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उत्तानपादासन से पाचन समस्याओं में राहत: आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सही तरीका

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उत्तानपादासन से पाचन समस्याओं में राहत: आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सही तरीका

सारांश

आयुष मंत्रालय ने उत्तानपादासन को पाचन सुधारने का सरल उपाय बताया है। पेट की मांसपेशियों पर हल्का दबाव डालने वाला यह आसन गैस, कब्ज़ और अपच में राहत देता है — और गहरी साँस से मानसिक तनाव भी कम करता है। घर पर बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने एक्स पर उत्तानपादासन के फायदे और सही विधि साझा की।
यह आसन पेट की मांसपेशियों और पेल्विक फ्लोर को मज़बूत करता है तथा गैस, कब्ज़ व अपच में राहत देता है।
पैरों को 30 से 45 डिग्री तक उठाने की इस मुद्रा से पेट के निचले हिस्से में रक्त संचार बेहतर होता है।
धीमी और गहरी श्वास के कारण यह तंत्रिका तंत्र को शिथिल कर मानसिक तनाव भी कम करता है।
उच्च रक्तचाप , पीठ दर्द , गर्भावस्था या हालिया पेट की सर्जरी के मामले में डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।

उत्तानपादासन — योग का एक सरल किंतु प्रभावशाली आसन — पाचन तंत्र को मज़बूत करने और गैस, कब्ज़ व अपच जैसी आम समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक माना जाता है। आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा की गई एक पोस्ट में बताया कि यह आसन पेट की मांसपेशियों और पेल्विक फ्लोर को सक्रिय करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे घर पर बिना किसी उपकरण के, केवल एक समतल और साफ सतह पर किया जा सकता है।

उत्तानपादासन क्या है और यह कैसे काम करता है

उत्तानपादासन में पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को 30 से 45 डिग्री तक ऊपर उठाया जाता है। इस स्थिति में पेट के निचले हिस्से पर हल्का दबाव बनता है, जिससे उस क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यही प्रक्रिया पाचन तंत्र को सक्रिय करती है और आँतों की कार्यक्षमता को सुधारती है।

आज की जीवनशैली में लंबे समय तक बैठे रहना, अनियमित खानपान और तनाव पाचन संबंधी विकारों के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में यह आसन उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है जिन्हें खाने के बाद भारीपन महसूस होता है या जिनका पेट नियमित रूप से साफ नहीं रहता।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव

उत्तानपादासन का लाभ केवल शारीरिक नहीं है। इस आसन के दौरान धीमी और गहरी श्वास लेने से तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) शिथिल होता है, जिससे चिंता और मानसिक बेचैनी में कमी आती है। पढ़ाई या कार्यालय के दबाव में रहने वाले लोगों के लिए यह मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

गहरी साँस और शरीर की स्थिर मुद्रा का संयोजन मस्तिष्क को शांत करता है — यह योग की उस समग्र दृष्टि का हिस्सा है जो शरीर और मन को एक साथ संबोधित करती है।

सही विधि: कैसे करें उत्तानपादासन

आयुष मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस आसन की विधि इस प्रकार है:

पहला चरण: जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों हाथ शरीर के बगल में रखें और हथेलियाँ ज़मीन की ओर हों।

दूसरा चरण: धीरे-धीरे सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ 30 से 45 डिग्री तक ऊपर उठाएं।

तीसरा चरण: इस स्थिति में कुछ सेकंड रुकें, फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों को वापस ज़मीन पर लाएं। इसे अपनी क्षमता के अनुसार दोहराया जा सकता है।

सावधानियाँ: किन्हें विशेष ध्यान देना चाहिए

यह आसन सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), पीठ दर्द या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है, उन्हें इसे सावधानी के साथ करना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं और हाल ही में पेट की शल्य चिकित्सा (सर्जरी) करवाने वाले व्यक्तियों को यह आसन शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य है। किसी भी नई योग दिनचर्या को अपनाने से पहले प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ का मार्गदर्शन लेना हमेशा बेहतर रहता है।

आगे की राह

आयुष मंत्रालय नियमित रूप से योग और आयुर्वेद से जुड़ी जानकारियाँ साझा करता रहता है। 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पृष्ठभूमि में इस तरह के आसनों का प्रचार-प्रसार और भी प्रासंगिक हो जाता है। उत्तानपादासन जैसे सरल आसनों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करना पाचन स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में एक छोटा लेकिन सार्थक कदम हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस तरह की पोस्टों में अक्सर वैज्ञानिक शोध का स्पष्ट संदर्भ नहीं होता — जो E-E-A-T की दृष्टि से एक कमज़ोर कड़ी है। उत्तानपादासन के पाचन-लाभ पर कुछ छोटे अध्ययन उपलब्ध हैं, पर बड़े क्लिनिकल ट्रायल अभी सीमित हैं। जब सरकारी मंत्रालय स्वास्थ्य सलाह देता है, तो पाठकों की अपेक्षा होती है कि दावों के पीछे प्रमाण-आधार भी स्पष्ट किया जाए। योग को दैनिक जीवन में शामिल करना निःसंदेह लाभकारी है, पर सावधानियों की जानकारी उतनी ही ज़रूरी है जितनी लाभों की।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तानपादासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
उत्तानपादासन एक लेटकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को 30 से 45 डिग्री तक ऊपर उठाया जाता है। हथेलियाँ ज़मीन की ओर रखते हुए धीरे-धीरे साँस लेते हुए पैर उठाएं, कुछ सेकंड रोकें और फिर साँस छोड़ते हुए वापस लाएं।
उत्तानपादासन पाचन के लिए कैसे फायदेमंद है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पेट के निचले हिस्से पर हल्का दबाव डालता है जिससे वहाँ रक्त संचार बेहतर होता है। इससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है और गैस, कब्ज़, अपच व पेट दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
क्या उत्तानपादासन मानसिक तनाव में भी मदद करता है?
हाँ, इस आसन के दौरान की जाने वाली धीमी और गहरी श्वास तंत्रिका तंत्र को शिथिल करती है। इससे चिंता और बेचैनी कम होती है, जो इसे पढ़ाई या कार्यालय के दबाव में रहने वाले लोगों के लिए उपयोगी बनाता है।
उत्तानपादासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
उच्च रक्तचाप, पीठ दर्द या रीढ़ की हड्डी की गंभीर समस्या वाले लोगों को यह आसन सावधानी से करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और हाल ही में पेट की सर्जरी करवाने वाले व्यक्तियों को इसे शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है।
उत्तानपादासन करने के लिए किन चीज़ों की ज़रूरत होती है?
इस आसन के लिए किसी विशेष उपकरण या स्थान की आवश्यकता नहीं है। एक साफ और समतल सतह — जैसे योग मैट या ज़मीन — पर्याप्त है। इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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