क्या एनसीआरटीसी को जर्मनी में यूआईटीपी पुरस्कार मिला?

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क्या एनसीआरटीसी को जर्मनी में यूआईटीपी पुरस्कार मिला?

सारांश

एनसीआरटीसी को जर्मनी में यूआईटीपी पुरस्कार मिला है, जो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के लिए है। यह परियोजना न केवल भीड़-भाड़ और प्रदूषण को कम करेगी, बल्कि आधुनिक और कुशल परिवहन विकल्प भी प्रदान करेगी। जानें इस पुरस्कार के महत्व और एनसीआरटीसी की योजनाओं के बारे में।

मुख्य बातें

एनसीआरटीसी को जर्मनी में यूआईटीपी पुरस्कार मिला है।
नमो भारत कॉरिडोर भीड़-भाड़ और प्रदूषण को कम करेगा।
यह परियोजना 180 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रेनों का संचालन करेगी।
परियोजना में समावेशिता पर विशेष जोर दिया गया है।
पर्यावरणीय स्थिरता के लिए कई पहल की जा रही हैं।

नई दिल्ली, 17 जून (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को जर्मनी के हैम्बर्ग में आयोजित यूआईटीपी (इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ पब्लिक ट्रांसपोर्ट) ग्लोबल पब्लिक ट्रांसपोर्ट समिट-2025 में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के लिए ‘सार्वजनिक और शहरी परिवहन रणनीति’ श्रेणी में प्रतिष्ठित यूआईटीपी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2030 तक दिल्ली विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला शहर बनने का अनुमान है। ऐसे में भारत की पहली रीजनल रेल, नमो भारत, एनसीआर में सड़क जाम और वायु प्रदूषण को कम करने में एक महत्वपूर्ण योगदान करेगी। इस कॉरिडोर का लक्ष्य इस क्षेत्र में एक तेज, आधुनिक और कुशल परिवहन विकल्प प्रदान करना है, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता को कम किया जा सके।

इसका उद्देश्य नागरिकों को बेहतर पहुंच के माध्यम से सशक्त बनाना, आर्थिक और सामाजिक अवसरों तक पहुंच के मुद्दों को हल करना और एनसीआर के संतुलित और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। 180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति और 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम परिचालन गति वाली ट्रेनों के साथ, नमो भारत परियोजना में कई उन्नत तकनीकों को शामिल किया गया है। इनमें से कुछ तकनीकें ऐसी हैं, जिन्हें विश्व में पहली बार इस परियोजना में प्रयोग किया जा रहा है, जैसे एलटीई बैकबोन पर ईटीसीएस लेवल 3 सिग्नलिंग

इस प्रणाली में समावेशिता पर विशेष ध्यान दिया गया है। ट्रेनों के संचालन और प्रबंधन (ओएंडएम) में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही, परियोजना के बुनियादी ढांचे को भी जेंडर-सेंसिटिव बनाया गया है, ताकि यह सभी यात्रियों के लिए सुलभ हो सके, जिसमें बच्चे, बुजुर्ग और दिव्यांग शामिल हैं।

पर्यावरणीय सततता के क्षेत्र में भी एनसीआरटीसी द्वारा कई पहल की गई हैं, जैसे 70 प्रतिशत ट्रैक्शन ऊर्जा को नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करना, रीजनरेटिव ब्रेकिंग, सभी स्टेशनों, डिपो, कॉर्पोरेट इमारतों और उप-प्रणालियों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना और कॉरिडोर के साथ-साथ एक प्रभावी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग नेटवर्क स्थापित करना। यह एक भविष्योन्मुख और सतत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली स्थापित करने के लिए एनसीआरटीसी की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

नमो भारत ट्रेनों के परिचालन के साथ ही कॉरिडोर के आस-पास रियल एस्टेट में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। इसका श्रेय अपनी तरह की पहली ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पहल को दिया जा सकता है, जिसके अंतर्गत व्यापक टीओडी फ्रेमवर्क के एक हिस्से के रूप में टीओडी क्षेत्रों को शहरी विकास मास्टरप्लान में शामिल किया गया है। वर्तमान में 82 किमी लंबे कॉरिडोर का न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ के बीच 55 किमी का सेक्शन, 11 स्टेशनों के साथ जनता के लिए परिचालित है।

यूआईटीपी पुरस्कार सार्वजनिक परिवहन में सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कारों में से एक हैं और दुनिया भर में सतत, समावेशी और प्रभावी गतिशीलता को बढ़ावा देने वाली पहलों को मान्यता प्रदान करते हैं। हाल ही में, एनसीआरटीसी ने यूआईसी सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट अवार्ड्स 2024 में ‘सीमलेस कनेक्टिविटी’ और ‘ओवरऑल विनर’ की श्रेणी में भी पुरस्कार जीता था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारत की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह साबित करता है कि हम न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सततता और समावेशिता को बढ़ावा देने में सक्षम हैं।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीआरटीसी को यूआईटीपी पुरस्कार क्यों मिला?
एनसीआरटीसी को दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के लिए 'सार्वजनिक और शहरी परिवहन रणनीति' श्रेणी में यूआईटीपी पुरस्कार मिला है।
नमो भारत कॉरिडोर का उद्देश्य क्या है?
इस कॉरिडोर का उद्देश्य क्षेत्र में एक तेज, आधुनिक और कुशल परिवहन विकल्प प्रदान करना है।
इस परियोजना में कौन सी तकनीकें शामिल हैं?
इसमें कई उन्नत तकनीकें हैं, जैसे कि ईटीसीएस लेवल 3 सिग्नलिंग और एलटीई बैकबोन।
क्या परियोजना में समावेशिता पर ध्यान दिया गया है?
हाँ, ट्रेनों के संचालन में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं और बुनियादी ढांचे को जेंडर-सेंसिटिव बनाया गया है।
परियोजना के पर्यावरणीय पहल क्या हैं?
परियोजना में 70 प्रतिशत ट्रैक्शन ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त की जा रही है और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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