क्या उत्तानपादासन पाचन, तनाव और पेट दर्द में राहत दे सकता है? आयुष मंत्रालय ने बताया इसका सही तरीका

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क्या उत्तानपादासन पाचन, तनाव और पेट दर्द में राहत दे सकता है? आयुष मंत्रालय ने बताया इसका सही तरीका

सारांश

उत्तानपादासन योगासन के माध्यम से पाचन, तनाव और पेट दर्द में राहत पाने का सरल उपाय है। जानें इसके सही तरीके और फायदों के बारे में।

Key Takeaways

  • उत्तानपादासन से पेट की मांसपेशियों में ताकत बढ़ती है।
  • अभ्यास से मन को शांति और संतुलन मिलता है।
  • इस आसन द्वारा पाचन में सुधार होता है।
  • तनाव को कम करने में यह आसन मददगार साबित होता है।
  • विशेष सावधानी हाइपरटेंशन और पीठ दर्द वाले लोगों के लिए आवश्यक है।

नई दिल्ली, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों मोबाइल या लैपटॉप के सामने बैठना, अनियमित खानपान और नींद की कमी... ये सभी चीजें धीरे-धीरे हमारे शरीर को कमजोर कर रही हैं। बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक पेट की परेशानियाँ, अपच, गैस और तनाव जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में दवाइयों के अतिरिक्त, योगासन इन समस्याओं का एक सरल उपाय है।

खास बात यह है कि योग के कई आसन ऐसे हैं जिन्हें घर पर आसानी से किया जा सकता है। इन्हीं में से एक है 'उत्तानपादासन'। मंगलवार को आयुष मंत्रालय ने इस आसन से संबंधित एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की, जिसमें तस्वीरों के माध्यम से इसे करने की सही विधि और इसके फायदों के बारे में विस्तार से बताया गया।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्तानपादासन करने से पेट की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और नाभि केंद्र का संतुलन बना रहता है। यह न केवल पाचन संबंधी परेशानियों से राहत देता है, बल्कि मन को भी शांत करता है और चिंता को दूर करता है। यह आसन खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो अक्सर अपच, गैस, या पेट दर्द जैसी समस्याओं से जूझते हैं।

जब हम इस आसन का अभ्यास करते हैं, तो हमारे पेट और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है। इससे मांसपेशियों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और वे मजबूत बनती हैं। इसका असर सीधा पाचन तंत्र पर पड़ता है। भोजन पचने की प्रक्रिया में सुधार आता है और गैस या कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। जिन लोगों को रोज पेट साफ नहीं होता या जिन्हें खाने के बाद भारीपन लगता है, उनके लिए यह आसन बेहद फायदेमंद है।

उत्तानपादासन से केवल शरीर को ही नहीं, मन को भी शांति मिलती है। जब हम धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते हैं, तो दिमाग को आराम मिलता है। यह तरीका हमारे नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक असर डालता है और तनाव कम करता है। पढ़ाई या ऑफिस के तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए यह आसन मन को स्थिर रखने में मदद करता है।

हालांकि, आयुष मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि किसी को ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन या पीठ में दर्द की समस्या है, तो उन्हें यह आसन बहुत सावधानी से करना चाहिए ताकि शरीर पर ज्यादा दबाव न पड़े और आसन का लाभ भी मिल सके। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और हाल में पेट की सर्जरी करवा चुके लोगों को भी यह आसन नहीं करना चाहिए।

उत्तानपादासन करने के लिए, सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाएँ, दोनों हाथ शरीर के पास रखें और हथेलियाँ नीचे की ओर हों। फिर एक गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे दोनों पैरों को करीब 30 से 45 डिग्री तक ऊपर उठाएँ। कुछ समय तक इसी स्थिति में रुकें और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएँ।

Point of View

उत्तानपादासन केवल एक योगासन नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य प्रबंधन का उपाय है। इसका महत्व आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में और भी बढ़ गया है। सही अभ्यास से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार संभव है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

उत्तानपादासन के क्या फायदे हैं?
उत्तानपादासन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है।
क्या गर्भवती महिलाएँ उत्तानपादासन कर सकती हैं?
नहीं, गर्भवती महिलाओं को उत्तानपादासन करने से बचना चाहिए।
उत्तानपादासन किस प्रकार किया जाता है?
उत्तानपादासन के लिए, पीठ के बल लेटकर पैरों को 30 से 45 डिग्री तक उठाना होता है।
क्या यह आसन सभी के लिए सुरक्षित है?
यदि किसी को हाइपरटेंशन या पीठ में दर्द है, तो सावधानी बरतें।
उत्तानपादासन करने का सही समय क्या है?
सुबह खाली पेट उत्तानपादासन करना सबसे फायदेमंद होता है।