भारत-EU साझेदारी: AI, क्वांटम और सेमीकंडक्टर में सहयोग के नए रास्ते — डॉ. जितेंद्र सिंह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच रणनीतिक साझेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के नए द्वार खोल रही है। यह बयान यूरोपीय संसद की उद्योग, अनुसंधान एवं ऊर्जा समिति (ITRE) के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान सामने आया।
बैठक का संदर्भ और प्रतिनिधिमंडल
यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऑस्ट्रिया की यूरोपीय संसद सदस्य एंजेलिका विनजिग और यूरोपीय संसद सदस्य राफेले स्टांकानेली ने किया। बैठक में प्रस्तावित भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन, वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करने और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और भारत अपने 'विकसित भारत 2047' के एजेंडे के तहत डीप-टेक में निवेश को प्राथमिकता दे रहा है। गौरतलब है कि भारत-EU प्रौद्योगिकी सहयोग के प्रयास पिछले कई वर्षों से चल रहे हैं, लेकिन अब इन्हें ठोस संस्थागत ढाँचे देने की कोशिश हो रही है।
मंत्री की मुख्य बातें
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार भारत-EU संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने प्रस्तावित FTA पर शीघ्र हस्ताक्षर और उसके प्रभावी क्रियान्वयन को दोनों पक्षों की 'साझा प्राथमिकता' बताया, यह तर्क देते हुए कि यह समझौता व्यवसायों, उपभोक्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
उन्होंने EU को AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत सामग्री, बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों — विशेषकर 6G — में सहयोग बढ़ाने का आमंत्रण दिया। मंत्री ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी संयुक्त अनुसंधान, कौशल विकास और तकनीकी इकोसिस्टम निर्माण के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।
AI सहयोग पर विशेष जोर
डॉ. सिंह ने AI के क्षेत्र में सहयोग को विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान में केंद्रित करने की संभावना रेखांकित की, जहाँ ज़िम्मेदार और विश्वसनीय उपयोग सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और प्रस्तावित 10 अरब यूरो के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च जोखिम और उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा डीप-टेक स्टार्टअप्स को समर्थन देना है।
यूरोपीय पक्ष की प्राथमिकताएँ
यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से एंजेलिका विनजिग ने भारत को EU का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत की औद्योगिक और प्रौद्योगिकी नीतियों को बेहतर ढंग से समझना तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है। उन्होंने औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने और हरित एवं डिजिटल परिवर्तन में दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
आगे की राह
यह बैठक भारत-EU तकनीकी एजेंडे को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना के तहत अनुसंधान, नवाचार और तकनीक के व्यावसायीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है, और EU के साथ यह साझेदारी उस लक्ष्य को वैश्विक आयाम देने का प्रयास है। आने वाले महीनों में FTA वार्ता की प्रगति और ANRF के तहत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं की घोषणा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।