रिम्स रांची में मेडिकल सीटें बढ़ेंगी: यूजी में 70, पीजी में 99 और पोस्ट-पीजी में 89 नई सीटें, ₹830 करोड़ का विस्तार प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में मेडिकल शिक्षा की क्षमता बड़े पैमाने पर बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। 12 अगस्त 2026 को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में तय किया गया कि यूजी सीटें 180 से बढ़ाकर 250, पीजी सीटें 176 से बढ़ाकर 275 और पोस्ट-पीजी सीटें 11 से बढ़ाकर 100 की जाएंगी। इन विस्तार योजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।
बैठक में क्या हुआ
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को हुई इस समीक्षा बैठक में रिम्स के शैक्षणिक विस्तार और अस्पताल प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, रिम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा और सहायक निदेशक बाघमारे प्रसाद कृष्ण सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
एनएमसी की सैद्धांतिक मंजूरी
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने यूजी सीटों में वृद्धि के प्रस्ताव को कुछ शर्तों के साथ सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मेडिकल कॉलेजों में सीटों की कमी और डॉक्टर-मरीज अनुपात को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि झारखंड जैसे राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी राष्ट्रीय औसत से पीछे है, जिससे इस विस्तार का महत्व और बढ़ जाता है।
बुनियादी ढाँचे पर ₹830 करोड़ का निवेश
सीटों में वृद्धि के साथ रिम्स के बुनियादी ढाँचे को भी आधुनिक बनाने की योजना है। पुराने आईपीडी, ओपीडी और एकेडमिक ब्लॉक के नवीनीकरण एवं विस्तार के लिए करीब ₹380 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे केंद्र प्रायोजित योजना (सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम) के तहत भेजा जाएगा। इसके अलावा रिम्स के नॉर्थ और साउथ कैंपस में स्थित हॉस्टल और क्वार्टर के जीर्णोद्धार के साथ पीजी और पोस्ट-पीजी हॉस्टल के निर्माण तथा स्टेडियम कॉम्प्लेक्स के विकास पर करीब ₹450 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इन परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित करने का प्रस्ताव है।
मरीज प्रबंधन में सुधार के निर्देश
बैठक में मरीजों की भर्ती और छुट्टी की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को उचित रेफरल व्यवस्था के जरिए ही रिम्स भेजा जाए और बिना रेफरल आने वाले मरीजों को केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही भर्ती किया जाए।
आगे क्या होगा
डीपीआर तैयार होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। एनएमसी की शर्तें पूरी होने पर यूजी सीटों में वृद्धि को औपचारिक मंजूरी मिलने की उम्मीद है। यदि सभी प्रस्ताव स्वीकृत होते हैं, तो रिम्स झारखंड ही नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के प्रमुख मेडिकल संस्थानों में से एक बन सकता है।