6 मई पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि पर जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अशुभ समय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
6 मई पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि पर जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अशुभ समय

सारांश

बुधवार 6 मई को ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी और सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग है — गणेश पूजन के लिए अत्यंत शुभ। अमृत काल सुबह 8:42 से 10:30 बजे तक है, जबकि राहुकाल दोपहर 12:18 से 1:58 बजे तक। जानें पूरे दिन का शुभ-अशुभ समय-विवरण।

मुख्य बातें

6 मई 2026 को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 7:51 बजे तक; उदयातिथि से पूरे दिन चतुर्थी मान्य।
सूर्योदय 5:37 बजे , सूर्यास्त 6:59 बजे ; चंद्रोदय रात 11:23 बजे ।
शुभ अमृत काल सुबह 8:42 से 10:30 बजे; विजय मुहूर्त दोपहर 2:32 से 3:25 बजे।
राहुकाल दोपहर 12:18 से 1:58 बजे — इस दौरान शुभ कार्य वर्जित।
मूल नक्षत्र दोपहर 3:54 बजे तक; सिद्ध योग 7 मई की सुबह 1:12 बजे तक प्रभावी।
बुधवार और चतुर्थी का संयोग श्री गणेश पूजन के लिए विशेष फलदायी।

बुधवार, 6 मई 2026 को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रहेगी। सनातन धर्म में पंचांग को दिनचर्या और शुभ कार्यों का आधार माना जाता है — तिथि, नक्षत्र, योग, वार और करण के संयोग से ही दिन का शुभ-अशुभ स्वरूप तय होता है। इस दिन व्रत, पूजा-पाठ या कोई नया कार्य आरंभ करने से पूर्व सही मुहूर्त जानना आवश्यक है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति

बुधवार को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 37 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 59 मिनट पर। चंद्रोदय रात 11 बजकर 23 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त 7 मई की सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा।

चतुर्थी तिथि 6 मई की सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगी, इसके पश्चात पंचमी तिथि प्रारंभ होगी। तथापि, उदयातिथि के नियम के अनुसार सूर्योदय के समय चतुर्थी होने से पूरे दिन चतुर्थी का ही मान माना जाएगा।

नक्षत्र और योग

इस दिन मूल नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र लग जाएगा। सिद्ध योग 7 मई की सुबह 1 बजकर 12 मिनट तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सिद्ध योग में आरंभ किए गए कार्य सफलता की ओर अग्रसर होते हैं।

गौरतलब है कि चतुर्थी तिथि विघ्नविनाशक श्री गणेश को समर्पित मानी जाती है। बुधवार का दिन भी गणेश जी का वार कहलाता है, अतः इस दिन गणेश पूजन का विशेष फल प्राप्त होता है।

शुभ मुहूर्त — कब करें शुभ कार्य

6 मई के प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:12 से 4:54 बजे तक। प्रातः सन्ध्या: सुबह 4:33 से 5:37 बजे तक। अमृत काल: सुबह 8:42 से 10:30 बजे तक। विजय मुहूर्त: दोपहर 2:32 से 3:25 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:58 से 7:19 बजे तक। निशिता मुहूर्त: रात 11:56 बजे से 12:39 बजे (7 मई) तक।

ये समय महत्वपूर्ण शुभ कार्यों, यात्रा आरंभ, गृह प्रवेश और व्यापारिक निर्णयों के लिए उत्तम माने जाते हैं।

राहुकाल और अशुभ समय — इनसे बचें

इस दिन के अशुभ समय का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। राहुकाल दोपहर 12:18 से 1:58 बजे तक रहेगा। यमगंड सुबह 7:17 से 8:57 बजे तक, गुलिक काल सुबह 10:38 से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 11:51 से 12:45 बजे तक, वर्ज्य समय दोपहर 2:06 से 3:54 बजे तक और गण्ड मूल सुबह 5:37 से दोपहर 3:54 बजे तक प्रभावी रहेगा।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार राहुकाल और दुर्मुहूर्त में यात्रा, महत्वपूर्ण निर्णय, नया व्यवसाय आरंभ या कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।

आज का विशेष संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब ज्येष्ठ मास की शुरुआत के साथ ग्रीष्मकाल अपने चरम पर है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना जलदान, छाया-दान और सेवा-कार्यों के लिए विशेष पुण्यदायी माना जाता है। सिद्ध योग और चतुर्थी तिथि का संयोग इस बुधवार को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत अनुकूल बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह लाखों भारतीयों की दैनिक निर्णय-प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है — विवाह, व्यापार, यात्रा और गृह प्रवेश सब इसी से तय होते हैं। डिजिटल युग में पंचांग की खोज में तेज़ी यह दर्शाती है कि आधुनिकता और आस्था साथ-साथ चल रही हैं। हालांकि, ज्योतिषीय समय-निर्धारण को वैज्ञानिक प्रमाण का आधार नहीं माना जाता — यह विशुद्ध रूप से परंपरागत और सांस्कृतिक आस्था पर आधारित है, जिसे पाठक अपनी श्रद्धा के अनुसार ग्रहण करें।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

6 मई 2026 को कौन-सी तिथि है?
6 मई 2026 को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार पूरे दिन चतुर्थी का ही मान माना जाएगा।
6 मई को राहुकाल कितने बजे से है?
6 मई को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में यात्रा, महत्वपूर्ण निर्णय और शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
6 मई 2026 का अमृत काल कब है?
6 मई को अमृत काल सुबह 8 बजकर 42 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। यह समय शुभ कार्यों, पूजा-पाठ और नए कार्य आरंभ करने के लिए उत्तम माना जाता है।
6 मई को कौन-सा नक्षत्र है?
6 मई को मूल नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र प्रारंभ होगा। गण्ड मूल नक्षत्र होने के कारण इस दिन विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
चतुर्थी तिथि पर कौन-सी पूजा विशेष फलदायी होती है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चतुर्थी तिथि श्री गणेश जी की पूजा के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। बुधवार और चतुर्थी का संयोग इस दिन गणेश पूजन को विशेष रूप से फलदायी बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले