बच्चों में ये 6 लक्षण दिखें तो न करें नज़रअंदाज़, हो सकते हैं एंग्जायटी-डिप्रेशन के शुरुआती संकेत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बच्चों में ये 6 लक्षण दिखें तो न करें नज़रअंदाज़, हो सकते हैं एंग्जायटी-डिप्रेशन के शुरुआती संकेत

सारांश

हर गुस्सा जिद नहीं — NHM की चेतावनी है कि बच्चों में लगातार हताशा, चिड़चिड़ापन, अचानक मूड बदलना और बिना कारण सिरदर्द-पेट दर्द एंग्जायटी या डिप्रेशन के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। समय पर पहचान और बाल मनोवैज्ञानिक से परामर्श इन समस्याओं को गंभीर होने से रोक सकता है।

मुख्य बातें

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने माता-पिता को बच्चों के असामान्य व्यवहार को शरारत न समझने की सलाह दी है।
बच्चों में लगातार हताशा, चिड़चिड़ापन, अचानक मूड बदलना, हर बात पर गुस्सा, बिना कारण सिरदर्द-पेट दर्द और सामाजिक अलगाव — ये 6 लक्षण एंग्जायटी या डिप्रेशन के संकेत हो सकते हैं।
ये व्यवहार स्कूली दबाव, दोस्तों से विवाद, पारिवारिक कलह या अकेलेपन का परिणाम हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि माता-पिता बच्चों से खुला संवाद बनाए रखें और ज़रूरत पड़ने पर बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से परामर्श लें।
समय पर ध्यान देने से बच्चे की मानसिक समस्याओं को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, बच्चों में हर गुस्सा महज़ जिद नहीं होता — कई बार यह उनकी खामोश मदद की पुकार होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में मानसिक तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन के शुरुआती संकेत अक्सर शारीरिक और व्यवहारिक रूप में सामने आते हैं, जिन्हें माता-पिता प्रायः शरारत या जिद समझकर अनदेखा कर देते हैं। 19 मई 2026 को जारी स्वास्थ्य सलाह में विशेषज्ञों ने अभिभावकों से इन संकेतों को गंभीरता से लेने की अपील की है।

बचपन में मानसिक स्वास्थ्य क्यों है अहम

बचपन जीवन का सबसे नाज़ुक और संवेदनशील दौर होता है। इस उम्र में बच्चे अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने में असमर्थ होते हैं, इसलिए उनकी परेशानी व्यवहार में झलकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो ये समस्याएँ आगे चलकर और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं।

यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब स्कूली दबाव, सोशल मीडिया और पारिवारिक तनाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं। गौरतलब है कि बाल मनोविज्ञान के क्षेत्र में हुए अध्ययन बताते हैं कि शुरुआती हस्तक्षेप से बच्चों की मानसिक समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

ये 6 लक्षण हो सकते हैं चेतावनी के संकेत

NHM और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्नलिखित छह लक्षणों की पहचान की है, जिन पर माता-पिता को विशेष ध्यान देना चाहिए:

१. लगातार हताशा: यदि बच्चा बार-बार निराश महसूस करे या किसी भी गतिविधि में रुचि न ले, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

२. बार-बार सिरदर्द व पेट दर्द: बिना किसी स्पष्ट शारीरिक कारण के बार-बार सिर या पेट में दर्द की शिकायत करना, मानसिक तनाव का शारीरिक संकेत हो सकता है।

३. बढ़ता चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक चिढ़ना या असहिष्णु व्यवहार करना।

४. अचानक मूड बदलना: खुश से अचानक उदास या गुस्सैल हो जाना, जो सामान्य उतार-चढ़ाव से अलग हो।

५. हर बात पर गुस्सा: हर छोटी-बड़ी बात पर क्रोध करना या झगड़ालू व्यवहार अपनाना।

६. सामाजिक अलगाव: दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना, अकेले रहना पसंद करना।

इन लक्षणों के पीछे क्या हो सकते हैं कारण

NHM के अनुसार, ये व्यवहार कई बार स्कूल में पढ़ाई का दबाव, दोस्तों के साथ विवाद, पारिवारिक कलह या गहरे अकेलेपन की ओर इशारा करते हैं। कभी-कभी बच्चे बुलिंग या किसी अन्य मानसिक आघात के कारण भी इस तरह का व्यवहार करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों को केवल 'उम्र की शरारत' कहकर टाला नहीं जाना चाहिए। यह बच्चे की ओर से एक संकेत है कि उसे सुने जाने और समझे जाने की ज़रूरत है।

माता-पिता क्या करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि माता-पिता बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखें और उनकी बातों को ध्यान से सुनें। छोटी-छोटी बातों पर डाँटने की बजाय समझने की कोशिश करें। यदि उपरोक्त लक्षण लगातार दिख रहे हों, तो किसी बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से परामर्श लेना उचित रहेगा।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि माता-पिता बच्चों के सबसे पहले और सबसे भरोसेमंद दोस्त की भूमिका निभा सकते हैं। समय पर दिया गया ध्यान और सही मार्गदर्शन बच्चे की कई मानसिक समस्याओं को बढ़ने से रोक सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज एक बड़े सवाल से चूक जाती है — भारत में बाल मनोवैज्ञानिकों की भारी कमी है, और ग्रामीण या निम्न-आय परिवारों के लिए काउंसलर तक पहुँच लगभग असंभव है। जागरूकता फैलाना ज़रूरी है, लेकिन बिना सुलभ और किफ़ायती मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के, यह सलाह शहरी मध्यवर्ग तक ही सीमित रह जाती है। नीतिगत स्तर पर स्कूलों में प्रशिक्षित काउंसलरों की अनिवार्य तैनाती और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बाल मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल किए बिना, यह पहल अधूरी रहेगी।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चों में एंग्जायटी और डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
NHM के अनुसार, बच्चों में लगातार हताशा, बिना कारण सिरदर्द-पेट दर्द, बढ़ता चिड़चिड़ापन, अचानक मूड बदलना, हर बात पर गुस्सा और सामाजिक अलगाव — ये 6 लक्षण एंग्जायटी या डिप्रेशन के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यदि ये लक्षण लगातार दिखें तो इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
बच्चों में मानसिक तनाव के क्या कारण हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल में पढ़ाई का दबाव, दोस्तों के साथ विवाद, पारिवारिक कलह, बुलिंग और गहरा अकेलापन बच्चों में मानसिक तनाव के प्रमुख कारण हो सकते हैं। कई बार बच्चे इन भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते और उनकी परेशानी व्यवहार में झलकती है।
अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें तो माता-पिता को क्या करना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि माता-पिता बच्चों से खुला संवाद बनाए रखें, उनकी बातें ध्यान से सुनें और उन्हें डाँटने की बजाय समझने की कोशिश करें। यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो किसी बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से परामर्श लेना उचित है।
क्या बच्चों का गुस्सा हमेशा जिद होती है?
नहीं, NHM के अनुसार हर गुस्सा जिद नहीं होता। कई बार यह बच्चे की खामोश मदद की पुकार होती है। यदि गुस्सा बार-बार और बिना स्पष्ट कारण के आए, तो यह मानसिक तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन का संकेत हो सकता है।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना क्यों ज़रूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन जीवन का सबसे संवेदनशील दौर है और इस समय की अनदेखी की गई मानसिक समस्याएँ आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती हैं। शुरुआती पहचान और समय पर हस्तक्षेप से बच्चे की कई मानसिक समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले