उत्तर प्रदेश सरकार की कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित करने की पहल

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उत्तर प्रदेश सरकार की कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित करने की पहल

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार कैंसर को अधिसूचित रोगों की सूची में शामिल करने की योजना बना रही है। यह निर्णय विशेष रूप से बच्चों में कैंसर के शीघ्र निदान और उपचार को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

Key Takeaways

  • कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित करने की योजना
  • बाल कैंसर की पहचान और उपचार में सुधार
  • स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में वृद्धि
  • उत्तर प्रदेश का वित्तीय सुरक्षा में अग्रणी स्थान
  • कैंसर देखभाल में वैश्विक स्तर पर मॉडल बनने की क्षमता

लखनऊ, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के एक उच्च अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार, जो योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में है, कैंसर (विशेष रूप से बच्चों में होने वाले कैंसर) को अधिसूचित रोगों की सूची में शामिल करने की योजना बना रही है। इस कदम का उद्देश्य शीघ्र निदान और उपचार की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

अधिसूचित रोग वे रोग होते हैं जिनकी जानकारी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, प्रयोगशालाओं और पशु चिकित्सकों द्वारा सरकारी अधिकारियों (स्वास्थ्य विभागों) को देना अनिवार्य होता है।

अधिकारी ने बताया कि बाल कैंसर और अन्य रोगियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग से अधिकारियों को रोग के प्रसार पर नज़र रखने और जन स्वास्थ्य के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी।

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अमित कुमार घोष ने राज्य की कैंसर देखभाल प्रणालियों को सशक्त बनाने के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित करने की संभावना भी शामिल है।

घोष ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश एक ऐसा मॉडल विकसित कर रहा है जहां प्रणालियों, संस्थानों और हितधारकों का सहयोग सुनिश्चित करता है कि कैंसर से प्रभावित हर बच्चे की पहचान हो, उसका उपचार किया जाए और उन्हें सहायता प्रदान की जाए।

सोमवार को लखनऊ में हुई एक राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला के दौरान उन्होंने कहा कि विभागों के समन्वय और साझेदारी के माध्यम से हम स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, वित्तीय सुरक्षा और बेहतर परिणामों की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

मानव अनुसंधान पर भारतीय अनुसंधान आयोग (आईसीएमआर) की केंद्रीय आचार समिति की सदस्य, कैनकिड्स की संस्थापक और चाइल्डहुड कैंसर इंटरनेशनल की डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र की प्रतिनिधि पूनम बगई ने कहा कि उत्तर प्रदेश वित्तीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है। यहां ऐसी योजनाएं हैं जो राज्य की सीमाओं के पार भी बच्चे का समर्थन करती हैं, जिससे उपचार के लिए कहीं भी जाने पर देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित होती है।

स्वयं कैंसर से ठीक हो चुकीं बागई ने कहा कि उत्तर प्रदेश में व्यापक स्तर पर बाल कैंसर देखभाल के लिए विश्व का अग्रणी मॉडल बनने की क्षमता है, जो यह दर्शाता है कि कैसे बड़े क्षेत्र 100 प्रतिशत पहुंच, 100 प्रतिशत वित्तीय सुरक्षा और 60 प्रतिशत उत्तरजीविता दर हासिल कर सकते हैं।

भारत में कैंसर से पीड़ित लगभग 20 प्रतिशत बच्चे उत्तर प्रदेश में निवास करते हैं, और वैश्विक बाल कैंसर के बोझ का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा यहीं है। राज्य में प्रतिवर्ष 14,700 बाल कैंसर के मामले सामने आते हैं, जिनमें से 52 प्रतिशत फिलहाल उपचार प्राप्त कर रहे हैं।

Point of View

जो न केवल कैंसर के मामलों की पहचान में मदद करेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाएगा। यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
06/04/2026

Frequently Asked Questions

कैंसर को अधिसूचित रोग क्यों घोषित किया जा रहा है?
कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित करने का उद्देश्य शीघ्र निदान और उपचार को सरल बनाना है।
इस पहल का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे बच्चों में कैंसर के मामलों की पहचान और उपचार में तेजी आएगी, जिससे उनकी स्वास्थ्य देखभाल में सुधार होगा।
उत्तर प्रदेश में कैंसर के कितने मामले हैं?
उत्तर प्रदेश में प्रति वर्ष लगभग 14,700 बाल कैंसर के मामले सामने आते हैं।
अधिसूचित रोग क्या होता है?
अधिसूचित रोग वह होता है जिसकी जानकारी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं द्वारा सरकारी अधिकारियों को देना अनिवार्य है।
कैंसर देखभाल में उत्तर प्रदेश का क्या स्थान है?
उत्तर प्रदेश कैंसर देखभाल में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है और इसे विश्व का अग्रणी मॉडल बनने की क्षमता है।
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