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रिम्स में MBBS सीटें 180 से 250, PG 176 से 275 होंगी; झारखंड सरकार ने विस्तार प्रस्ताव की शुरुआत की

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रिम्स में MBBS सीटें 180 से 250, PG 176 से 275 होंगी; झारखंड सरकार ने विस्तार प्रस्ताव की शुरुआत की

सारांश

झारखंड सरकार ने रिम्स, रांची में MBBS सीटें 180 से 250, PG 176 से 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटें 11 से 100 करने की तैयारी शुरू की है। केंद्र-राज्य 60:40 फंडिंग मॉडल के तहत प्रति सीट ₹1.5 करोड़ तक की सहायता मिलेगी — राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने की दिशा में यह बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

रिम्स, रांची में एमबीबीएस सीटें 180 से 250 , पीजी सीटें 176 से 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटें 11 से 100 करने का प्रस्ताव तैयार होगा।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने रिम्स प्रबंधन को विस्तृत प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया; प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
केंद्र सरकार की योजना के तहत प्रति अतिरिक्त सीट ₹1.5 करोड़ तक सहायता; लागत में 60% केंद्र और 40% राज्य का हिस्सा।
जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज और धनबाद के एसएनएमएमसीएच के प्रस्तावों को केंद्र पहले ही मंजूरी दे चुका है।
रिम्स-2 परियोजना के तहत PPP मॉडल पर छात्रावास निर्माण की भी योजना।

झारखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में मेडिकल शिक्षा के व्यापक विस्तार की प्रक्रिया 10 जून 2026 को औपचारिक रूप से शुरू हो गई। राज्य सरकार ने एमबीबीएस, पीजी और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटें उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है, जिससे झारखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने रिम्स प्रबंधन को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। यह प्रस्ताव तैयार होने के बाद राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, जहाँ से अंतिम स्वीकृति मिलनी होगी।

प्रस्तावित विस्तार के अनुसार, एमबीबीएस सीटें 180 से बढ़ाकर 250, पीजी सीटें 176 से बढ़ाकर 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटें 11 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है। सुपर स्पेशियलिटी में यह वृद्धि सबसे उल्लेखनीय है — मौजूदा संख्या का लगभग नौ गुना।

वित्त पोषण की संरचना

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार की एक योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में सीट विस्तार के लिए प्रति अतिरिक्त सीट करीब ₹1.5 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध है। इस योजना की कुल लागत में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी।

गौरतलब है कि इसी योजना के तहत जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज और धनबाद के एसएनएमएमसीएच में एमबीबीएस और पीजी सीटों में वृद्धि के प्रस्तावों को केंद्र सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है। रिम्स का प्रस्ताव उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।

बुनियादी ढाँचे का विकास

सीट वृद्धि के साथ-साथ नए भवनों का निर्माण, पुराने भवनों का जीर्णोद्धार, आधुनिक उपकरणों की खरीद और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव भी तैयार किया जाएगा। जहाँ जर्जर भवन हैं, वहाँ उन्हें हटाकर नई संरचनाएँ खड़ी की जाएँगी।

इसके अतिरिक्त, रिम्स-2 परियोजना के अंतर्गत छात्रावासों के निर्माण की भी योजना है। सरकार इन छात्रावासों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनाने की संभावना तलाश रही है, ताकि सरकारी खर्च सीमित रहे और छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएँ मिल सकें।

आम जनता और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

झारखंड में प्रति हजार जनसंख्या पर डॉक्टरों का अनुपात राष्ट्रीय औसत से कम बताया जाता है। रिम्स में सीटों की यह संभावित वृद्धि न केवल राज्य में प्रशिक्षित चिकित्सकों की आपूर्ति बढ़ाएगी, बल्कि सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की उपलब्धता में भी सुधार ला सकती है — जिसके लिए अभी मरीजों को अक्सर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।

आगे की प्रक्रिया

रिम्स प्रबंधन को पहले विस्तृत प्रस्ताव तैयार करना होगा, जिसे इसके बाद राज्य सरकार केंद्र को भेजेगी। केंद्रीय स्वीकृति और वित्त आवंटन के बाद ही निर्माण और उपकरण खरीद की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। प्रस्ताव की समयसीमा फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती बुनियादी ढाँचे से कहीं अधिक है — योग्य फैकल्टी की उपलब्धता। झारखंड जैसे राज्यों में सुपर स्पेशियलिस्ट शिक्षकों को आकर्षित करना ऐतिहासिक रूप से कठिन रहा है, और एनएमसी के मानक इस पर कड़े हैं। यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है — केंद्रीय स्वीकृति, फंड आवंटन और निर्माण की लंबी प्रक्रिया बाकी है। जमशेदपुर और धनबाद के अनुभव से सीख लेकर यदि रिम्स का प्रस्ताव ठोस फैकल्टी भर्ती योजना के साथ आता है, तभी यह विस्तार कागज़ से ज़मीन पर उतर सकेगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिम्स रांची में कितनी सीटें बढ़ाई जाएँगी?
प्रस्ताव के अनुसार एमबीबीएस सीटें 180 से 250, पीजी सीटें 176 से 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटें 11 से 100 की जाएँगी। यह प्रस्ताव अभी तैयार हो रहा है और इसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलनी बाकी है।
रिम्स सीट विस्तार के लिए फंडिंग कहाँ से आएगी?
केंद्र सरकार की योजना के तहत प्रति अतिरिक्त सीट करीब ₹1.5 करोड़ तक की सहायता मिलती है। इस योजना में 60 प्रतिशत खर्च केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है।
झारखंड के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी सीटें बढ़ी हैं?
हाँ, जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज और धनबाद के एसएनएमएमसीएच में एमबीबीएस और पीजी सीटों में वृद्धि के प्रस्तावों को केंद्र सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है। रिम्स का प्रस्ताव उसी योजना की अगली कड़ी है।
रिम्स-2 परियोजना क्या है?
रिम्स-2 परियोजना के तहत रिम्स परिसर में छात्रावासों का निर्माण प्रस्तावित है। सरकार इन्हें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनाने की संभावना तलाश रही है ताकि सरकारी खर्च कम हो और छात्रों को बेहतर सुविधाएँ मिलें।
रिम्स में सीट वृद्धि से झारखंड को क्या फायदा होगा?
अधिक सीटों से राज्य में प्रशिक्षित डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद है। विशेष रूप से सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भारी वृद्धि से उन मरीजों को राहत मिल सकती है जिन्हें अभी इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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