अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु-विरोधी' घोषित किया, भाजपा बोली — इस्तीफा दें मुख्यमंत्री
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त की ओर से 'गुरु-विरोधी' घोषित किए जाने के बाद 16 जून को राजनीतिक हलचल तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों ने इस फैसले को आधार बनाकर मान पर इस्तीफे का दबाव बनाया। अकाल तख्त ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि मान के साथ किसी भी स्तर पर संवाद न किया जाए।
अकाल तख्त का फैसला और पृष्ठभूमि
भाजपा नेता आरपी सिंह ने बताया कि कुछ महीने पहले भगवंत मान के कुछ वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें वे कथित तौर पर नशे की हालत में थे और गुरु की तस्वीर पर शराब छिड़क रहे थे। उन्होंने कहा, "ये वीडियो बेहद आपत्तिजनक हैं।" अकाल तख्त साहिब ने मान सरकार को पहले ही कह दिया था कि या तो वे खुद इन वीडियो की जांच करवाएं या तख्त को जांच करने दें — लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा नेता फतेह जंग बाजवा ने कहा कि जो सिख होकर अपने गुरुओं की इज्जत नहीं करता, उसे पंथ का दोषी माना जाता है। उन्होंने मांग की कि आम आदमी पार्टी (AAP) और विशेष रूप से भगवंत मान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें जेल भेजा जाए। बाजवा ने आगे कहा, "भगवंत मान को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाना चाहिए। अगर वे सिख पंथ और अकाल तख्त साहिब की बात नहीं मानते, तो पंजाब में लोगों का सामना कैसे करेंगे?" उन्होंने यह भी कहा कि मान चाहे कितने भी अच्छे हों, लेकिन जिस तरह के आरोप उन पर हैं, उन्हें कुर्सी छोड़ देनी चाहिए — इससे शायद पंजाब के लोग और सिख समुदाय माफ कर दें।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि भगवंत मान ने अकाल तख्त साहिब की बेअदबी की थी। कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, "यहाँ तक कि महाराजा रणजीत सिंह जी ने भी एक बार अकाल तख्त का आदेश माना था। जब उन्हें कोड़े मारने की सजा का आदेश दिया गया, तो वे हाथ जोड़कर खड़े हो गए। सिख समुदाय ने हमेशा अकाल तख्त के सामने सिर झुकाया है और उसके आदेशों का पालन किया है।"
आम जनता और सिख समुदाय पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं। गौरतलब है कि अकाल तख्त का आदेश सिख धार्मिक जीवन में सर्वोच्च नैतिक अधिकार रखता है। बाजवा ने कहा कि अकाल तख्त की इस कार्रवाई के बाद मान के लिए पंजाब में घूमना भी मुश्किल हो जाएगा और उन्होंने इस दिन को भगवंत मान के राजनीतिक जीवन का "काला अध्याय" करार दिया।
आगे क्या होगा
अकाल तख्त के इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें आम आदमी पार्टी और भगवंत मान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद पंजाब की धार्मिक-राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।