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भगवंत मान वीडियो केस: गुरुग्राम पुलिस ने 'मनमाफिक' फोरेंसिक रिपोर्ट बनाने के आरोप में दो गिरफ्तार

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भगवंत मान वीडियो केस: गुरुग्राम पुलिस ने 'मनमाफिक' फोरेंसिक रिपोर्ट बनाने के आरोप में दो गिरफ्तार

सारांश

भगवंत मान वीडियो विवाद अब आपराधिक जाँच में तब्दील हो गया है। गुरुग्राम पुलिस ने फोरेंसिक रिपोर्ट को 'मनमाफिक' बनाने के आरोप में दो को गिरफ्तार किया। ₹10 लाख रिश्वत का आरोप, पंजाब पुलिस के डीआईजी-एसपी स्तर के अधिकारी घेरे में, और अकाल तख्त पहले ही वीडियो को असली बता चुका है।

मुख्य बातें

गुरुग्राम पुलिस ने 24 जून 2025 को अंकित (दिल्ली) और अरुण (पंचकूला) को फोरेंसिक रिपोर्ट में हेरफेर के आरोप में गिरफ्तार किया।
फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह ने शिकायत में आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें अनुकूल रिपोर्ट बनाने के लिए ₹10 लाख की पेशकश की।
एफआईआर में पंजाब पुलिस के एक कथित डीआईजी और एक एसपी की संलिप्तता का उल्लेख है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीडियो को पूरी तरह नकारते हुए इसे 'डीपफेक' और बदनाम करने की साजिश बताया है।
अकाल तख्त ने वीडियो को असली करार देते हुए मान को 'गुरु-द्रोही' घोषित किया है।
सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर इसे 'राज्य-प्रायोजित षड्यंत्र' बताया और मान से इस्तीफे की माँग की।

गुरुग्राम पुलिस ने 24 जून 2025 को दो व्यक्तियों — अंकित (दिल्ली) और अरुण (पंचकूला) — को गिरफ्तार किया, जिन पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े एक विवादित वीडियो की फोरेंसिक रिपोर्ट को पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष के अनुरूप ढालने में सहयोग किया। यह गिरफ्तारी फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह की शिकायत पर हुई, जिन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें अनुकूल रिपोर्ट तैयार करने के लिए ₹10 लाख की पेशकश की थी।

मामले का मूल घटनाक्रम

विवाद की जड़ में एक वीडियो क्लिप है जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान को आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया है। मान ने इस वीडियो को पूरी तरह नकारते हुए कहा है कि फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई है और उसमें नज़र आने वाला व्यक्ति वे नहीं, बल्कि एक अभिनेता है। उन्होंने अकाल तख्त को भी यही जानकारी दी।

फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह के अनुसार, उनसे इस वीडियो की जाँच रिपोर्ट तैयार करने के लिए संपर्क किया गया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब पुलिस के एक कथित डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) और एक सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) ने रिपोर्ट के निष्कर्षों को प्रभावित करने की कोशिश की। जसप्रीत ने बताया कि उन्होंने साइबर विशेषज्ञों अंकित और अरुण की मदद ली, और एसपी की लगातार वॉट्सएप निगरानी में रिपोर्ट के मसौदे में बार-बार बदलाव किए गए।

गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की और अंकित तथा अरुण को हिरासत में लिया। दोनों को अदालत में पेश किया जाना है। एफआईआर में पंजाब सरकार के दो अधिकारियों की कथित संलिप्तता का भी उल्लेख है, हालाँकि उनकी गिरफ्तारी की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस गिरफ्तारी को 'राज्य-प्रायोजित षड्यंत्र' का प्रमाण बताया। भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'भगवंत मान वीडियो मामले में पर्दा डालने की कोशिश नाकाम हो गई है। गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ा आपराधिक मामला दर्ज किया है, जिससे फोरेंसिक साक्ष्यों में कथित हेरफेर और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को राजनीतिक एवं धार्मिक नुकसान से बचाने की राज्य-प्रायोजित साजिश का खुलासा हुआ है। एफआईआर किसी 'बम' की तरह गिरी है।'

