भारत-उज्बेकिस्तान साझेदारी मध्य और दक्षिण एशिया के बीच सेतु बन सकती है: उज्बेक मीडिया रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
ताशकंद से आई एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में उज्बेकिस्तान नेशनल न्यूज एजेंसी (UZA) ने कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहराती रणनीतिक साझेदारी मध्य एशिया और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाले प्रमुख सेतुओं में से एक बन सकती है। यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित उज्बेकिस्तान यात्रा से पहले सामने आई है और द्विपक्षीय संबंधों के नए आयामों को रेखांकित करती है।
संबंधों की नई बुनियाद
UZA की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के संबंध अब केवल राजनयिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे 'संस्थागत मजबूती, विस्तारित आर्थिक सामग्री और संयुक्त मूल्य निर्माण की ओर क्रमिक बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।' रिपोर्ट में इन बदलावों का श्रेय दोनों देशों के नेताओं की 'दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, बुनियादी मतभेदों के अभाव, ऐतिहासिक निकटता और अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता' को दिया गया है।
2017 के बाद से दोनों देशों के बीच आमने-सामने और वर्चुअल प्रारूपों में कम से कम 6 उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय संपर्क हो चुके हैं। भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन, अंतर-सरकारी आयोग और अंतर-संसदीय संपर्कों ने इस राजनीतिक बातचीत को अतिरिक्त स्थिरता प्रदान की है।
साझा वैश्विक दृष्टिकोण
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया कि भारत और उज्बेकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को मजबूत करने, आतंकवाद का मुकाबला करने, अफगानिस्तान को स्थिर करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में समान दृष्टिकोण रखते हैं। दोनों देश 'रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपनाते हैं और गुटबाजी की सोच से मुक्त सहयोग की वकालत करते हैं,' जो उनके संबंधों को बाहरी दबावों के प्रति लचीला बनाता है।
व्यापार कॉरिडोर और चाबहार की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत ने 'नॉर्थ-साउथ' व्यापार कॉरिडोर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी है। इस कॉरिडोर की एक अहम कड़ी चाबहार बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे में भारत निवेश जारी रखने की इच्छाशक्ति दिखा रहा है। यह कदम मध्य एशिया तक भारत की पहुँच को भूमि-बद्ध बाधाओं से मुक्त करने की रणनीति का हिस्सा है।
खनिज संपदा और हरित अर्थव्यवस्था
आर्थिक सहयोग का सबसे उभरता हुआ पहलू खनिज संसाधनों का है। इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे तेजी से बढ़ते भारतीय उद्योगों के लिए तांबा, यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों की माँग बढ़ रही है। उज्बेकिस्तान के पास हरित अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण 32 प्रकार के खनिजों का भंडार है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि आपसी हित 'केवल कच्चे माल की बिक्री में नहीं, बल्कि संयुक्त वैल्यू चेन के निर्माण में है' — जिसमें भूवैज्ञानिक अन्वेषण, हरित धातुओं का प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स व सौर ऊर्जा घटकों का उत्पादन और उर्वरकों का निर्माण शामिल है। इस मॉडल में भारत को 'अधिक स्थिर संसाधन आधार' और उज्बेकिस्तान को 'पूंजी, प्रौद्योगिकी और स्थिर माँग' मिलने की संभावना है।
मोदी यात्रा का महत्व
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी की आगामी यात्रा को 'द्विपक्षीय बातचीत को अतिरिक्त गति प्रदान करने' वाला अवसर बताया गया है, जो हुए समझौतों को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी के लिए नई प्राथमिकताएँ तय करने का मंच बनेगा। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की होड़ तेज हो गई है और मध्य एशिया एक रणनीतिक धुरी के रूप में उभर रहा है।