भारत-जापान ने स्वास्थ्य अनुसंधान और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर अहम समझौतों पर किए हस्ताक्षर
सारांश
मुख्य बातें
भारत और जापान ने 6 मई 2026 को स्वास्थ्य अनुसंधान तथा क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग को नई ऊँचाई देने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से दोनों देशों की रणनीतिक वैज्ञानिक साझेदारी और सुदृढ़ होगी तथा भविष्य की उन्नत तकनीकों में नए रास्ते खुलेंगे।
मुख्य समझौते और उनका विवरण
ये समझौते केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जापान की विज्ञान एवं तकनीक नीति मंत्री किमी ओनोडा के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान संपन्न हुए। स्वास्थ्य और मेडिकल उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoC) — जापान चिकित्सा अनुसंधान एवं विकास एजेंसी, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के बीच — पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अतिरिक्त, क्वांटम विज्ञान और तकनीक में सहयोग के लिए जापान के कैबिनेट कार्यालय और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच एक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) पर भी दस्तखत हुए।
पीएम मोदी की जापान यात्रा से जुड़ा संदर्भ
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगस्त 2025 में जापान यात्रा के दौरान हुए समझौतों की अगली कड़ी है। उस दौरान दोनों देशों ने विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। गौरतलब है कि यह बैठक उसी प्रतिबद्धता को ठोस रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत की तकनीकी प्राथमिकताएँ
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जापान के बीच विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में स्वाभाविक तालमेल है — जापान की उन्नत तकनीक और भारत के कुशल मानव संसाधन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने बताया कि भारत में क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर-फिजिकल सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्वच्छ ऊर्जा और एडवांस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से काम हो रहा है, जिससे संयुक्त अनुसंधान और औद्योगिक साझेदारी के नए अवसर उभर रहे हैं।
जापान की प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग
जापान की मंत्री किमी ओनोडा ने भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग की सराहना की। स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों ने संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और फंडिंग के ज़रिए सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा की। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है।
आगे की राह
इन समझौतों के बाद दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान और तकनीकी हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज़ होने की उम्मीद है। भारत-जापान वैज्ञानिक साझेदारी अब केवल द्विपक्षीय कूटनीति नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में दोनों देशों की स्थिति को मज़बूत करने का माध्यम बनती जा रही है।