6 मई पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि पर जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अशुभ समय
सारांश
मुख्य बातें
बुधवार, 6 मई 2026 को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रहेगी। सनातन धर्म में पंचांग को दिनचर्या और शुभ कार्यों का आधार माना जाता है — तिथि, नक्षत्र, योग, वार और करण के संयोग से ही दिन का शुभ-अशुभ स्वरूप तय होता है। इस दिन व्रत, पूजा-पाठ या कोई नया कार्य आरंभ करने से पूर्व सही मुहूर्त जानना आवश्यक है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
बुधवार को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 37 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 59 मिनट पर। चंद्रोदय रात 11 बजकर 23 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त 7 मई की सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा।
चतुर्थी तिथि 6 मई की सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगी, इसके पश्चात पंचमी तिथि प्रारंभ होगी। तथापि, उदयातिथि के नियम के अनुसार सूर्योदय के समय चतुर्थी होने से पूरे दिन चतुर्थी का ही मान माना जाएगा।
नक्षत्र और योग
इस दिन मूल नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र लग जाएगा। सिद्ध योग 7 मई की सुबह 1 बजकर 12 मिनट तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सिद्ध योग में आरंभ किए गए कार्य सफलता की ओर अग्रसर होते हैं।
गौरतलब है कि चतुर्थी तिथि विघ्नविनाशक श्री गणेश को समर्पित मानी जाती है। बुधवार का दिन भी गणेश जी का वार कहलाता है, अतः इस दिन गणेश पूजन का विशेष फल प्राप्त होता है।
शुभ मुहूर्त — कब करें शुभ कार्य
6 मई के प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:12 से 4:54 बजे तक। प्रातः सन्ध्या: सुबह 4:33 से 5:37 बजे तक। अमृत काल: सुबह 8:42 से 10:30 बजे तक। विजय मुहूर्त: दोपहर 2:32 से 3:25 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:58 से 7:19 बजे तक। निशिता मुहूर्त: रात 11:56 बजे से 12:39 बजे (7 मई) तक।
ये समय महत्वपूर्ण शुभ कार्यों, यात्रा आरंभ, गृह प्रवेश और व्यापारिक निर्णयों के लिए उत्तम माने जाते हैं।
राहुकाल और अशुभ समय — इनसे बचें
इस दिन के अशुभ समय का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। राहुकाल दोपहर 12:18 से 1:58 बजे तक रहेगा। यमगंड सुबह 7:17 से 8:57 बजे तक, गुलिक काल सुबह 10:38 से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 11:51 से 12:45 बजे तक, वर्ज्य समय दोपहर 2:06 से 3:54 बजे तक और गण्ड मूल सुबह 5:37 से दोपहर 3:54 बजे तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार राहुकाल और दुर्मुहूर्त में यात्रा, महत्वपूर्ण निर्णय, नया व्यवसाय आरंभ या कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
आज का विशेष संदेश
यह ऐसे समय में आया है जब ज्येष्ठ मास की शुरुआत के साथ ग्रीष्मकाल अपने चरम पर है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना जलदान, छाया-दान और सेवा-कार्यों के लिए विशेष पुण्यदायी माना जाता है। सिद्ध योग और चतुर्थी तिथि का संयोग इस बुधवार को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत अनुकूल बनाता है।