जयशंकर-उज्बेकिस्तान वार्ता: द्विपक्षीय व्यापार $1 अरब से आगे ले जाने पर सहमति, NAM अध्यक्षता को भारत का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, खनन और आतंकवाद-विरोध जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर सहमति बनी।
उज्बेकिस्तान: भारत के विस्तारित पड़ोस का अहम हिस्सा
जयशंकर ने बैठक में स्पष्ट किया कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने 'विस्तारित पड़ोस' का एक महत्वपूर्ण अंग मानता है। उन्होंने कहा, 'हमारे बीच हमेशा से लोगों, विचारों और व्यापार का दोनों दिशाओं में लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। हमारे रिश्तों की जड़ें इतिहास और संस्कृति से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं।' यह बयान भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के अनुरूप है, जिसके तहत मध्य एशियाई देशों के साथ संबंध प्रगाढ़ करना एक रणनीतिक प्राथमिकता रही है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग का विस्तार
वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग $1 अरब (करीब ₹8,300 करोड़) का द्विपक्षीय व्यापार होता है। जयशंकर ने इस आँकड़े को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों को मिलकर इसे और ऊपर ले जाना है। बैठक में निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और विशेष रूप से खनन क्षेत्र में नए अवसर तलाशने पर चर्चा हुई। गौरतलब है कि उज्बेकिस्तान प्राकृतिक संसाधनों — विशेषकर सोने, यूरेनियम और तांबे — में समृद्ध है, जो भारत की औद्योगिक ज़रूरतों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
संसदीय मैत्री समूह और राजनीतिक संवाद
विदेश मंत्री ने भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह के गठन की जानकारी साझा की और कहा कि दोनों देशों के जनप्रतिनिधियों के बीच नियमित संवाद से रिश्ते और मज़बूत होंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के नेताओं के बीच 'बहुत करीबी संवाद' बना हुआ है और प्रधानमंत्री उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के प्रति विशेष सम्मान रखते हैं।
आतंकवाद पर साझा रुख और SCO सहयोग
विदेश नीति के मोर्चे पर जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे विषयों पर दोनों देशों की सोच एक जैसी है। उन्होंने उज्बेकिस्तान की सरकार और जनता की इस बात के लिए सराहना की कि उन्होंने 'आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई है।' दोनों देश शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सहित कई बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अफगानिस्तान की स्थिति के चलते मध्य एशिया में सुरक्षा चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
BRICS और NAM: बहुपक्षीय समर्थन
जयशंकर ने बताया कि इस वर्ष भारत BRICS का अध्यक्ष है और उन्होंने BRICS गतिविधियों में उज्बेकिस्तान के सहयोग की सराहना की। साथ ही, उन्होंने 2027 से 2029 तक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान को भारत के समर्थन का आश्वासन दिया — यह एक कूटनीतिक संकेत है जो दोनों देशों के वैश्विक दक्षिण के प्रति साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।