जनगणना 2027: अरुणाचल के राज्यपाल परनाइक ने की स्व-गणना, नागरिकों से की भागीदारी की अपील
सारांश
मुख्य बातें
ईटानगर, 24 अप्रैल। जनगणना 2027 की स्व-गणना प्रक्रिया को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) ने शुक्रवार को ईटानगर स्थित लोक भवन में अपनी स्व-गणना पूरी की। इस कदम से उन्होंने प्रदेश के नागरिकों के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
राज्यपाल ने क्यों बताई स्व-गणना को जरूरी?
लोक भवन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, स्व-गणना दल से संवाद के दौरान राज्यपाल परनाइक ने स्पष्ट किया कि एक विश्वसनीय और समावेशी जनगणना के लिए नागरिकों की सहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया नागरिकों को अपने परिवार, समुदाय और क्षेत्र की सटीक जानकारी प्रदान कर राष्ट्र-निर्माण में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने का अवसर देती है।
राज्यपाल ने यह भी रेखांकित किया कि जनगणना डेटा स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों, जन-कल्याण योजनाओं और विकास नीतियों की योजना का आधार होता है। इस प्रकार स्व-गणना 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक मजबूत स्तंभ की भूमिका निभाती है।
नागरिक जिम्मेदारी पर राज्यपाल का जोर
लेफ्टिनेंट जनरल परनाइक (सेवानिवृत्त) ने कहा कि स्व-गणना महज आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण नागरिक दायित्व है। जरूरतों की पहचान करने, संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने और सुशासन को मजबूती देने में इसकी अहम भूमिका है।
उन्होंने जनगणना दल को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर घर की गिनती हो, हर आवाज दर्ज हो और कोई भी इस प्रक्रिया से वंचित न रहे। उन्होंने आगे कहा कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण संभव है।
जनगणना टीम और प्रक्रिया का विवरण
शिलांग स्थित जनगणना संचालन निदेशालय की एक विशेष टीम ने राज्यपाल को जनगणना की पूरी प्रक्रिया और कार्यप्रणाली से अवगत कराया। इस टीम का नेतृत्व निदेशक बिस्वजीत पेगु ने किया, जबकि अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की ओर से जनगणना-27 की सचिव-सह-राज्य नोडल अधिकारी अनु सिंह ने अपनी टीम के साथ भाग लिया।
अधिकारियों ने बताया कि 'हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन' के अंतर्गत स्व-गणना का चरण 16 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ है और यह 30 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस अवधि में नागरिक ऑनलाइन माध्यम से अपनी स्व-गणना पूरी कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी हो चुके हैं शामिल
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उपमुख्यमंत्री चौना मेन ने भी 16 अप्रैल को क्रमशः ईटानगर और नामसाई से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की थी। राज्य के शीर्ष नेतृत्व की यह सहभागिता जनगणना 2027 को लेकर सरकार की गंभीरता को दर्शाती है।
1 मई से 30 मई 2026 तक 'हाउस लिस्टिंग' का जमीनी चरण शुरू होगा, जिसमें जनगणना कर्मचारी डेटा संग्रह के लिए घर-घर जाएंगे। यह प्रक्रिया भारत की अगली दशकीय जनगणना की नींव तैयार करेगी, जो देश की विकास योजनाओं को दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
जनगणना 2027 का व्यापक महत्व
गौरतलब है कि भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गई थी। इस प्रकार जनगणना 2027 करीब 16 वर्षों के अंतराल के बाद होने वाली जनगणना होगी, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। सटीक जनसंख्या डेटा के अभाव में केंद्र और राज्य सरकारों की कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वंचित तबकों तक नहीं पहुंच पाता — यही कारण है कि इस बार की जनगणना में स्व-गणना जैसी तकनीकी प्रक्रिया को अपनाकर डेटा की सटीकता और समावेशिता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले दिनों में जनगणना कर्मचारियों का घर-घर दौरा और डिजिटल डेटा संकलन मिलकर एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करेगा, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में आधारशिला का काम करेगा।