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बच्चों में कैंसर के 5 शुरुआती संकेत: WHO की चेतावनी, समय पर पहचान से बचेगी जान

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बच्चों में कैंसर के 5 शुरुआती संकेत: WHO की चेतावनी, समय पर पहचान से बचेगी जान

सारांश

बच्चों के कैंसर के लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे दिखते हैं — यही सबसे बड़ा ख़तरा है। WHO के अनुसार लगातार बुखार, बिना दर्द की गाँठ, हड्डी दर्द, अचानक वज़न घटना और असामान्य रक्तस्राव — ये पाँच संकेत नज़रअंदाज़ नहीं किए जाने चाहिए। समय पर जाँच ही बच्चे की जान बचा सकती है।

मुख्य बातें

WHO के अनुसार बच्चों में कैंसर की शीघ्र पहचान जीवित रहने की संभावना को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है।
लगातार बुखार , असामान्य गाँठ , हड्डियों में दर्द , वज़न कमी और असामान्य रक्तस्राव — पाँच प्रमुख चेतावनी संकेत हैं।
हड्डी का कैंसर विशेष रूप से 10 से 18 वर्ष के किशोरों में अधिक देखा जाता है।
यदि लक्षण 2 सप्ताह से अधिक बने रहें या बिगड़ें, तो तत्काल चिकित्सकीय जाँच अनिवार्य है।
ल्यूकेमिया में अस्थि मज्जा में प्लेटलेट्स की कमी से रक्त का थक्का नहीं बन पाता, जिससे चोट और रक्तस्राव बढ़ता है।

बचपन का कैंसर (Childhood Cancer) एक ऐसी स्वास्थ्य चुनौती है जिसमें शीघ्र पहचान ही सबसे बड़ा हथियार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बच्चों में कैंसर का समय पर निदान उनके जीवित रहने की संभावना को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा देता है। समस्या यह है कि बचपन के कैंसर के कई प्रारंभिक लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण जैसे दिखते हैं, जिससे माता-पिता और चिकित्सक दोनों अक्सर चूक जाते हैं।

शुरुआती पहचान क्यों है इतनी ज़रूरी

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ों की तुलना में बच्चों के कैंसर के लक्षण बहुत धीरे-धीरे और सामान्य बीमारियों के आवरण में सामने आते हैं। यही कारण है कि माता-पिता, शिक्षक और परिवार के सदस्यों को बच्चों में दिखने वाले छोटे-छोटे शारीरिक और व्यावहारिक बदलावों को भी गंभीरता से लेना चाहिए। WHO ने स्पष्ट किया है कि यदि लक्षण 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें या बिगड़ते जाएँ, तो तत्काल चिकित्सकीय जाँच अनिवार्य है।

पाँच प्रमुख चेतावनी संकेत जो नज़रअंदाज़ न करें

1. बिना कारण लगातार बुखार: बच्चों में ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) सबसे आम कैंसर है। इसमें कैंसर कोशिकाएँ अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में स्वस्थ कोशिकाओं की जगह लेने लगती हैं, जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है। साथ ही, ये कोशिकाएँ ऐसे रासायनिक तत्व (पायरोजन) छोड़ती हैं जो मस्तिष्क के तापमान नियंत्रण केंद्र को प्रभावित करते हैं, जिससे बुखार लगातार बना रहता है।

2. असामान्य गाँठ या सूजन: लसिका ग्रंथियों (Lymph Nodes) में कैंसर कोशिकाओं के जमा होने से बिना दर्द वाली गाँठें उभर सकती हैं। यदि यह गाँठ 2 सप्ताह से अधिक बनी हो, साथ में बुखार या वजन में कमी भी हो, तो तुरंत जाँच कराना ज़रूरी है। समय पर इलाज न मिलने पर ये कोशिकाएँ रक्त के माध्यम से फेफड़े, यकृत (Liver) और मस्तिष्क तक फैल सकती हैं।

3. हड्डियों और जोड़ों में दर्द: हड्डी का कैंसर (Bone Cancer) विशेष रूप से 10 से 18 वर्ष के किशोरों में अधिक देखा जाता है, जब हड्डियाँ तेज़ी से विकसित हो रही होती हैं। कैंसर कोशिकाएँ हड्डी के भीतर से उसे कमज़ोर और खोखला कर देती हैं, जिससे लगातार दर्द बना रहता है।

4. बिना कारण वज़न कम होना और असामान्य थकान: कैंसर कोशिकाएँ बच्चे के आहार से प्राप्त कैलोरी और प्रोटीन को अत्यधिक मात्रा में उपयोग कर लेती हैं। नतीजतन, बच्चा खाना खाने के बावजूद वज़न घटाता जाता है और असामान्य रूप से थका हुआ रहता है। इसके अलावा कैंसर ऐसे रसायन छोड़ता है जिससे भूख मर जाती है और माँसपेशियाँ तेज़ी से क्षीण होने लगती हैं।

