पेरियार-अंबेडकर का नाम पॉलिसी नोट से गायब: वीसीके सांसद थिरुमावलवन ने तमिलनाडु सरकार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के अध्यक्ष और सांसद थोल थिरुमावलवन ने रविवार, 30 अगस्त को तमिलनाडु सरकार से स्पष्टीकरण माँगा कि पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के 2026-27 के पॉलिसी नोट में डॉ. बी.आर. अंबेडकर और सामाजिक न्याय के प्रणेता 'पेरियार' ई.वी. रामासामी का उल्लेख क्यों नहीं किया गया। तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए थिरुमावलवन ने इस चूक को गंभीर बताते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों और मंत्रियों को इसका उचित जवाब देना होगा।
विवाद की जड़: पॉलिसी नोट में क्या गायब हुआ
विधानसभा में गुरुवार को पेश किए गए इस पॉलिसी नोट में न केवल पेरियार और अंबेडकर, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और ऐतिहासिक जस्टिस पार्टी का भी कोई उल्लेख नहीं है। इसके अलावा, रिपोर्टों के अनुसार, दस्तावेज़ में मंडल आयोग, पेरियार के सामाजिक आंदोलनों, 'सामुदायिक सरकारी आदेश' और केंद्र सरकार की नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को दिए गए 27 प्रतिशत आरक्षण की ऐतिहासिक शुरुआत का भी जिक्र नहीं है।
गौरतलब है कि पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के पॉलिसी नोट में इन नेताओं और उनके सामाजिक न्याय एवं आरक्षण आंदोलनों में योगदान को प्रमुखता से दर्ज किया गया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: DMK का तीखा हमला
DMK ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) सरकार पर तमिलनाडु के सामाजिक न्याय के इतिहास से अहम अध्यायों को जानबूझकर हटाने का आरोप लगाया। DMK की लीगल विंग के संयुक्त सचिव आई. परंथमन ने कहा कि यह उस राज्य के साथ 'ऐतिहासिक धोखा' है जिसे सामाजिक न्याय का गढ़ माना जाता है।
परंथमन ने आरोप लगाया कि जस्टिस पार्टी और सामाजिक न्याय के प्रमुख नेताओं के योगदान को एक सुनियोजित कोशिश के तहत हटाया गया। DMK ने TVK प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के समर्थन से सत्ता में आने के बावजूद वह 'शैडो भाजपा सरकार' की तरह काम कर रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया: मंत्री ने माँगी माफी
आलोचना के बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री वी. संपत कुमार ने इन कमियों की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने अपनी गलती मानते हुए आश्वासन दिया कि पॉलिसी नोट का संशोधित और अद्यतन संस्करण शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।
वीसीके की व्यापक माँगें: दलित सुरक्षा और स्टालिन की सुरक्षा
थिरुमावलवन ने पॉलिसी नोट विवाद से परे जाकर दलित समुदाय के प्रति सरकार की जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दलितों की सुरक्षा के उपायों को मजबूत करने और उनके कल्याण के लिए विशेष कानून बनाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। वीसीके नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इन वादों को पूरा कराने के लिए दबाव बनाती रहेगी।
थिरुमावलवन ने पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सुरक्षा घटाने के सरकारी फैसले की भी आलोचना की और सरकार से अपील की कि DMK नेता को पहले जैसी सुरक्षा व्यवस्था बहाल की जाए।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में सामाजिक न्याय की राजनीति एक नए मोड़ पर है और TVK सरकार पर विभिन्न दलों का दबाव बढ़ रहा है। मंत्री के माफीनामे के बाद संशोधित पॉलिसी नोट के प्रकाशन पर सभी की नजरें टिकी हैं — यह देखना होगा कि सरकार इन ऐतिहासिक संदर्भों को किस रूप में पुनः शामिल करती है।