनि ग्रह शांत होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शनिवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 2 मिनट से 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 9 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 22 मिनट से 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
चतुर्थी तिथि पर अशुभ समय का भी ध्यान रखना आवश्यक है। इस दिन राहुकाल सुबह 9 बजकर 36 मिनट से 11 बजकर 4 मिनट तक, यमगण्ड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा और गुलिक काल सुबह 6 बजकर 40 मिनट से 8 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।