20 अक्टूबर 2026
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परमाणु ऊर्जा से होगा AI और डेटा सेंटरों को बिजली का भविष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह का ब्लूमबर्ग फोरम में बड़ा बयान

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परमाणु ऊर्जा से होगा AI और डेटा सेंटरों को बिजली का भविष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह का ब्लूमबर्ग फोरम में बड़ा बयान

सारांश

भारत का परमाणु कार्यक्रम अब AI युग की ऊर्जा चुनौती का जवाब बनने की ओर है। डॉ. जितेंद्र सिंह का ब्लूमबर्ग फोरम में यह बयान सिर्फ नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि डेटा सेंटरों और AI इन्फ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ऊर्जा भूख के बीच परमाणु ऊर्जा को भारत की दीर्घकालिक रणनीति के केंद्र में रखने का संकेत है।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम 2026 में कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
उन्होंने परमाणु ऊर्जा को AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा माँग पूरी करने का सबसे भरोसेमंद स्रोत बताया।
होमी भाभा की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि परमाणु तकनीक का शांतिपूर्ण उपयोग भारत की कार्यनीति के केंद्र में है।
मोदी सरकार ने परमाणु जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को निजी कंपनियों के लिए खोला है, जिससे नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिला है।
मंत्री ने AI को अलग क्षेत्र नहीं, बल्कि अंतरिक्ष एवं जीवन विज्ञान समेत सभी क्षेत्रों में उपयोगी बहु क्षेत्रीय उपकरण बताया।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम 2026' में स्पष्ट कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यह आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परमाणु ऊर्जा, भारत की अन्य ऊर्जा परियोजनाओं की पूरक बनकर एक तकनीक केंद्रित अर्थव्यवस्था की नींव को मज़बूत करेगी।

होमी भाभा का दृष्टिकोण और भारत की प्रतिबद्धता

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी भाभा की विरासत को याद करते हुए कहा कि भारत ने सदैव परमाणु ऊर्जा का उपयोग शांतिपूर्ण कार्यों और राष्ट्रीय विकास के लिए किया है। उन्होंने कहा कि परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता देश की कार्यनीति के केंद्र में है, जबकि देश अपनी उभरती विकासात्मक एवं तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

गौरतलब है कि भारत दशकों से 'तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम' पर काम कर रहा है, जिसका अंतिम लक्ष्य थोरियम आधारित रिएक्टरों के ज़रिए दीर्घकालिक ऊर्जा स्वनिर्भरता हासिल करना है। इस पृष्ठभूमि में डॉ. सिंह का यह बयान AI युग की ऊर्जा चुनौतियों के साथ उस पुरानी नीति को जोड़ने का प्रयास है।

AI और डेटा सेंटरों के लिए परमाणु ऊर्जा की भूमिका

डॉ. सिंह ने फोरम में कहा कि AI और डेटा सेंटरों के तेज़ विस्तार के लिए ऊर्जा के ऐसे भरोसेमंद स्रोतों की आवश्यकता होगी जो उनकी निरंतर एवं बढ़ती ऊर्जा खपत को पूरा कर सकें। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को इस ज़रूरत के लिए सबसे उपयुक्त विकल्पों में से एक बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बड़ी तकनीकी कंपनियाँ — जैसे Microsoft और Google — अपने AI इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए परमाणु ऊर्जा की ओर रुख कर रही हैं। भारत में भी AI स्टार्टअप और हाइपरस्केल डेटा सेंटरों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ रहा है। मंत्री का यह बयान उस माँग और परमाणु आपूर्ति को सीधे जोड़ता है।

AI को लेकर मंत्री का नज़रिया

डॉ. सिंह ने AI की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे केवल एक अलग क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक बहु क्षेत्रीय उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "अंतरिक्ष एवं जीवन विज्ञान से लेकर वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास के अन्य क्षेत्रों तक, AI एक अत्यंत आवश्यक उपकरण बनता जा रहा है।"

मानवीय समझ के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि AI का प्रभावी उपयोग करने के लिए व्यक्ति का स्वयं भी विवेकशील होना जरूरी है — एक ऐसी टिप्पणी जो AI की बढ़ती निर्भरता के बीच डिजिटल साक्षरता की ज़रूरत को रेखांकित करती है।

निजी क्षेत्र की भागीदारी का विस्तार

केंद्रीय मंत्री ने मोदी सरकार की उस नीति का भी उल्लेख किया, जिसके तहत परमाणु और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील क्षेत्रों को गैर सरकारी कंपनियों के लिए खोला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से उन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी का दायरा बढ़ा है जो पहले बेहद सीमित थे, जिससे उद्योगों को तकनीकी प्रगति, नवाचार एवं राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के नए अवसर मिले हैं।

आलोचकों का कहना है कि परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी के विस्तार के लिए मज़बूत नियामक ढाँचे और पारदर्शी सुरक्षा प्रोटोकॉल की आवश्यकता होगी। आगामी महीनों में सरकार के इस दिशा में उठाए जाने वाले ठोस कदम इस नीति की दिशा स्पष्ट करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिना स्पष्ट नियामक रोडमैप के यह घोषणा महत्वाकांक्षा तो दर्शाती है, ठोस समयसीमा नहीं।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. जितेंद्र सिंह ने परमाणु ऊर्जा और AI को लेकर क्या कहा?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम में कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यह AI तथा डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा माँग को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को अन्य ऊर्जा कार्यक्रमों का पूरक बताया।
भारत का परमाणु कार्यक्रम AI के लिए क्यों ज़रूरी है?
AI और डेटा सेंटरों को निरंतर, बड़े पैमाने पर ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो सौर या पवन ऊर्जा जैसे अनियमित स्रोतों से हमेशा पूरी नहीं हो सकती। परमाणु ऊर्जा एक भरोसेमंद आधारभूत (baseload) स्रोत के रूप में इस ज़रूरत को पूरा करने में सक्षम मानी जाती है।
भारत में परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी कितनी है?
मोदी सरकार ने हाल के वर्षों में परमाणु और अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को निजी कंपनियों के लिए खोला है। डॉ. सिंह के अनुसार इससे उन क्षेत्रों में निजी भागीदारी का दायरा बढ़ा है जो पहले बहुत सीमित थे, हालांकि नियामक ढाँचे के विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
डॉ. होमी भाभा का संदर्भ मंत्री ने क्यों दिया?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी भाभा का उल्लेख यह रेखांकित करने के लिए किया कि भारत की परमाणु नीति की नींव शुरू से ही शांतिपूर्ण और विकासोन्मुख रही है। यह संदर्भ उन आशंकाओं को दूर करने का प्रयास भी था जो परमाणु कार्यक्रम के सैन्य पहलू से जोड़कर देखती हैं।
AI को मंत्री ने किस रूप में परिभाषित किया?
डॉ. सिंह ने AI को एक अलग क्षेत्र नहीं, बल्कि एक बहु क्षेत्रीय उपकरण बताया जिसका उपयोग अंतरिक्ष, जीवन विज्ञान और तकनीकी विकास सहित सभी क्षेत्रों में किया जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि AI के प्रभावी उपयोग के लिए उपयोगकर्ता का स्वयं विवेकशील होना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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