3 अगस्त 2026
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जयशंकर-उज्बेकिस्तान वार्ता: द्विपक्षीय व्यापार $1 अरब से आगे ले जाने पर सहमति, NAM अध्यक्षता को भारत का समर्थन

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जयशंकर-उज्बेकिस्तान वार्ता: द्विपक्षीय व्यापार $1 अरब से आगे ले जाने पर सहमति, NAM अध्यक्षता को भारत का समर्थन

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर ने उज्बेकिस्तान को भारत के 'विस्तारित पड़ोस' का अहम हिस्सा बताया और $1 अरब के द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाने का संकल्प जताया। भारत ने 2027-2029 के लिए NAM अध्यक्षता में उज्बेकिस्तान को समर्थन देने का आश्वासन दिया — यह मध्य एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच से द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत ने उज्बेकिस्तान को 'विस्तारित पड़ोस का महत्वपूर्ण हिस्सा' बताया; दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार लगभग $1 अरब है।
निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और खनन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का गठन किया गया।
भारत ने 2027-2029 के लिए NAM अध्यक्षता हेतु उज्बेकिस्तान को समर्थन देने का आश्वासन दिया।
आतंकवाद और उग्रवाद पर दोनों देशों का 'शून्य सहनशीलता' का साझा रुख; SCO सहित बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जारी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, खनन और आतंकवाद-विरोध जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर सहमति बनी।

उज्बेकिस्तान: भारत के विस्तारित पड़ोस का अहम हिस्सा

जयशंकर ने बैठक में स्पष्ट किया कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने 'विस्तारित पड़ोस' का एक महत्वपूर्ण अंग मानता है। उन्होंने कहा, 'हमारे बीच हमेशा से लोगों, विचारों और व्यापार का दोनों दिशाओं में लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। हमारे रिश्तों की जड़ें इतिहास और संस्कृति से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं।' यह बयान भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के अनुरूप है, जिसके तहत मध्य एशियाई देशों के साथ संबंध प्रगाढ़ करना एक रणनीतिक प्राथमिकता रही है।

व्यापार और आर्थिक सहयोग का विस्तार

वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग $1 अरब (करीब ₹8,300 करोड़) का द्विपक्षीय व्यापार होता है। जयशंकर ने इस आँकड़े को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों को मिलकर इसे और ऊपर ले जाना है। बैठक में निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और विशेष रूप से खनन क्षेत्र में नए अवसर तलाशने पर चर्चा हुई। गौरतलब है कि उज्बेकिस्तान प्राकृतिक संसाधनों — विशेषकर सोने, यूरेनियम और तांबे — में समृद्ध है, जो भारत की औद्योगिक ज़रूरतों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।

संसदीय मैत्री समूह और राजनीतिक संवाद

विदेश मंत्री ने भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह के गठन की जानकारी साझा की और कहा कि दोनों देशों के जनप्रतिनिधियों के बीच नियमित संवाद से रिश्ते और मज़बूत होंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के नेताओं के बीच 'बहुत करीबी संवाद' बना हुआ है और प्रधानमंत्री उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के प्रति विशेष सम्मान रखते हैं।

आतंकवाद पर साझा रुख और SCO सहयोग

विदेश नीति के मोर्चे पर जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे विषयों पर दोनों देशों की सोच एक जैसी है। उन्होंने उज्बेकिस्तान की सरकार और जनता की इस बात के लिए सराहना की कि उन्होंने 'आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई है।' दोनों देश शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सहित कई बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अफगानिस्तान की स्थिति के चलते मध्य एशिया में सुरक्षा चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

BRICS और NAM: बहुपक्षीय समर्थन

जयशंकर ने बताया कि इस वर्ष भारत BRICS का अध्यक्ष है और उन्होंने BRICS गतिविधियों में उज्बेकिस्तान के सहयोग की सराहना की। साथ ही, उन्होंने 2027 से 2029 तक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान को भारत के समर्थन का आश्वासन दिया — यह एक कूटनीतिक संकेत है जो दोनों देशों के वैश्विक दक्षिण के प्रति साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो चीन के बेल्ट एंड रोड प्रभाव के बरक्स खड़ी है। $1 अरब का व्यापार आँकड़ा दोनों देशों की वास्तविक क्षमता के मुकाबले बेहद मामूली है, और 'इसे बढ़ाना चाहिए' जैसे वाक्य तब तक खोखले लगते हैं जब तक कनेक्टिविटी — यानी अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) जैसे ढाँचे — ज़मीन पर न उतरें। NAM अध्यक्षता के लिए समर्थन एक चतुर बहुपक्षीय चाल है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या भारत खनन और ऊर्जा में ठोस निवेश प्रतिबद्धताओं के साथ आगे आता है, या यह वार्ता भी अच्छे शब्दों तक सीमित रहती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच बैठक में क्या हुआ?
3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, खनन और आतंकवाद-विरोध में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह के गठन की भी जानकारी साझा की गई।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच अभी कितना व्यापार होता है?
वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग $1 अरब (करीब ₹8,300 करोड़) का द्विपक्षीय व्यापार होता है। विदेश मंत्री जयशंकर ने इसे और बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
भारत ने NAM अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान को समर्थन क्यों दिया?
भारत ने 2027 से 2029 तक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान को अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया। यह दोनों देशों के वैश्विक दक्षिण के प्रति साझा दृष्टिकोण और बहुपक्षीय कूटनीति में सहयोग को दर्शाता है।
आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों का क्या रुख है?
दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के प्रति 'शून्य सहनशीलता' की साझा नीति की पुष्टि की। जयशंकर ने उज्बेकिस्तान की आतंकवाद-विरोधी प्रतिबद्धता की सराहना की और SCO सहित बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम जारी रखने पर सहमति जताई।
भारत उज्बेकिस्तान को 'विस्तारित पड़ोस' क्यों मानता है?
भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत मध्य एशियाई देशों को रणनीतिक साझेदार माना जाता है। उज्बेकिस्तान के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं, और देश प्राकृतिक संसाधनों में समृद्ध होने के कारण भारत के लिए आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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