तमिलनाडु: कांग्रेस का पलटवार — 2014 से पहले DMK के गठबंधन तोड़ने की दिलाई याद
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की गठबंधन राजनीति पर छिड़ी बहस के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने अपने आलोचकों को तीखा जवाब दिया है। तमिलनाडु कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडणकर ने रविवार, 24 मई को स्पष्ट किया कि पार्टी और उसके नेतृत्व की आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन तमिलनाडु की जनता के लोकतांत्रिक जनादेश का अपमान किसी भी कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस चाहती तो 2014 लोकसभा चुनाव से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) द्वारा लगभग एक दशक पुराना गठबंधन तोड़ने की घटना को फिर से उठा सकती थी — लेकिन पार्टी ने संयम का रास्ता चुना।
चोडणकर का सीधा संदेश
चोडणकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'अगर आप हम पर हमला करना चाहते हैं तो कर सकते हैं, लेकिन उन तमिलनाडु के लोगों पर हमला मत कीजिए जिन्होंने हमें वोट दिया।' उनका यह बयान उन राजनीतिक दलों और नेताओं पर सीधा निशाना था, जो हाल के चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस की भूमिका और प्रदर्शन पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक असहमति और पार्टियों की आलोचना सामान्य प्रक्रिया है, परंतु मतदाताओं की बुद्धिमत्ता और उनके फैसले को राजनीतिक हथियार बनाना अस्वीकार्य है।
2014 का गठबंधन टूटना — एक पुराना घाव
चोडणकर ने इशारों में एक अहम ऐतिहासिक संदर्भ की याद दिलाई। उनके अनुसार, 2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले DMK ने करीब एक दशक तक चले गठबंधन को एकतरफा तोड़ दिया था — जिसे कांग्रेस ने 'बड़ा विश्वासघात' करार दिया। हालांकि उन्होंने इस घटनाक्रम का विस्तृत ब्यौरा देने से परहेज किया और कहा कि पार्टी पुराने विवादों को दोबारा उछालने में विश्वास नहीं रखती।
गौरतलब है कि 2014 के चुनाव में UPA सरकार के खिलाफ माहौल के बीच DMK ने कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ा था, जिसका असर दोनों दलों के प्रदर्शन पर पड़ा था। यह तमिलनाडु की गठबंधन राजनीति का एक निर्णायक मोड़ माना जाता है।
कांग्रेस का संयम और राजनीतिक रणनीति
चोडणकर ने यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस ने व्यक्तिगत हमलों और संगठन पर निशाने का जवाब देने से बचते हुए राजनीतिक संवाद में परिपक्वता बनाए रखी है। उनके अनुसार, पार्टी चुनावी परिणामों और जनता की राय को हमेशा विनम्रता से स्वीकार करती आई है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में हालिया चुनावी घटनाक्रमों के बाद गठबंधन के भविष्य और बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलों का दौर जारी है। आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस का यह पलटवार दरअसल DMK के साथ बराबरी के संबंधों की माँग का संकेत है।
तमिलनाडु की जनता को केंद्र में रखने की कोशिश
चोडणकर ने अपने बयान में बार-बार तमिलनाडु की जनता की राजनीतिक समझदारी और परिपक्वता का उल्लेख किया। उनका कहना था कि यहाँ के मतदाताओं ने हर चुनाव में स्पष्ट सोच और विवेक के साथ अपने मताधिकार का उपयोग किया है, और यह सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है।
आगे की राह देखें तो तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की रूपरेखा और सीट-बँटवारे पर बातचीत और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस का यह रुख यह संकेत देता है कि वह दबाव में झुकने के बजाय सौदेबाजी की स्थिति मजबूत करने में लगी है।