आर.पी. सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आप नेतृत्व ने कुछ दिन पहले ही एक कथित 'इंडिपेंडेंट लैब रिपोर्ट' का हवाला देकर भगवंत मान को क्लीन चिट दी थी और अकाल तख्त के उस आधिकारिक बयान को चुनौती दी थी जिसमें वीडियो को असली बताया गया था। उनके अनुसार, अब वे प्रयोगशालाएँ 'फर्जी सेटअप' के रूप में बेनकाब हो गई हैं।

धार्मिक संस्थाओं का रुख

सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक सत्ता अकाल तख्त ने इस वीडियो क्लिप को असली करार दिया है और भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' घोषित किया है। इस रुख ने पूरे विवाद को राजनीतिक के साथ-साथ धार्मिक आयाम भी दे दिया है। मान ने अकाल तख्त को स्पष्ट किया था कि फुटेज बनावटी थी, लेकिन तख्त ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया।

आगे क्या होगा

गुरुग्राम पुलिस फिलहाल जाँच जारी रखे हुए है और फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है। एफआईआर में नामजद पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध अगली कार्रवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं। यह मामला अब न केवल राजनीतिक, बल्कि आपराधिक जाँच का विषय बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या राज्य तंत्र का इस्तेमाल फोरेंसिक विज्ञान को राजनीतिक हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है। गुरुग्राम पुलिस की एफआईआर में पंजाब पुलिस के डीआईजी-एसपी स्तर के अधिकारियों का नाम आना — जो अभी आरोप हैं, सिद्ध नहीं — संस्थागत दबाव की गंभीर तस्वीर पेश करता है। दूसरी ओर, भाजपा के आरोप ऐसे समय में आए हैं जब पंजाब में AAP सरकार पहले से दबाव में है, इसलिए राजनीतिक प्रेरणा की संभावना को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। असली कसौटी यह होगी कि क्या जाँच एजेंसियाँ राज्य की सीमाओं के पार जाकर निष्पक्ष तरीके से दोनों पक्षों के दावों की परख कर पाती हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवंत मान वीडियो मामले में गुरुग्राम पुलिस ने किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
गुरुग्राम पुलिस ने अंकित (दिल्ली) और अरुण (पंचकूला) को गिरफ्तार किया, जिन पर आरोप है कि उन्होंने भगवंत मान से जुड़े विवादित वीडियो की फोरेंसिक रिपोर्ट को पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष के अनुसार तैयार करने में सहयोग किया। यह गिरफ्तारी फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह की शिकायत पर हुई।
फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह ने क्या आरोप लगाए हैं?
जसप्रीत सिंह ने दावा किया कि पंजाब पुलिस के एक कथित डीआईजी और एक एसपी ने उन्हें वीडियो के पक्ष में अनुकूल फोरेंसिक रिपोर्ट बनाने के लिए ₹10 लाख की पेशकश की। उन्होंने यह भी बताया कि रिपोर्ट के मसौदे में एसपी की वॉट्सएप निगरानी में बार-बार बदलाव किए गए।
अकाल तख्त का इस विवाद में क्या रुख है?
सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक सत्ता अकाल तख्त ने इस वीडियो क्लिप को असली बताया है और भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' घोषित किया है। मान ने अकाल तख्त को सूचित किया था कि वीडियो बनावटी है, लेकिन तख्त ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया।
भगवंत मान का इस वीडियो पर क्या कहना है?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीडियो को पूरी तरह नकारते हुए कहा है कि फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई है और उसमें दिखने वाला व्यक्ति वे नहीं, बल्कि एक अभिनेता है। उन्होंने इसे अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
गुरुग्राम पुलिस की जाँच जारी है और एफआईआर में नामजद पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध अगली कार्रवाई पर नज़र रहेगी। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जाना है और मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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