9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब में MBBS फीस 8.5% बढ़ी: दलजीत चीमा बोले— मेधावी छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर दोहरी मार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब में MBBS फीस 8.5% बढ़ी: दलजीत चीमा बोले— मेधावी छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर दोहरी मार

सारांश

पंजाब में एमबीबीएस फीस में 8.5% से 17.4% तक की बढ़ोतरी ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल के डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने इसे मेधावी और मध्यमवर्गीय छात्रों पर दोहरी मार बताते हुए तत्काल समीक्षा की माँग की है।

मुख्य बातें

पंजाब सरकार ने 2026-27 से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस फीस 8.5% बढ़ाकर ₹10.83 लाख की।
निजी कॉलेजों में सरकारी कोटा फीस 17.4% बढ़कर ₹25.22 लाख , प्रबंधन कोटा ₹64.71 लाख हुई।
शिरोमणि अकाली दल के डॉ.
दलजीत सिंह चीमा ने फैसले को मेधावी और मध्यमवर्गीय छात्रों के साथ अन्याय बताया।
चीमा के अनुसार सरकारी सेवा में कई डॉक्टरों को मात्र ₹50,000 प्रतिमाह वेतन पर काम करना पड़ रहा है।
विपक्ष ने फीस वृद्धि की तत्काल समीक्षा और मेडिकल शिक्षा को सुलभ बनाने की माँग की।

पंजाब सरकार द्वारा 2026-27 के लिए सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस में भारी वृद्धि किए जाने के फैसले पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने 8 अगस्त 2026 को इस निर्णय की तीखी आलोचना करते हुए इसे मेधावी छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ खुला अन्याय करार दिया।

फीस वृद्धि का पूरा ब्यौरा

डॉ. चीमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी अपने बयान में बताया कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में साढ़े पाँच वर्षीय एमबीबीएस कोर्स की कुल ट्यूशन फीस ₹9.98 लाख से बढ़ाकर ₹10.83 लाख कर दी गई है — यानी 8.5 प्रतिशत की वृद्धि। निजी मेडिकल कॉलेजों में स्थिति और भी गंभीर है।

सरकारी कोटा की फीस में 17.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹21.48 लाख से बढ़ाकर ₹25.22 लाख कर दिया गया है। वहीं, प्रबंधन कोटा की फीस ₹55.25 लाख से बढ़कर ₹64.71 लाख तक पहुँच गई है।

डॉक्टरों के रोज़गार संकट से जोड़ा मुद्दा

डॉ. चीमा ने फीस वृद्धि को एक बड़े संकट के संदर्भ में रखा। उनके अनुसार हज़ारों युवा डॉक्टर वर्षों की कठिन पढ़ाई और संघर्ष के बाद भी अस्थायी रोज़गार और अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी सेवा में कई डॉक्टरों को केवल करीब ₹50,000 प्रतिमाह वेतन पर काम करना पड़ रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब समेत कई राज्यों में मेडिकल ब्रेन-ड्रेन की चिंता पहले से बनी हुई है। गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में पंजाबी डॉक्टर और मेडिकल पेशेवर विदेशों में बेहतर अवसरों की तलाश में पलायन कर चुके हैं।

सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य नीति का सवाल

अकाली नेता ने कहा कि यह मामला केवल फीस वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यावसायिक शिक्षा तक पहुँच, सामाजिक न्याय, मेडिकल प्रतिभाओं को राज्य में बनाए रखने और पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा बुनियादी मुद्दा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब सरकार राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को आखिर क्या संदेश देना चाहती है — एक तरफ मेडिकल शिक्षा लगातार महंगी की जा रही है, दूसरी तरफ डॉक्टरों को उचित सम्मान और अवसर नहीं मिल रहे।

विपक्ष की माँगें

डॉ. चीमा ने पंजाब सरकार से तीन प्रमुख माँगें रखीं: फीस वृद्धि के फैसले की तत्काल समीक्षा, छात्रों और अभिभावकों को राहत, और मेडिकल शिक्षा को सुलभ बनाने तथा सरकारी चिकित्सा सेवा को आकर्षक एवं सम्मानजनक बनाने के लिए व्यापक नीति तैयार करना।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति रही तो राज्य की बेहतरीन चिकित्सा प्रतिभाएँ महंगी शिक्षा के बाद बेहतर अवसरों की तलाश में पंजाब या देश छोड़ने को मजबूर हो जाएँगी — जो दीर्घकालिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए घातक साबित होगा। अब देखना यह होगा कि पंजाब सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ उन्हीं सीटों से निकले डॉक्टरों को सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा। प्रबंधन कोटा की फीस का ₹64.71 लाख तक पहुँचना यह भी दर्शाता है कि मेडिकल शिक्षा तेज़ी से केवल संपन्न वर्ग की पहुँच तक सिमटती जा रही है। बिना ठोस छात्रवृत्ति नीति और डॉक्टरों के लिए बेहतर सेवा शर्तों के, यह वृद्धि पंजाब की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचा सकती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में एमबीबीएस की फीस 2026-27 में कितनी बढ़ी है?
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में साढ़े पाँच वर्षीय एमबीबीएस की कुल ट्यूशन फीस ₹9.98 लाख से बढ़ाकर ₹10.83 लाख की गई है, यानी 8.5% की वृद्धि। निजी कॉलेजों में सरकारी कोटा 17.4% बढ़कर ₹25.22 लाख और प्रबंधन कोटा ₹64.71 लाख हो गई है।
दलजीत चीमा ने पंजाब सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
शिरोमणि अकाली दल के डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने पंजाब सरकार से फीस वृद्धि की तत्काल समीक्षा, छात्रों और अभिभावकों को राहत, तथा मेडिकल शिक्षा को सुलभ और सरकारी चिकित्सा सेवा को आकर्षक बनाने के लिए व्यापक नीति तैयार करने की माँग की है।
पंजाब में सरकारी डॉक्टरों को कितना वेतन मिल रहा है?
डॉ. चीमा के दावे के अनुसार सरकारी सेवा में कई डॉक्टरों को केवल करीब ₹50,000 प्रतिमाह वेतन पर काम करना पड़ रहा है। यह आँकड़ा उन्होंने एक्स पर जारी अपने बयान में उद्धृत किया।
पंजाब में एमबीबीएस फीस वृद्धि से किन छात्रों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा?
आलोचकों का कहना है कि इस वृद्धि का सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय और मेधावी छात्रों पर पड़ेगा, जो आर्थिक रूप से निजी कॉलेजों की बढ़ी हुई फीस वहन करने में सक्षम नहीं हैं। विशेषकर प्रबंधन कोटा की ₹64.71 लाख की फीस सामान्य परिवारों की पहुँच से बाहर है।
क्या पंजाब सरकार ने फीस वृद्धि पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक पंजाब सरकार की ओर से इस फीस वृद्धि के फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले