रिम्स में MBBS सीटें 180 से 250, PG 176 से 275 होंगी; झारखंड सरकार ने विस्तार प्रस्ताव की शुरुआत की
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में मेडिकल शिक्षा के व्यापक विस्तार की प्रक्रिया 10 जून 2026 को औपचारिक रूप से शुरू हो गई। राज्य सरकार ने एमबीबीएस, पीजी और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटें उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है, जिससे झारखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने रिम्स प्रबंधन को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। यह प्रस्ताव तैयार होने के बाद राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, जहाँ से अंतिम स्वीकृति मिलनी होगी।
प्रस्तावित विस्तार के अनुसार, एमबीबीएस सीटें 180 से बढ़ाकर 250, पीजी सीटें 176 से बढ़ाकर 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटें 11 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है। सुपर स्पेशियलिटी में यह वृद्धि सबसे उल्लेखनीय है — मौजूदा संख्या का लगभग नौ गुना।
वित्त पोषण की संरचना
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार की एक योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में सीट विस्तार के लिए प्रति अतिरिक्त सीट करीब ₹1.5 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध है। इस योजना की कुल लागत में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी।
गौरतलब है कि इसी योजना के तहत जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज और धनबाद के एसएनएमएमसीएच में एमबीबीएस और पीजी सीटों में वृद्धि के प्रस्तावों को केंद्र सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है। रिम्स का प्रस्ताव उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।
बुनियादी ढाँचे का विकास
सीट वृद्धि के साथ-साथ नए भवनों का निर्माण, पुराने भवनों का जीर्णोद्धार, आधुनिक उपकरणों की खरीद और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव भी तैयार किया जाएगा। जहाँ जर्जर भवन हैं, वहाँ उन्हें हटाकर नई संरचनाएँ खड़ी की जाएँगी।
इसके अतिरिक्त, रिम्स-2 परियोजना के अंतर्गत छात्रावासों के निर्माण की भी योजना है। सरकार इन छात्रावासों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनाने की संभावना तलाश रही है, ताकि सरकारी खर्च सीमित रहे और छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएँ मिल सकें।
आम जनता और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
झारखंड में प्रति हजार जनसंख्या पर डॉक्टरों का अनुपात राष्ट्रीय औसत से कम बताया जाता है। रिम्स में सीटों की यह संभावित वृद्धि न केवल राज्य में प्रशिक्षित चिकित्सकों की आपूर्ति बढ़ाएगी, बल्कि सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की उपलब्धता में भी सुधार ला सकती है — जिसके लिए अभी मरीजों को अक्सर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।
आगे की प्रक्रिया
रिम्स प्रबंधन को पहले विस्तृत प्रस्ताव तैयार करना होगा, जिसे इसके बाद राज्य सरकार केंद्र को भेजेगी। केंद्रीय स्वीकृति और वित्त आवंटन के बाद ही निर्माण और उपकरण खरीद की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। प्रस्ताव की समयसीमा फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।