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'सतलुज' विवाद: शशि रंजन बोले — फिल्म बैन से पायरेसी बढ़ेगी, बातचीत हो समाधान

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'सतलुज' विवाद: शशि रंजन बोले — फिल्म बैन से पायरेसी बढ़ेगी, बातचीत हो समाधान

सारांश

दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' ओटीटी से हटाई गई, अब शशि रंजन ने चेतावनी दी — बैन से पायरेसी बढ़ेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल, CBFC और सूचना मंत्रालय प्रतिवादी। जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी पर बनी यह फिल्म अब कानूनी अखाड़े में है।

मुख्य बातें

अभिनेता-निर्माता शशि रंजन ने फिल्म 'सतलुज' का समर्थन करते हुए कहा कि बैन समाधान नहीं, बल्कि पायरेसी को बढ़ावा देता है।
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 3 जुलाई को जी5 पर रिलीज हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद प्लेटफॉर्म से हटा ली गई।
फिल्म पहले 'पंजाब 95' नाम से बनी थी; यह मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल; CBFC , सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय , पंजाब सरकार और जी एंटरटेनमेंट प्रतिवादी।
याचिका में दावा — फिल्म बिना किसी सार्वजनिक आदेश या अदालती निर्देश के हटाई गई।

दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता शशि रंजन इस बहस में खुलकर उतर आए हैं और फिल्म के समर्थन में मज़बूत दलीलें पेश की हैं। उनका कहना है कि किसी फिल्म पर रोक लगाना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि यह पायरेसी को और हवा देता है।

शशि रंजन का रुख: बैन नहीं, बातचीत

शशि रंजन ने कहा, 'फिल्म का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं था, जिसे आपत्तिजनक कहा जाए। आज के दौर में किसी फिल्म को बैन करना समाधान नहीं है। जब किसी फिल्म पर रोक लगाई जाती है तो लोगों की जिज्ञासा और बढ़ जाती है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर उस फिल्म में ऐसा क्या है, जिसे देखने से रोका जा रहा है?'

उन्होंने आगे कहा, 'सतलुज एक अच्छी फिल्म है और इसमें काम करने वाले सभी कलाकारों ने शानदार अभिनय किया है। फिल्म को उसके कंटेंट और कलाकारों के काम के आधार पर देखा जाना चाहिए। अगर किसी बात पर आपत्ति है तो उस पर बातचीत हो सकती है, लेकिन पूरी फिल्म को रोक देना सही तरीका नहीं माना जा सकता।'

पायरेसी की चिंता

शशि रंजन ने फिल्म उद्योग पर पड़ने वाले दीर्घकालिक असर को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'जब किसी फिल्म को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाता है तो लोग उसे दूसरे रास्तों से देखने की कोशिश करते हैं। इससे पायरेसी को बढ़ावा मिलेगा और फिल्म उद्योग को नुकसान होगा। बेहतर होता कि फिल्म को एक सही मंच पर उपलब्ध रहने दिया जाता, ताकि दर्शक कानूनी तरीके से उसे देख पाते।'

फिल्म का सफर और विवाद

फिल्म 'सतलुज' — जो पहले 'पंजाब 95' नाम से बनाई गई थी — 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई थी। रिलीज के कुछ ही समय बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। जी5 ने अपने बयान में कहा था कि अगले आदेश तक फिल्म भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी और उसे दोबारा उपलब्ध कराने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है।

यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है, जिनका किरदार दिलजीत दोसांझ ने निभाया है। फिल्म हटाए जाने के बाद दोसांझ ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता और यह फिल्म अब रुकने वाली नहीं है।

कानूनी मोर्चा: हाई कोर्ट में याचिका

इस विवाद ने अब कानूनी शक्ल भी ले ली है। फिल्म को हटाए जाने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका मोहाली के जीरकपुर निवासी सरवन सिंह ने दाखिल की है, जिन्होंने खुद को जसवंत सिंह खालड़ा की विरासत का समर्थक और जी5 का सब्सक्राइबर बताया है।

याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म को बिना किसी सार्वजनिक आदेश, अदालत के निर्देश या स्पष्ट सरकारी आदेश के प्लेटफॉर्म से हटाया गया। इस मामले में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), पंजाब सरकार और जी एंटरटेनमेंट को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में माँग की गई है कि फिल्म को भारत में दोबारा जी5 पर उपलब्ध कराया जाए।

आगे क्या

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल याचिका पर अब सुनवाई की प्रतीक्षा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ओटीटी कंटेंट नियमन को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो रही है। इस मामले का फैसला आने वाले समय में ओटीटी प्लेटफॉर्मों पर कंटेंट हटाने की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर एक अहम नज़ीर बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर जवाबदेही तय नहीं होती। 'सतलुज' का मामला महज एक फिल्म का नहीं है — यह इस सवाल का है कि डिजिटल मंचों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा कौन और किस प्रक्रिया से तय करेगा। हाई कोर्ट की सुनवाई इस दिशा में एक ज़रूरी नज़ीर बना सकती है, बशर्ते अदालत पारदर्शी प्रक्रिया की माँग करे।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'सतलुज' को जी5 से क्यों हटाया गया?
जी5 ने अपने बयान में कहा कि अगले आदेश तक फिल्म भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी। हालाँकि, याचिकाकर्ता का दावा है कि फिल्म बिना किसी सार्वजनिक आदेश, अदालती निर्देश या स्पष्ट सरकारी आदेश के हटाई गई।
'सतलुज' फिल्म किस पर आधारित है?
यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। इसमें दिलजीत दोसांझ ने मुख्य किरदार निभाया है। फिल्म पहले 'पंजाब 95' नाम से बनाई गई थी, जिसे बाद में 'सतलुज' कर दिया गया।
शशि रंजन ने 'सतलुज' विवाद पर क्या कहा?
शशि रंजन ने कहा कि फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था और किसी फिल्म को बैन करना समाधान नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाने से पायरेसी को बढ़ावा मिलेगा और फिल्म उद्योग को नुकसान होगा।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में क्या माँग की गई है?
मोहाली के जीरकपुर निवासी सरवन सिंह ने दाखिल याचिका में माँग की है कि 'सतलुज' को भारत में दोबारा जी5 पर उपलब्ध कराया जाए। इस मामले में CBFC, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पंजाब सरकार और जी एंटरटेनमेंट को प्रतिवादी बनाया गया है।
क्या 'सतलुज' को दोबारा देखा जा सकेगा?
जी5 ने कहा है कि फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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