यूएई की बड़ी कूटनीतिक सफलता: रूस-यूक्रेन के बीच 193-193 कैदियों की अदला-बदली, कुल संख्या 6,691 पहुंची
सारांश
Key Takeaways
- यूएई ने 24 अप्रैल 2025 को रूस और यूक्रेन के बीच 193-193 कैदियों की सफल अदला-बदली कराई।
- यूएई की मध्यस्थता से अब तक कुल 6,691 कैदी रिहा हो चुके हैं।
- यूएई विदेश मंत्रालय (एमओएफए) ने दोनों देशों के सहयोग की सराहना की और शांति प्रयासों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन के प्रतिनिधि सुन लेई ने जल्द युद्धविराम और राजनीतिक समाधान की मांग की।
- यूएई की तटस्थ कूटनीति उसे रूस और यूक्रेन दोनों का भरोसेमंद मध्यस्थ बनाती है, जो अन्य बड़े देश नहीं कर पाए।
- रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन वर्ष से अधिक हो चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद संघर्ष जारी है।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हासिल करते हुए दोनों देशों के बीच 193-193 कैदियों की अदला-बदली सुनिश्चित कराई है। इस ताज़ा कार्रवाई के साथ यूएई की मध्यस्थता के जरिए अब तक रिहा किए गए कुल कैदियों की संख्या 6,691 हो गई है, जो खाड़ी देश की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को रेखांकित करती है।
यूएई की मध्यस्थता: कैसे हुई कैदियों की रिहाई
यूएई विदेश मंत्रालय (एमओएफए) ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि रूसी संघ और यूक्रेन गणराज्य दोनों ने इस मध्यस्थता प्रक्रिया में पूरा सहयोग किया। मंत्रालय ने दोनों देशों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सफलता तीनों देशों के बीच विशिष्ट और भरोसेमंद संबंधों का प्रमाण है।
यूएई ने स्पष्ट किया कि वह यूक्रेन संघर्ष के मानवीय पहलुओं — जिसमें युद्धबंदियों की रिहाई और शरणार्थी संकट शामिल हैं — को प्राथमिकता देते हुए शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन वर्ष से अधिक हो चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्धविराम के लिए दबाव बना रहा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी उठी युद्धविराम की मांग
इसी सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन मुद्दे पर महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी उप-प्रतिनिधि सुन लेई ने कहा कि यूक्रेन संकट लंबे समय से जारी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा अपेक्षा है कि जल्द से जल्द युद्ध समाप्त हो तथा राजनीतिक समाधान निकाला जाए।
सुन लेई ने आग्रह किया कि सभी पक्ष संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के तहत एक व्यापक, स्थायी और बाध्यकारी शांति समझौते की दिशा में वार्ता जारी रखें। चीन का यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि बीजिंग को रूस का निकट सहयोगी माना जाता है, और उसका युद्धविराम का आह्वान कूटनीतिक परिदृश्य में बदलाव का संकेत देता है।
यूएई की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक भूमिका
गौरतलब है कि यूएई ने पिछले दो वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध में तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए हजारों कैदियों की रिहाई सुनिश्चित की है। 6,691 कैदियों की कुल अदला-बदली यह दर्शाती है कि यूएई ने न केवल खाड़ी क्षेत्र बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी अपनी साख मजबूत की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई की यह भूमिका इसलिए संभव हो पाई क्योंकि अबू धाबी ने पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद मॉस्को से अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंध बनाए रखे, साथ ही कीव के साथ भी संवाद का चैनल खुला रखा। यह दोहरा संतुलन ही यूएई को दोनों पक्षों का भरोसेमंद मध्यस्थ बनाता है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो भारत और तुर्किये भी इस संघर्ष में मध्यस्थता के प्रयास कर चुके हैं, लेकिन कैदी अदला-बदली के मामले में यूएई की सफलता सबसे ठोस और मापनीय रही है।
आगे क्या होगा: शांति की उम्मीद या लंबा संघर्ष?
कैदियों की रिहाई एक मानवीय राहत जरूर है, लेकिन युद्ध के मैदान में अभी भी कोई निर्णायक बदलाव नहीं आया है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और नाटो देश यूक्रेन को हथियार और आर्थिक सहायता देना जारी रखे हुए हैं, जबकि रूस अपनी सैन्य कार्रवाई को रणनीतिक बताता रहा है।
आने वाले हफ्तों में यूएई की मध्यस्थता की अगली कड़ी पर सभी की नजर रहेगी। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र में शांति प्रस्ताव पर होने वाली वोटिंग और ट्रंप प्रशासन की संभावित कूटनीतिक पहल भी इस संघर्ष की दिशा तय कर सकती है।