भगवंत मान वीडियो विवाद: फोरेंसिक रिश्वत कांड में गुरुग्राम पुलिस ने दो गिरफ्तार, BJP ने माँगा इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े वीडियो विवाद ने 24 जून 2026 को एक गंभीर आपराधिक मोड़ ले लिया, जब गुरुग्राम पुलिस ने एक कथित फोरेंसिक रिश्वत कांड में दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मान पर हमले और तेज कर दिए तथा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की माँग की।
फोरेंसिक रिश्वत कांड: क्या है पूरा मामला
फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह की शिकायत के आधार पर गुरुग्राम पुलिस ने दिल्ली निवासी अंकित और पंचकूला निवासी अरुण को हिरासत में लिया। जसप्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों — जिनमें एक डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) और एक सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) शामिल हैं — ने उनसे संपर्क कर विवादित वीडियो पर सरकार के पक्ष में फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने के बदले ₹10 लाख की पेशकश की।
सिंह का यह भी दावा है कि उनके द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों पर व्हाट्सऐप के ज़रिए लगातार दबाव डाला गया कि वे ड्राफ्ट रिपोर्ट को तब तक बदलते रहें जब तक वह सरकारी अपेक्षाओं के अनुरूप न हो जाए।
एफआईआर और कानूनी धाराएँ
गुरुग्राम के DLF सेक्टर-29 पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ी धाराएँ लगाई गई हैं — संगठित अपराध, धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में हेराफेरी — के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। दोनों गिरफ्तार व्यक्तियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
BJP की माँग: CFSL जाँच और मान का इस्तीफा
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने मुख्यमंत्री मान को सीधी चुनौती दी। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, 'अगर आपको सच में लगता है कि वीडियो नकली है, तो प्राइवेट ऑपरेटरों से रातों-रात मिले सर्टिफिकेट पर भरोसा करना बंद करें। इसे तुरंत CFSL हैदराबाद, चंडीगढ़, पुणे या भोपाल जैसी किसी स्वतंत्र और नामी लैब में भेजें। जल्दबाजी नहीं, बल्कि विज्ञान को सच सामने लाने दें। पंजाब के लोगों और सिख पंथ को सच्चाई चाहिए, न कि अपनी सुविधा के हिसाब से निकाले गए नतीजे।'
आर.पी. सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को 'सरकार द्वारा प्रायोजित साजिश' करार दिया और कहा कि इसका मकसद मुख्यमंत्री को राजनीतिक और धार्मिक विरोध से बचाना है। उन्होंने एक्स पर यह भी लिखा, 'नकली विज्ञान और सरकारी समर्थन से डरा-धमकाकर पंथ और जनता को गुमराह करना मान सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका है। अब इस्तीफा ही एकमात्र विकल्प बचा है।'
मुख्यमंत्री मान का पक्ष
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विवादित वीडियो को 'मनगढ़ंत' और किसी 'बहुरूपिये की करतूत' बताकर सिरे से खारिज किया है। उन्होंने अकाल तख्त को भी अपना पक्ष प्रस्तुत किया और दावा किया कि यह क्लिप उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए चलाए जा रहे एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा है। गौरतलब है कि मान ने एक निजी फोरेंसिक एजेंसी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वीडियो को फर्जी घोषित किया था — यही वह रिपोर्ट है जिसकी निष्पक्षता पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
गुरुग्राम पुलिस की जाँच अब पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने की संभावना है, जिनके नाम शिकायत में सामने आए हैं। BJP की माँग है कि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) द्वारा स्वतंत्र जाँच कराई जाए। यह मामला पंजाब की राजनीति में एक नया और संवेदनशील अध्याय खोल सकता है, खासकर तब जब सिख धार्मिक संस्थाएँ भी इस विवाद में शामिल हो चुकी हैं।