31 जुलाई 2026
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अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु-विरोधी' घोषित किया, भाजपा बोली — इस्तीफा दें मुख्यमंत्री

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अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु-विरोधी' घोषित किया, भाजपा बोली — इस्तीफा दें मुख्यमंत्री

सारांश

अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु-विरोधी' घोषित कर उनसे संवाद बंद करने का आदेश दिया। भाजपा ने FIR और इस्तीफे की मांग की, जबकि कांग्रेस ने भी हमला बोला। वायरल वीडियो विवाद के बाद यह पंजाब की राजनीति का सबसे संवेदनशील मोड़ बन गया है।

मुख्य बातें

अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 16 जून को आधिकारिक रूप से 'गुरु-विरोधी' घोषित किया।
तख्त ने निर्देश दिया कि मान के साथ किसी भी स्तर पर संवाद न किया जाए।
भाजपा नेता फतेह जंग बाजवा ने मान के खिलाफ FIR दर्ज करने और उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की।
विवाद की जड़ में वे वीडियो हैं जिनमें मान कथित तौर पर नशे की हालत में गुरु की तस्वीर पर शराब छिड़कते दिख रहे हैं।
कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने महाराजा रणजीत सिंह का उदाहरण देते हुए अकाल तख्त के अधिकार को सर्वोच्च बताया।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त की ओर से 'गुरु-विरोधी' घोषित किए जाने के बाद 16 जून को राजनीतिक हलचल तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों ने इस फैसले को आधार बनाकर मान पर इस्तीफे का दबाव बनाया। अकाल तख्त ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि मान के साथ किसी भी स्तर पर संवाद न किया जाए।

अकाल तख्त का फैसला और पृष्ठभूमि

भाजपा नेता आरपी सिंह ने बताया कि कुछ महीने पहले भगवंत मान के कुछ वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें वे कथित तौर पर नशे की हालत में थे और गुरु की तस्वीर पर शराब छिड़क रहे थे। उन्होंने कहा, "ये वीडियो बेहद आपत्तिजनक हैं।" अकाल तख्त साहिब ने मान सरकार को पहले ही कह दिया था कि या तो वे खुद इन वीडियो की जांच करवाएं या तख्त को जांच करने दें — लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा नेता फतेह जंग बाजवा ने कहा कि जो सिख होकर अपने गुरुओं की इज्जत नहीं करता, उसे पंथ का दोषी माना जाता है। उन्होंने मांग की कि आम आदमी पार्टी (AAP) और विशेष रूप से भगवंत मान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें जेल भेजा जाए। बाजवा ने आगे कहा, "भगवंत मान को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाना चाहिए। अगर वे सिख पंथ और अकाल तख्त साहिब की बात नहीं मानते, तो पंजाब में लोगों का सामना कैसे करेंगे?" उन्होंने यह भी कहा कि मान चाहे कितने भी अच्छे हों, लेकिन जिस तरह के आरोप उन पर हैं, उन्हें कुर्सी छोड़ देनी चाहिए — इससे शायद पंजाब के लोग और सिख समुदाय माफ कर दें।

कांग्रेस का रुख

कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि भगवंत मान ने अकाल तख्त साहिब की बेअदबी की थी। कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, "यहाँ तक कि महाराजा रणजीत सिंह जी ने भी एक बार अकाल तख्त का आदेश माना था। जब उन्हें कोड़े मारने की सजा का आदेश दिया गया, तो वे हाथ जोड़कर खड़े हो गए। सिख समुदाय ने हमेशा अकाल तख्त के सामने सिर झुकाया है और उसके आदेशों का पालन किया है।"

आम जनता और सिख समुदाय पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं। गौरतलब है कि अकाल तख्त का आदेश सिख धार्मिक जीवन में सर्वोच्च नैतिक अधिकार रखता है। बाजवा ने कहा कि अकाल तख्त की इस कार्रवाई के बाद मान के लिए पंजाब में घूमना भी मुश्किल हो जाएगा और उन्होंने इस दिन को भगवंत मान के राजनीतिक जीवन का "काला अध्याय" करार दिया।

आगे क्या होगा

अकाल तख्त के इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें आम आदमी पार्टी और भगवंत मान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद पंजाब की धार्मिक-राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु-विरोधी' क्यों घोषित किया?
अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु-विरोधी' घोषित किया क्योंकि उनके कथित वायरल वीडियो में वे नशे की हालत में गुरु की तस्वीर पर शराब छिड़कते दिख रहे थे। तख्त ने पहले मान सरकार से जांच की मांग की थी, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर यह कार्रवाई की गई।
भाजपा ने भगवंत मान से क्या मांग की है?
भाजपा नेता फतेह जंग बाजवा ने मांग की है कि भगवंत मान के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, उन्हें जेल भेजा जाए और तत्काल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया जाए। उनका कहना है कि जो गुरुओं की बेअदबी करे, वह पंजाब का नेतृत्व करने के योग्य नहीं।
अकाल तख्त का सिख समुदाय में क्या महत्व है?
अकाल तख्त सिख धर्म की सर्वोच्च धार्मिक और नैतिक संस्था है। कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने याद दिलाया कि महाराजा रणजीत सिंह जैसे शक्तिशाली शासक ने भी अकाल तख्त का आदेश मानकर सजा स्वीकार की थी — यह दर्शाता है कि इसका आदेश सिख समुदाय के लिए अंतिम माना जाता है।
कांग्रेस ने इस मामले पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भगवंत मान पर अकाल तख्त साहिब की बेअदबी का आरोप लगाया। वहीं चरणजीत सिंह चन्नी ने ऐतिहासिक परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि सिख समुदाय हमेशा अकाल तख्त के आदेश को सर्वोच्च मानता है।
इस विवाद का पंजाब की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
अकाल तख्त के फैसले के बाद भगवंत मान और AAP के लिए पंजाब के सिख मतदाताओं के बीच अपनी साख बनाए रखना कठिन हो सकता है। भाजपा नेता बाजवा का कहना है कि मान के लिए अब पंजाब में घूमना भी मुश्किल होगा — यह विवाद आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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