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राघव चड्ढा का BJP में जाना: अकाली दल का तीखा तंज — 'सेक्शन बदलने' जैसी राजनीति

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राघव चड्ढा का BJP में जाना: अकाली दल का तीखा तंज — 'सेक्शन बदलने' जैसी राजनीति

सारांश

राघव चड्ढा समेत आप सांसदों के BJP में जाने की खबर पर अकाली दल ने करारा तंज कसा है। SAD नेताओं ने इसे 'सेक्शन बदलने' जैसी राजनीति बताते हुए AAP पर भ्रष्टाचार और विचारधारा से भटकाव के आरोप लगाए। मजीठिया ने AAP को BJP की 'बी-टीम' करार दिया।

मुख्य बातें

राघव चड्ढा समेत AAP के कई सांसदों के BJP में शामिल होने की खबरों ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचाई।
SAD उपाध्यक्ष सनी गिल ने इसे 'सेक्शन बदलने' जैसी राजनीति बताया और कहा कि चड्ढा की पंजाब से दूरी पहले से संकेत दे रही थी।
बिक्रम सिंह मजीठिया ने AAP को BJP की 'बी-टीम' करार दिया और पार्टी पर विचारधारा से भटकाव का आरोप लगाया।
परंबंस सिंह रोमाना ने AAP सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को नजरअंदाज न करने की बात कही।
कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे नेता पहले ही AAP छोड़ चुके हैं — यह पार्टी में असंतोष का लंबा इतिहास है।
2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम AAP के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

मोगा, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित कई अन्य सांसदों द्वारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की खबरों ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेताओं ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आप के नेतृत्व और उसकी आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

अकाली दल का पहला हमला — 'सेक्शन बदलने' वाली राजनीति

मोगा में SAD के उपाध्यक्ष संजीत सिंह 'सनी' गिल ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में कहा कि राघव चड्ढा के राजनीतिक रुख में बदलाव के संकेत काफी पहले से मिलने लगे थे। उन्होंने बताया कि जब चड्ढा ने मुंबई में अधिक समय बिताना शुरू किया और पंजाब में उनकी उपस्थिति धीरे-धीरे घटने लगी, तभी यह अनुमान लगाया जाने लगा था कि कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव आने वाला है।

गिल ने कहा, "संसद में भी चड्ढा का रवैया बदला हुआ दिखा। पहले वे पंजाब के मुद्दों पर बेबाकी से बोलते थे, लेकिन बाद में वे लंबे समय तक चुप्पी साधे रहे।" उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना एक स्कूल के उदाहरण से करते हुए कहा, "यह महज 'सेक्शन बदलने' जैसा है — जैसे एक ही कक्षा में छात्र केवल अपना सेक्शन बदलता है, वैसे ही दल बदलने से मूल व्यवस्था में कोई खास फर्क नहीं आता।"

गिल ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का एक साथ पार्टी छोड़ना अपने आप में एक गंभीर संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

चंडीगढ़ से रोमाना की प्रतिक्रिया — भ्रष्टाचार पर उठे सवाल

चंडीगढ़ में SAD के उपाध्यक्ष परंबंस सिंह रोमाना ने कहा कि यदि यह खबर सत्य है, तो आम आदमी पार्टी में भ्रष्टाचार को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करना संभव नहीं। उन्होंने कहा, "आज पंजाब में हर स्तर पर AAP सरकार के खिलाफ चर्चाएं हैं और लगातार नए आरोप सामने आ रहे हैं।"

मजीठिया का तीखा प्रहार — 'BJP की बी-टीम बन गई AAP'

SAD नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "आम आदमी पार्टी का अपने मूल सिद्धांतों से भटकना पहले से ही तय था। पार्टी अपनी बुनियादी विचारधारा से बहुत दूर जा चुकी है।" मजीठिया ने याद दिलाया कि पहले भी कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे दिग्गज नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, जो संगठन के भीतर लगातार बने असंतोष का प्रमाण है।

मजीठिया ने आरोप लगाया कि जो पार्टी कभी व्यवस्था परिवर्तन का नारा देती थी, वही अब समझौतावादी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी पार्टी बन गई है। उनका यह भी कहना था कि मौजूदा घटनाक्रम से यह धारणा और पुख्ता होती है कि AAP अब BJP की 'बी-टीम' बनकर रह गई है।

गहरा राजनीतिक संदर्भ — AAP में टूट का इतिहास

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी की स्थापना 2012 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुई थी। तब से पार्टी में अंदरूनी कलह और नेताओं के पलायन का सिलसिला थमा नहीं है। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का निष्कासन, कुमार विश्वास का अलग होना — ये सभी घटनाएं बताती हैं कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक असहमति की कोई जगह नहीं रही।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राघव चड्ढा जैसे युवा और मीडिया-सेवी नेता का BJP की ओर झुकाव, यदि सत्य है, तो यह AAP के लिए पंजाब में एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा, जहां पार्टी 2022 में भारी बहुमत से सत्ता में आई थी।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP नेतृत्व इस संकट पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और क्या राघव चड्ढा स्वयं कोई स्पष्टीकरण जारी करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह AAP की उस वैचारिक खोखलापन की परिणति है जो 'व्यवस्था परिवर्तन' के नारे पर खड़ी हुई थी। विडंबना यह है कि जो पार्टी कभी पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने निकली थी, आज उसी 'सेक्शन बदलने' की राजनीति का हिस्सा बन रही है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नजरअंदाज कर रही है कि AAP से नेताओं का पलायन कोई नई घटना नहीं — यह एक दशक पुराना पैटर्न है जो बताता है कि पार्टी के भीतर असहमति की कोई जगह नहीं। पंजाब में 2027 चुनाव से पहले यह टूट AAP के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक संकट साबित हो सकती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा BJP में क्यों शामिल हो रहे हैं?
राघव चड्ढा के BJP में जाने की खबरें आ रही हैं, हालांकि उन्होंने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। SAD नेताओं के अनुसार, चड्ढा की पंजाब से दूरी और संसद में बदले रुख से यह संकेत पहले से मिल रहे थे।
शिरोमणि अकाली दल ने इस घटनाक्रम पर क्या कहा?
SAD के उपाध्यक्ष सनी गिल ने इसे 'सेक्शन बदलने' जैसी राजनीति बताया। बिक्रम सिंह मजीठिया ने AAP को BJP की 'बी-टीम' करार देते हुए पार्टी पर भ्रष्टाचार और विचारधारा से भटकाव के आरोप लगाए।
AAP से पहले कौन-कौन से बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं?
AAP से कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे संस्थापक सदस्य पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं। ये सभी घटनाएं संगठन के भीतर लगातार बने असंतोष की ओर इशारा करती हैं।
क्या AAP BJP की 'बी-टीम' बन गई है?
यह आरोप विपक्षी दलों, खासकर SAD, ने लगाया है। मजीठिया का कहना है कि सांसदों का BJP की ओर जाना इस धारणा को और मजबूत करता है, हालांकि AAP ने इस आरोप को हमेशा खारिज किया है।
इस घटनाक्रम का पंजाब की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका हो सकता है। इससे पार्टी की साख और संगठनात्मक एकता पर सवाल उठेंगे, जिसका फायदा विपक्षी दल उठाने की कोशिश करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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