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एनएमसी ने दी 13,186 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी, भारत में कुल सीटें 1.40 लाख के पार

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एनएमसी ने दी 13,186 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी, भारत में कुल सीटें 1.40 लाख के पार

सारांश

नेशनल मेडिकल कमीशन ने 2026-27 सत्र के लिए 13,186 नई एमबीबीएस सीटें मंजूर की हैं, जिससे देश में कुल सीटें 1,40,214 हो गई हैं। असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे NEET उम्मीदवारों और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ा अवसर बताया है।

मुख्य बातें

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए देशभर में 13,186 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी।
836 मेडिकल कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट सीटों की कुल संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई (राष्ट्रीय महत्व के संस्थान अलग)।
कर्नाटक , तमिलनाडु और बिहार समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर इस विस्तार को मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य क्षमता बढ़ाने वाला कदम बताया।
पूर्वोत्तर भारत के लिए यह विस्तार विशेष रूप से महत्वपूर्ण, क्योंकि क्षेत्र में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचा मजबूत हो रहा है।

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए देशभर में 13,186 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी है, जिससे 836 मेडिकल कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटों की कुल संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई है। इस ऐतिहासिक विस्तार का स्वागत करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे भारत की मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा क्षमता को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्य घटनाक्रम

एनएमसी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 'राष्ट्रीय महत्व' के संस्थानों की सीटों को छोड़कर यह संख्या 1,40,214 तक पहुँच गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) में भाग लेने वाले लाखों छात्रों के बीच एमबीबीएस सीटों की माँग लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह नई मंजूरी हाल के वर्षों में मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को विस्तार देने की केंद्र सरकार और एनएमसी की निरंतर कोशिशों का हिस्सा है।

किन राज्यों को मिला अधिक लाभ

केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ कर्नाटक, तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्यों में सीटों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन राज्यों में पहले से स्थापित मेडिकल कॉलेजों के नेटवर्क को और सशक्त किया गया है। यह विस्तार उन राज्यों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहाँ डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात राष्ट्रीय औसत से पीछे है।

पूर्वोत्तर और असम पर असर

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में कहा कि यह विस्तार मेडिकल की पढ़ाई के इच्छुक छात्रों के लिए अवसरों का विस्तार करता है और देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में योगदान देगा। असम और समग्र पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए यह विस्तार और भी प्रासंगिक है, क्योंकि यह क्षेत्र अपनी मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है। हाल के वर्षों में असम में मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हुआ है, और राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नागरिकों को बेहतर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें और क्षेत्रीय छात्रों के लिए अधिक अवसर उत्पन्न हों।

मेडिकल शिक्षा की बड़ी तस्वीर

भारत में मेडिकल शिक्षा की माँग और आपूर्ति के बीच की खाई लंबे समय से चिंता का विषय रही है। NEET-UG में हर साल 20 लाख से अधिक छात्र भाग लेते हैं, जबकि पहले उपलब्ध सीटें इस माँग के अनुपात में काफी कम थीं। एनएमसी की यह मंजूरी उस असंतुलन को कम करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। केंद्र सरकार और एनएमसी ने अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट दोनों स्तरों पर सीटें बढ़ाने और नए मेडिकल कॉलेज खोलने पर ज़ोर दिया है।

आगे क्या

आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से NEET-UG उत्तीर्ण उम्मीदवारों को हज़ारों अतिरिक्त सीटों का लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विस्तार से भारत के स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और दीर्घकालिक रूप से देश में प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी को पाटा जा सकेगा। इस विस्तार की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई स्वीकृत सीटों वाले कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढाँचा और संकाय सुनिश्चित किया जाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या नई स्वीकृत सीटों वाले कॉलेज गुणवत्तापूर्ण संकाय, प्रयोगशालाएँ और क्लिनिकल प्रशिक्षण सुविधाएँ भी सुनिश्चित कर पाएंगे। भारत में मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और मात्रा के बीच की खाई पहले से चिंता का विषय रही है, और एनएमसी की पिछली रिपोर्टों में भी कई कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कमी उजागर हुई है। NEET-UG में हर साल 20 लाख से अधिक उम्मीदवार बैठते हैं — सीटें बढ़ना स्वागतयोग्य है, पर अगर गुणवत्ता पर समझौता हुआ तो डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता नहीं सुधरेगी। मुख्यमंत्री सरमा की सराहना राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, लेकिन पूर्वोत्तर के लिए तब तक यह महत्वपूर्ण नहीं होगी जब तक असम और उसके पड़ोसी राज्यों में इन सीटों का अनुपात स्पष्ट न हो।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएमसी ने कितनी नई एमबीबीएस सीटें मंजूर की हैं और कुल संख्या क्या है?
नेशनल मेडिकल कमीशन ने 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए 13,186 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी है, जिससे 836 मेडिकल कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटों की कुल संख्या 1,40,214 हो गई है। इस आँकड़े में 'राष्ट्रीय महत्व' के संस्थानों की सीटें शामिल नहीं हैं।
असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा ने इस फैसले पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस विस्तार का स्वागत किया और इसे मेडिकल की पढ़ाई के इच्छुक छात्रों के लिए अवसर बढ़ाने और देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया।
किन राज्यों को नई एमबीबीएस सीटों का सबसे अधिक लाभ मिला है?
केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ कर्नाटक, तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्यों में सीटों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। कई अन्य राज्यों में भी अतिरिक्त सीटें जोड़ी गई हैं।
पूर्वोत्तर और असम के छात्रों के लिए यह विस्तार क्यों महत्वपूर्ण है?
असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र अपने मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है। इस विस्तार से क्षेत्रीय छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी।
NEET-UG उम्मीदवारों पर इस बढ़ोतरी का क्या असर होगा?
2026-27 शैक्षणिक सत्र से NEET-UG उत्तीर्ण उम्मीदवारों को 13,186 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों का लाभ मिलेगा, जिससे प्रतिस्पर्धा की स्थिति में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। भारत में हर साल 20 लाख से अधिक उम्मीदवार NEET-UG देते हैं, इसलिए यह बढ़ोतरी मेडिकल प्रवेश की प्रतिस्पर्धा को कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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