5. आसानी से चोट लगना और असामान्य रक्तस्राव: ल्यूकेमिया या अन्य रक्त-संबंधी कैंसर में अस्थि मज्जा में कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने से स्वस्थ प्लेटलेट्स का निर्माण रुक जाता है। प्लेटलेट्स की कमी से रक्त का थक्का नहीं बन पाता, जिससे मामूली चोट पर भी ज़्यादा खून बहता है या शरीर पर नीले-बैंगनी निशान बनने लगते हैं।

सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं की सिफारिशें

WHO ने माता-पिता और चिकित्सकों को सलाह दी है कि इन लक्षणों को केवल सामान्य संक्रमण मानकर नज़रअंदाज़ न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन के अधिकांश कैंसर — जिनमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और ब्रेन ट्यूमर प्रमुख हैं — का यदि प्रारंभिक अवस्था में उपचार किया जाए, तो सफलता की दर काफ़ी अधिक होती है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में बाल-कैंसर जागरूकता अभी भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच असमान है। गौरतलब है कि देरी से निदान अक्सर इलाज की जटिलता और खर्च दोनों को कई गुना बढ़ा देता है।

माता-पिता क्या करें

यदि बच्चे में उपरोक्त में से कोई भी लक्षण 2 सप्ताह या उससे अधिक समय तक बना रहे या गंभीर होता जाए, तो बिना देरी किए किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क करें। स्व-निदान या घरेलू उपचार से समय की बर्बादी हो सकती है जो इस स्थिति में बेहद महंगी साबित हो सकती है। नियमित स्वास्थ्य जाँच और सतर्क नज़र ही बच्चे की सुरक्षा की पहली कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज एक अहम पहलू चूक जाती है — भारत में बाल-कैंसर के निदान में देरी केवल जागरूकता की कमी से नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और नैदानिक सुविधाओं की भारी कमी से भी होती है। जब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रशिक्षित बाल रोग ऑन्कोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक 'लक्षण पहचानें और डॉक्टर के पास जाएँ' की सलाह शहरी मध्यवर्ग तक ही सीमित रहेगी। सरकारी स्वास्थ्य नीति में बाल-कैंसर स्क्रीनिंग को प्राथमिकता देना वक्त की माँग है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चों में कैंसर के सबसे आम शुरुआती लक्षण क्या हैं?
बच्चों में कैंसर के पाँच प्रमुख शुरुआती संकेत हैं — बिना कारण लगातार बुखार, बिना दर्द की असामान्य गाँठ, हड्डियों और जोड़ों में लगातार दर्द, बिना कारण वज़न घटना और असामान्य रक्तस्राव या नीले निशान। ये लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए इन्हें नज़रअंदाज़ किया जाता है।
बच्चों में कैंसर का जल्दी पता चलना क्यों ज़रूरी है?
WHO के अनुसार, बच्चों में कैंसर का शीघ्र निदान उनके बचने की संभावना को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा देता है। देरी से निदान न केवल इलाज को जटिल बनाता है, बल्कि कैंसर कोशिकाओं को फेफड़े, यकृत और मस्तिष्क तक फैलने का समय भी देता है।
किस उम्र के बच्चों में हड्डी का कैंसर सबसे अधिक होता है?
हड्डी का कैंसर (Bone Cancer) मुख्य रूप से 10 से 18 वर्ष के किशोरों में अधिक पाया जाता है, जब हड्डियाँ तेज़ी से विकसित हो रही होती हैं। इस दौरान कैंसर कोशिकाएँ हड्डी को अंदर से खोखला कर देती हैं, जिससे लगातार दर्द बना रहता है।
माता-पिता को डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि बच्चे में उपरोक्त कोई भी लक्षण 2 सप्ताह या उससे अधिक समय तक बना रहे, या धीरे-धीरे बिगड़ता जाए, तो तत्काल किसी बाल रोग विशेषज्ञ या ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क करें। स्व-निदान से बचें क्योंकि यह कीमती समय बर्बाद कर सकता है।
बच्चों में ल्यूकेमिया के क्या संकेत होते हैं?
ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) बच्चों में सबसे आम कैंसर है। इसमें लगातार बुखार, असामान्य थकान, शरीर पर नीले-बैंगनी निशान, आसानी से चोट लगना और रक्तस्राव प्रमुख लक्षण हैं। ये लक्षण अस्थि मज्जा में स्वस्थ प्लेटलेट्स और प्रतिरोधक कोशिकाओं के कम होने के कारण उत्पन्न होते हैं।
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