ममता बनर्जी एसआईआर के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत करेंगी, कोलकाता में होगा प्रदर्शन
सारांश
Key Takeaways
- ममता बनर्जी का धरना एसआईआर के खिलाफ है।
- धरने की मुख्य मांग मतदाता अधिकारों की रक्षा करना है।
- तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व इस प्रदर्शन में सक्रिय रूप से भाग लेगा।
- धरने का स्थान सीईओ कार्यालय के निकट है।
- सीपीआई (एम) भी इस मुद्दे पर धरना दे चुकी है।
कोलकाता, ६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार दोपहर से कोलकाता के एस्प्लेनेड ईस्ट में चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के खिलाफ एक अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करने जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता शुक्रवार सुबह से एस्प्लेनेड ईस्ट में इकट्ठा होना प्रारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री का वहां पहुंचने और प्रदर्शन शुरू करने का समय लगभग २ बजे निर्धारित है।
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, "यह धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। हमारी मुख्य मांग है कि मतदाता सूची से किसी भी वास्तविक मतदाता को बाहर न किया जाए और आगामी विधानसभा चुनाव उन ६३ लाख मामलों को ध्यान में रखकर न कराए जाएं, जिन पर न्यायिक सुनवाई चल रही है।"
दिलचस्प है कि मुख्यमंत्री का धरने का स्थान पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से केवल १.५ किलोमीटर की दूरी पर है। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की पूरी बेंच के ८ मार्च की रात को कोलकाता पहुंचने से पहले हो रहा है। इस बेंच का नेतृत्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार कर रहे हैं और उनका कार्यक्रम अगले दो दिनों में अत्यधिक व्यस्त रहेगा।
एस्प्लेनेड ईस्ट में धरने के लिए एक बड़ा मंच स्थापित किया गया है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व ने प्रदर्शन की अवधि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन मंच और वहां की व्यवस्था को देखकर लगता है कि यह विरोध प्रदर्शन काफी समय तक चलेगा।
संयोगवश, सीपीआई (एम) भी सीईओ के कार्यालय के सामने २४ घंटे का धरना प्रदर्शन कर रही थी, जो बुधवार दोपहर से शुरू होकर गुरुवार दोपहर को समाप्त हुआ। इस प्रदर्शन की मांग थी कि जब तक "तार्किक विसंगति" श्रेणी के तहत वर्गीकृत मतदाताओं के दस्तावेजों पर चल रही न्यायिक कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक राज्य में चुनाव नहीं होने चाहिए।
सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस ने कहा है कि उनके प्रतिनिधि ९ मार्च को भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के साथ अपनी बातचीत में यही मांग उठाएंगे।
कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर न्यायिक निर्णय प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदान कराने की यही मांग की है।