पंजाब में MBBS फीस 8.5% बढ़ी: दलजीत चीमा बोले— मेधावी छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर दोहरी मार
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब सरकार द्वारा 2026-27 के लिए सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस में भारी वृद्धि किए जाने के फैसले पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने 8 अगस्त 2026 को इस निर्णय की तीखी आलोचना करते हुए इसे मेधावी छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ खुला अन्याय करार दिया।
फीस वृद्धि का पूरा ब्यौरा
डॉ. चीमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी अपने बयान में बताया कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में साढ़े पाँच वर्षीय एमबीबीएस कोर्स की कुल ट्यूशन फीस ₹9.98 लाख से बढ़ाकर ₹10.83 लाख कर दी गई है — यानी 8.5 प्रतिशत की वृद्धि। निजी मेडिकल कॉलेजों में स्थिति और भी गंभीर है।
सरकारी कोटा की फीस में 17.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹21.48 लाख से बढ़ाकर ₹25.22 लाख कर दिया गया है। वहीं, प्रबंधन कोटा की फीस ₹55.25 लाख से बढ़कर ₹64.71 लाख तक पहुँच गई है।
डॉक्टरों के रोज़गार संकट से जोड़ा मुद्दा
डॉ. चीमा ने फीस वृद्धि को एक बड़े संकट के संदर्भ में रखा। उनके अनुसार हज़ारों युवा डॉक्टर वर्षों की कठिन पढ़ाई और संघर्ष के बाद भी अस्थायी रोज़गार और अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी सेवा में कई डॉक्टरों को केवल करीब ₹50,000 प्रतिमाह वेतन पर काम करना पड़ रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब समेत कई राज्यों में मेडिकल ब्रेन-ड्रेन की चिंता पहले से बनी हुई है। गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में पंजाबी डॉक्टर और मेडिकल पेशेवर विदेशों में बेहतर अवसरों की तलाश में पलायन कर चुके हैं।
सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य नीति का सवाल
अकाली नेता ने कहा कि यह मामला केवल फीस वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यावसायिक शिक्षा तक पहुँच, सामाजिक न्याय, मेडिकल प्रतिभाओं को राज्य में बनाए रखने और पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा बुनियादी मुद्दा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब सरकार राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को आखिर क्या संदेश देना चाहती है — एक तरफ मेडिकल शिक्षा लगातार महंगी की जा रही है, दूसरी तरफ डॉक्टरों को उचित सम्मान और अवसर नहीं मिल रहे।
विपक्ष की माँगें
डॉ. चीमा ने पंजाब सरकार से तीन प्रमुख माँगें रखीं: फीस वृद्धि के फैसले की तत्काल समीक्षा, छात्रों और अभिभावकों को राहत, और मेडिकल शिक्षा को सुलभ बनाने तथा सरकारी चिकित्सा सेवा को आकर्षक एवं सम्मानजनक बनाने के लिए व्यापक नीति तैयार करना।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति रही तो राज्य की बेहतरीन चिकित्सा प्रतिभाएँ महंगी शिक्षा के बाद बेहतर अवसरों की तलाश में पंजाब या देश छोड़ने को मजबूर हो जाएँगी — जो दीर्घकालिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए घातक साबित होगा। अब देखना यह होगा कि पंजाब सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या नहीं।