एआईएडीएमके संकट: डिंडीगुल समेत 5 जिलों में गुटीय टकराव, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) का आंतरिक संकट 18 मई 2026 को और गहरा गया, जब पार्टी के दो प्रमुख गुटों के बीच जिला इकाइयों पर नियंत्रण की लड़ाई ने कई ज़िलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा कर दी। विलुप्पुरम, कुड्डालोर, पुदुकोट्टई, करूर और अब डिंडीगुल में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, जहाँ विरोधी गुटों के समर्थक आमने-सामने आ गए।
मुख्य घटनाक्रम
डिंडीगुल में विवाद तब चरम पर पहुँचा जब दो पूर्व मंत्री — नाथम विश्वनाथन और डिंडीगुल श्रीनिवासन — सीधे टकराव की स्थिति में आ गए। विश्वनाथन के समर्थकों ने जिला पार्टी कार्यालय में प्रवेश के लिए पुलिस सुरक्षा की माँग की, जबकि श्रीनिवासन के समर्थकों ने इसका विरोध किया। इसके बाद पुलिस ने प्रवेश मार्ग को सील कर दिया और दोनों गुटों को परिसर में प्रवेश से रोक दिया।
यह टकराव तब और तीखा हो गया जब पार्टी महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने जिला स्तर के उन कई पदाधिकारियों को हटा दिया, जिनके बारे में माना जाता है कि वे विद्रोही गुट से जुड़े हुए हैं। इसके बाद कई पार्टी कार्यालयों पर ताला लगा दिया गया और उन्हें सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।
दो गुटों की स्थिति
एक ओर पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि और सीवी षणमुगम के नेतृत्व वाला विरोधी गुट है, जिसे नाथम विश्वनाथन का समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर ईपीएस खेमा है, जिसके साथ डिंडीगुल श्रीनिवासन मज़बूती से खड़े हैं।
श्रीनिवासन ने अपने समर्थकों के साथ बैठक में दोहराया कि एआईएडीएमके की जनरल काउंसिल ने सर्वसम्मति से एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को पार्टी का जनरल सेक्रेटरी और निर्विवाद नेता स्वीकार किया है। उन्होंने बागी विधायकों के मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का संकेत भी दिया।
विद्रोही गुट की रणनीति
रिपोर्टों के अनुसार, वेलुमणि-षणमुगम गुट ने मौजूदा नेतृत्व ढाँचे को चुनौती देने के लिए आपातकालीन जनरल काउंसिल बैठक बुलाने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं। बागी खेमे के समर्थकों ने पूरे राज्य में जनरल काउंसिल और एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों से हस्ताक्षर जुटाने शुरू कर दिए हैं। उनका दावा है कि उन्हें 1,000 से अधिक सदस्यों का समर्थन पहले ही मिल चुका है।
व्हिप उल्लंघन और कार्रवाई की माँग
ईपीएस खेमा उन 25 बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग पर अड़ा हुआ है, जिन पर विधानसभा में विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने का आरोप है। यह मामला अब कानूनी दायरे में भी पहुँच सकता है, जिसका असर पार्टी की विधानसभा में उपस्थिति पर पड़ सकता है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो रही हैं। यदि विद्रोही गुट आपातकालीन जनरल काउंसिल बुलाने में सफल होता है, तो पार्टी के भीतर नेतृत्व का संघर्ष एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुँच सकता है। दोनों गुटों के बीच यह टकराव जितना लंबा खिंचेगा, एआईएडीएमके के लिए विपक्ष की भूमिका निभाना उतना ही कठिन होता जाएगा।