6 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'सतलुज' विवाद: FWICE अध्यक्ष बीएन तिवारी बोले — दिलजीत दोसांझ सोच-समझकर चुनें प्रोजेक्ट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'सतलुज' विवाद: FWICE अध्यक्ष बीएन तिवारी बोले — दिलजीत दोसांझ सोच-समझकर चुनें प्रोजेक्ट

सारांश

'सतलुज' को जी5 से हटाए जाने के बाद FWICE अध्यक्ष बीएन तिवारी ने दिलजीत दोसांझ को सीधी नसीहत दी — पैसे नहीं, ज़िम्मेदारी देखकर फिल्में चुनो। यह विवाद ओटीटी कंटेंट रेगुलेशन और कलात्मक स्वतंत्रता की बहस को फिर केंद्र में ले आया है।

मुख्य बातें

FWICE अध्यक्ष बीएन तिवारी ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर 6 जुलाई को अपनी राय सार्वजनिक की।
फिल्म शुक्रवार को जी5 पर रिलीज हुई और रविवार को भारत में प्लेटफॉर्म से हटा ली गई।
जी5 ने कहा — 'मौजूदा हालात को देखते हुए फिल्म अगली सूचना तक उपलब्ध नहीं रहेगी।' फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, निर्देशक हैं हनी त्रेहान ।
तिवारी ने कहा — सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद फिल्म रोकना उचित नहीं; या तो पहले ही रोकें या रिलीज होने दें।

फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने 6 जुलाई को पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर उठे विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कलाकारों को केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक छवि को ध्यान में रखते हुए परियोजनाएँ चुननी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब जी5 ने भारत में इस फिल्म को अचानक अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया।

फिल्म क्यों हटाई गई

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित 'सतलुज' को हनी त्रेहान के निर्देशन में बनाया गया है। फिल्म शुक्रवार को भारत में जी5 पर रिलीज हुई, लेकिन रविवार को इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। जी5 ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी बयान में कहा कि 'मौजूदा हालात को देखते हुए सतलुज फिल्म भारत में अगली सूचना तक उपलब्ध नहीं रहेगी।' स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने यह भी कहा कि वह फिल्म और उसके रचनात्मक विजन के साथ पूरी तरह खड़ा है और जल्द से जल्द इसे दर्शकों तक वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बीएन तिवारी की मुख्य बातें

तिवारी ने कहा कि यदि कोई कंटेंट समाज में तनाव पैदा करता है, तो उसकी सावधानीपूर्वक समीक्षा होनी चाहिए। उनके अनुसार, 'सिनेमा का उद्देश्य मनोरंजन और जानकारी देना है, लेकिन अगर सरकार बार-बार हस्तक्षेप करती है या सेंसर बोर्ड को आपत्ति होती है, तो इसका अर्थ है कि उस सामग्री में कुछ ऐसा था जो आम दर्शकों के लिए उचित नहीं था।'

उन्होंने सेंसरशिप प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि फिल्म सभी आवश्यक कट और सेंसरशिप की प्रक्रिया से गुज़र चुकी है, तो बाद में उसे रोकने का कोई औचित्य नहीं बनता। 'या तो इसे मंजूरी देकर रिलीज किया जाना चाहिए, या सेंसरशिप के चरण में ही अस्वीकार कर देना चाहिए' — यह उनका स्पष्ट तर्क था।

दिलजीत की फिल्म-चयन पर सवाल

तिवारी ने दिलजीत दोसांझ को लेकर कहा कि उन्हें हैरानी है कि वह बार-बार विवादित फिल्में क्यों चुनते हैं। 'वह पंजाब के सुपरस्टार हैं, दुनियाभर में उनके करोड़ों प्रशंसक हैं — ऐसे में उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए ताकि उनकी छवि पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह दिलजीत की प्रतिभा पर सवाल नहीं उठा रहे, बल्कि उनसे यह अपेक्षा कर रहे हैं कि वह किसी प्रोजेक्ट को हाथ में लेने से पहले उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव पर विचार करें।

कलाकार की जिम्मेदारी और 'राष्ट्र सर्वोपरि'

FWICE अध्यक्ष ने कहा कि एक कलाकार का फर्ज़ केवल अभिनय तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना को ध्यान में रखते हुए कलाकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका काम गलत जानकारी न फैलाए, सामाजिक सद्भाव को न बिगाड़े और किसी के द्वारा दुरुपयोग न किया जा सके। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड और ओटीटी कंटेंट पर सरकारी निगरानी को लेकर व्यापक बहस जारी है।

आगे क्या होगा

जी5 ने दर्शकों को भरोसा दिलाया है कि वह 'सही प्रक्रिया अपनाकर और हर उचित तरीका आज़माकर' फिल्म को जल्द वापस लाएगा। फिलहाल फिल्म भारत में अनुपलब्ध है, जबकि दर्शकों की प्रतिक्रिया जबरदस्त रही है। यह मामला ओटीटी कंटेंट रेगुलेशन और कलात्मक स्वतंत्रता के बीच की बारीक रेखा को एक बार फिर सामने ला रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ दिलजीत को ही विवादित फिल्में न चुनने की नसीहत देते हैं — यह दोनों तर्क एक-दूसरे को काटते हैं। 'सतलुज' का मामला दरअसल ओटीटी रेगुलेशन की उस बड़ी खाई को उजागर करता है जहाँ सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद भी सरकारी दबाव में कंटेंट हटाया जा सकता है — और इस पर न तो उद्योग संगठन, न ही नीति-निर्माता कोई स्पष्ट रेखा खींच रहे हैं।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'सतलुज' किस पर आधारित है और इसे किसने बनाया है?
'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म है, जिसे निर्देशक हनी त्रेहान ने बनाया है। इसमें दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं।
'सतलुज' को जी5 से क्यों हटाया गया?
जी5 ने अपने बयान में केवल 'मौजूदा हालात' का हवाला दिया और कहा कि फिल्म अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी। फिल्म शुक्रवार को रिलीज हुई थी और रविवार को हटा ली गई; हटाने का कोई विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया।
FWICE अध्यक्ष बीएन तिवारी ने दिलजीत दोसांझ को क्या सलाह दी?
तिवारी ने कहा कि दिलजीत को विवादित परियोजनाएँ चुनने से पहले उनके सामाजिक प्रभाव पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक कलाकार को सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना को ध्यान में रखते हुए काम चुनना चाहिए।
सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद भी फिल्म रोकी जा सकती है?
तिवारी ने खुद इस पर सवाल उठाया — उनके अनुसार एक बार सेंसर बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद फिल्म को रोकना उचित नहीं है क्योंकि इसमें निर्माता का बड़ा निवेश होता है। उन्होंने कहा कि सभी आपत्तियाँ सेंसरशिप के चरण में ही उठाई जानी चाहिए।
क्या 'सतलुज' भारत में दोबारा उपलब्ध होगी?
जी5 ने कहा है कि वह 'सही प्रक्रिया अपनाकर और हर उचित तरीका आज़माकर' फिल्म को जल्द से जल्द भारतीय दर्शकों तक वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। फिलहाल फिल्म की वापसी की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 3 महीने पहले
  3. 11 महीने पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले