शेखपुरा बाढ़ संकट: अधिकारियों को बंधक बनाया, CO पर झाड़ू से हमला, हथियार छीनने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के शेखपुरा जिले में 18 सितंबर 2026 को बाढ़-पीड़ित ग्रामीणों का आक्रोश हिंसक रूप ले लिया, जब सैकड़ों महिलाओं ने अंचलाधिकारी (CO) कार्यालय का घेराव किया, एक अधिकारी पर झाड़ू से प्रहार किया और कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के हथियार छीनने की कोशिश की गई। घाट कुसुम्भा प्रखंड क्षेत्र पिछले 15 दिनों से बाढ़ की चपेट में है और ग्रामीण चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे।
घटनाक्रम: कैसे भड़का आक्रोश
ग्रामीणों की एकमात्र माँग है कि घाट कुसुम्भा प्रखंड को आधिकारिक रूप से बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जाए, ताकि राहत और मुआवज़े का रास्ता खुल सके। जब चार दिनों के अनशन के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो शुक्रवार को आंदोलन उग्र हो गया। सैकड़ों महिलाएँ हाथों में झाड़ू लेकर अंचलाधिकारी कार्यालय के बाहर इकट्ठी हो गईं और अधिकारियों को घेर लिया।
तस्वीरों में महिलाओं को अधिकारियों के समक्ष झाड़ू उठाते और उनसे तीखी बहस करते देखा गया। इसी दौरान भीड़ में शामिल एक महिला ने अंचलाधिकारी पर झाड़ू चला दी, जो उनके सिर पर जा लगी। इसके अलावा, एक महिला को पुलिसकर्मी की राइफल छीनने की कोशिश करते हुए भी देखा गया। मौके पर अफरातफरी मच गई, हालाँकि बाद में ग्रामीणों ने ही बीच-बचाव कर स्थिति को किसी तरह शांत कराया।
15 दिनों की बाढ़, चार दिन का अनशन
गौरतलब है कि घाट कुसुम्भा प्रखंड में पिछले 15 दिनों से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सैकड़ों परिवारों के घरों में पानी घुसा है और लोग भारी कठिनाई में जी रहे हैं। चार दिन से आमरण अनशन पर बैठे पप्पू राज मंडल ने बताया कि उनकी तबीयत काफी बिगड़ चुकी है। उन्होंने कहा, 'जब जनता ने कार्यालय का घेराव किया, तब जाकर अधिकारी यहाँ आए। वे तानाशाह की तरह बातें करते हैं और लोगों से सम्मानपूर्वक बातचीत नहीं करना चाहते।'
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार के कई ज़िले प्रतिवर्ष बाढ़ से तबाह होते हैं, फिर भी राहत की औपचारिक प्रक्रिया अक्सर इतनी सुस्त रहती है कि पीड़ितों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर होना पड़ता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
उप-जिलाधिकारी (SDM) प्रियंका कुमारी ने पत्रकारों को बताया कि ग्रामीण बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित कराने की माँग को लेकर एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा, 'हमने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को एक प्रस्ताव भेजा है। विभागीय स्तर पर निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।' SDM ने यह भी स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सरकार की ओर से ज़रूरी सामग्री मुहैया कराई जा रही है।
अधिकारियों और वीडियोग्राफर को बंधक बनाए जाने की जानकारी मिलने पर SDM प्रियंका कुमारी ने चेतावनी दी कि ऐसी हरकत करने वालों के खिलाफ 'आवश्यक कार्रवाई' की जाएगी। घटना के बाद अंचलाधिकारी स्वयं अनशन स्थल पर पहुँचे और अनशनकारियों से बातचीत का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी माँग पर अडिग रहे।
राजनीतिक समर्थन
पूर्व विधायक विजय सम्राट ने ग्रामीणों की माँग का समर्थन करते हुए कहा कि यह माँग पूरी तरह जायज़ है। उन्होंने कहा, 'लोग चाहते हैं कि क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित किया जाए। हम भी यही चाहते हैं — यहाँ चारों तरफ पानी भरा है।' उनके बयान ने प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया है।
आगे की स्थिति
फिलहाल अनशन जारी है और ग्रामीणों की माँग अनसुनी पड़ी है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति के प्रस्ताव पर निर्णय आने तक तनाव बने रहने की आशंका है। प्रशासन की ओर से कार्रवाई में देरी यदि जारी रही, तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।