एआईएडीएमके संकट: डिंडीगुल समेत 5 जिलों में गुटीय टकराव, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप

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एआईएडीएमके संकट: डिंडीगुल समेत 5 जिलों में गुटीय टकराव, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप

सारांश

एआईएडीएमके का गुटीय संकट अब सड़क पर उतर आया है — डिंडीगुल समेत पाँच जिलों में पार्टी कार्यालयों पर ताले और पुलिस पहरा। ईपीएस बनाम वेलुमणि-षणमुगम की यह लड़ाई अब जनरल काउंसिल के हस्ताक्षर अभियान तक पहुँच गई है, और 25 बागी विधायकों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

मुख्य बातें

एआईएडीएमके के दो गुटों के बीच टकराव डिंडीगुल, विलुप्पुरम, कुड्डालोर, पुदुकोट्टई और करूर — कम से कम पाँच जिलों में फैल गया है।
पूर्व मंत्री नाथम विश्वनाथन (वेलुमणि-षणमुगम गुट) और डिंडीगुल श्रीनिवासन (ईपीएस गुट) डिंडीगुल में सीधे आमने-सामने आए।
विद्रोही गुट ने आपातकालीन जनरल काउंसिल बैठक के लिए 1,000 से अधिक सदस्यों का समर्थन जुटाने का दावा किया है।
ईपीएस खेमा उन 25 बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहा है जिन्होंने विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया।
कई पार्टी कार्यालयों पर ताला लगाकर उन्हें पुलिस सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है।

तमिलनाडु में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) का आंतरिक संकट 18 मई 2026 को और गहरा गया, जब पार्टी के दो प्रमुख गुटों के बीच जिला इकाइयों पर नियंत्रण की लड़ाई ने कई ज़िलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा कर दी। विलुप्पुरम, कुड्डालोर, पुदुकोट्टई, करूर और अब डिंडीगुल में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, जहाँ विरोधी गुटों के समर्थक आमने-सामने आ गए।

मुख्य घटनाक्रम

डिंडीगुल में विवाद तब चरम पर पहुँचा जब दो पूर्व मंत्री — नाथम विश्वनाथन और डिंडीगुल श्रीनिवासन — सीधे टकराव की स्थिति में आ गए। विश्वनाथन के समर्थकों ने जिला पार्टी कार्यालय में प्रवेश के लिए पुलिस सुरक्षा की माँग की, जबकि श्रीनिवासन के समर्थकों ने इसका विरोध किया। इसके बाद पुलिस ने प्रवेश मार्ग को सील कर दिया और दोनों गुटों को परिसर में प्रवेश से रोक दिया।

यह टकराव तब और तीखा हो गया जब पार्टी महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने जिला स्तर के उन कई पदाधिकारियों को हटा दिया, जिनके बारे में माना जाता है कि वे विद्रोही गुट से जुड़े हुए हैं। इसके बाद कई पार्टी कार्यालयों पर ताला लगा दिया गया और उन्हें सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।

दो गुटों की स्थिति

एक ओर पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि और सीवी षणमुगम के नेतृत्व वाला विरोधी गुट है, जिसे नाथम विश्वनाथन का समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर ईपीएस खेमा है, जिसके साथ डिंडीगुल श्रीनिवासन मज़बूती से खड़े हैं।

श्रीनिवासन ने अपने समर्थकों के साथ बैठक में दोहराया कि एआईएडीएमके की जनरल काउंसिल ने सर्वसम्मति से एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को पार्टी का जनरल सेक्रेटरी और निर्विवाद नेता स्वीकार किया है। उन्होंने बागी विधायकों के मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का संकेत भी दिया।

विद्रोही गुट की रणनीति

रिपोर्टों के अनुसार, वेलुमणि-षणमुगम गुट ने मौजूदा नेतृत्व ढाँचे को चुनौती देने के लिए आपातकालीन जनरल काउंसिल बैठक बुलाने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं। बागी खेमे के समर्थकों ने पूरे राज्य में जनरल काउंसिल और एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों से हस्ताक्षर जुटाने शुरू कर दिए हैं। उनका दावा है कि उन्हें 1,000 से अधिक सदस्यों का समर्थन पहले ही मिल चुका है।

व्हिप उल्लंघन और कार्रवाई की माँग

ईपीएस खेमा उन 25 बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग पर अड़ा हुआ है, जिन पर विधानसभा में विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने का आरोप है। यह मामला अब कानूनी दायरे में भी पहुँच सकता है, जिसका असर पार्टी की विधानसभा में उपस्थिति पर पड़ सकता है।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो रही हैं। यदि विद्रोही गुट आपातकालीन जनरल काउंसिल बुलाने में सफल होता है, तो पार्टी के भीतर नेतृत्व का संघर्ष एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुँच सकता है। दोनों गुटों के बीच यह टकराव जितना लंबा खिंचेगा, एआईएडीएमके के लिए विपक्ष की भूमिका निभाना उतना ही कठिन होता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 हस्ताक्षरों का दावा और ईपीएस का 25 विधायकों पर कार्रवाई का आग्रह — दोनों मिलकर एक ऐसी स्थिति बना रहे हैं जहाँ अदालतें तय करेंगी कि असली एआईएडीएमके कौन सी है। यह वही रास्ता है जो कभी जयललिता-शशिकला विवाद में चला था, और उसका अंत पार्टी के लिए सुखद नहीं रहा था।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएडीएमके में मौजूदा संकट क्या है?
एआईएडीएमके में महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले गुट और पूर्व मंत्रियों एसपी वेलुमणि तथा सीवी षणमुगम के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट के बीच पार्टी पर नियंत्रण को लेकर तीखा संघर्ष चल रहा है। यह विवाद अब जिला इकाइयों तक फैल गया है और कई स्थानों पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा है।
डिंडीगुल विवाद में कौन-कौन से नेता शामिल हैं?
डिंडीगुल में पूर्व मंत्री नाथम विश्वनाथन (वेलुमणि-षणमुगम गुट) और पूर्व मंत्री डिंडीगुल श्रीनिवासन (ईपीएस गुट) आमने-सामने हैं। विश्वनाथन के समर्थकों ने जिला कार्यालय में प्रवेश की माँग की, जिसे श्रीनिवासन के समर्थकों ने रोका और पुलिस ने दोनों को परिसर में प्रवेश से रोक दिया।
विद्रोही गुट आपातकालीन जनरल काउंसिल क्यों बुलाना चाहता है?
वेलुमणि-षणमुगम गुट मौजूदा नेतृत्व ढाँचे को चुनौती देने के लिए आपातकालीन जनरल काउंसिल बैठक बुलाना चाहता है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने पूरे राज्य में 1,000 से अधिक जनरल काउंसिल और एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्यों के हस्ताक्षर जुटाने का दावा किया है।
25 बागी विधायकों पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
ईपीएस खेमा उन 25 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहा है जिन पर विधानसभा में विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने का आरोप है। डिंडीगुल श्रीनिवासन ने संकेत दिया है कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार फैसला लिया जाएगा और कार्रवाई तय है।
एआईएडीएमके का यह संकट तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर डालेगा?
यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं। यदि पार्टी का विभाजन गहरा होता है, तो एआईएडीएमके की मुख्य विपक्षी दल के रूप में भूमिका कमज़ोर पड़ सकती है और सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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