13 सितंबर 2026
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स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा: 90,942 सीवर-सेप्टिक टैंक श्रमिकों की प्रोफाइलिंग, PPE किट और स्वास्थ्य बीमा कवरेज

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स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा: 90,942 सीवर-सेप्टिक टैंक श्रमिकों की प्रोफाइलिंग, PPE किट और स्वास्थ्य बीमा कवरेज

सारांश

सामाजिक न्याय मंत्रालय ने 90,942 सीवर-सेप्टिक टैंक कर्मियों की प्रोफाइलिंग कर PPE किट, स्वास्थ्य बीमा और ₹34.17 करोड़ की सब्सिडी दी। 3.78 लाख से अधिक कचरा बीनने वालों को भी योजना में शामिल कर आयुष्मान कार्ड प्रक्रिया शुरू — यह अब तक का सबसे बड़ा डेटा-आधारित स्वच्छता श्रमिक कल्याण अभियान है।

मुख्य बातें

90,942 सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों की प्रोफाइलिंग; 89,248 का सत्यापन पूरा।
87,037 सफाई कर्मचारियों को PPE किट और 76,247 को स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिली।
3,78,547 कचरा बीनने वालों की प्रोफाइलिंग; 2,52,163 का ई-केवाईसी सत्यापन; 1,24,835 के आयुष्मान कार्ड की प्रक्रिया जारी।
983 श्रमिकों को ₹34.17 करोड़ की अग्रिम पूंजी सब्सिडी, 364 वाहनों की खरीद के लिए।
753 सुरक्षा उपकरण ERSU को भेजे गए; देशभर में 1,562 कार्यशालाएँ आयोजित।
जून 2024 में योजना का विस्तार — शहरी-ग्रामीण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन श्रमिक भी शामिल।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 13 सितंबर 2026 को खुलासा किया कि देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक से जुड़े 90,942 स्वच्छता कर्मियों की प्रोफाइलिंग पूरी कर ली गई है और उनमें से 89,248 का सत्यापन किया जा चुका है। मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल इन श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

PPE किट वितरण और स्वास्थ्य बीमा की स्थिति

पंत ने बताया कि अब तक 87,037 सफाई कर्मचारियों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट वितरित की जा चुकी हैं। इसके साथ ही 76,247 श्रमिकों को विभिन्न स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के अंतर्गत कवर किया गया है, जो उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा और सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ प्रदान करती हैं। गौरतलब है कि सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई को भारत में अत्यंत जोखिमपूर्ण व्यवसाय माना जाता है, जहाँ हर वर्ष दम घुटने से कई श्रमिकों की मृत्यु की खबरें आती रही हैं।

कचरा बीनने वालों को भी मिला योजना का लाभ

मंत्रालय ने जून 2024 में इस योजना के दायरे का विस्तार करते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कचरा बीनने वालों को भी इसमें शामिल किया। सचिव पंत ने बताया कि कुल 3,78,547 कचरा बीनने वालों की प्रोफाइलिंग की गई है, जिनमें से 2,52,163 का ई-केवाईसी के ज़रिए सत्यापन पूरा हो चुका है। इनमें से 1,31,864 को PPE किट मिली हैं, जबकि 1,24,835 कचरा बीनने वालों का डेटा आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए प्रोसेस किया जा रहा है।

वित्तीय सहायता और मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा

मंत्रालय ने स्वच्छता कर्मियों को वाहन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 983 स्वच्छता कर्मियों को ₹34.17 करोड़ की अग्रिम पूंजी सब्सिडी जारी की है। इस राशि से 364 वाहनों की खरीद की जाएगी, जो मशीनीकृत स्वच्छता अभियान को गति देने के साथ-साथ इन श्रमिकों की आजीविका को भी सशक्त बनाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग उन्मूलन की माँग लंबे समय से उठती रही है।

आपातकालीन सुरक्षा ढाँचा और जागरूकता अभियान

सुरक्षा बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए 753 सुरक्षा उपकरण बड़े नगर निगमों और ज़िलों में स्थापित इमरजेंसी रिस्पांस सेनिटेशन यूनिट्स (ERSU) को भेजे गए हैं। इसके अलावा, सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक मैनुअल सफाई को रोकने के उद्देश्य से देशभर में 1,562 कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें श्रमिकों को सुरक्षित कार्यप्रणाली और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया गया।

आगे की दिशा

सचिव सुधांश पंत ने भरोसा जताया कि ये कदम स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने, कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुँच बढ़ाने और उनकी गरिमा को बनाए रखने की दिशा में मंत्रालय के दीर्घकालिक प्रयासों को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा आधारित इस पहुँच से लाभार्थियों की पहचान पारदर्शी बनेगी — बशर्ते प्रोफाइलिंग के बाद वास्तविक लाभ वितरण की निगरानी भी उतनी ही सख्ती से हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक प्रोफाइल, लाखों कचरा बीनने वाले, और ₹34 करोड़ से अधिक की सब्सिडी — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या प्रोफाइलिंग और वास्तविक लाभ वितरण के बीच की खाई को पाटा जा रहा है। भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग पर कानूनी प्रतिबंध के बावजूद सीवर मौतें जारी हैं — जो बताता है कि घोषणाएँ और ज़मीनी सुरक्षा के बीच अभी भी बड़ा फ़र्क है। 1,562 कार्यशालाएँ सराहनीय हैं, पर ERSU उपकरणों की तैनाती और PPE की गुणवत्ता की स्वतंत्र जाँच का अभाव चिंताजनक है। डेटा-आधारित पहुँच सही दिशा है — क्रियान्वयन की जवाबदेही इसे सार्थक बनाएगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सामाजिक न्याय मंत्रालय की स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा पहल क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत सीवर, सेप्टिक टैंक और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े श्रमिकों की प्रोफाइलिंग करके उन्हें PPE किट, स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान कार्ड और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। जून 2024 में इसका विस्तार कर कचरा बीनने वालों को भी इसमें शामिल किया गया।
कितने स्वच्छता कर्मियों को PPE किट और स्वास्थ्य बीमा मिला है?
अब तक 87,037 सफाई कर्मचारियों को PPE किट दी गई हैं और 76,247 श्रमिकों को विभिन्न स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के अंतर्गत कवर किया गया है। ये आँकड़े सामाजिक न्याय मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने 13 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान में साझा किए।
कचरा बीनने वालों को इस योजना से क्या लाभ मिलेगा?
3,78,547 कचरा बीनने वालों की प्रोफाइलिंग की गई है, जिनमें से 2,52,163 का ई-केवाईसी सत्यापन हो चुका है। 1,31,864 को PPE किट मिली हैं और 1,24,835 के आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
₹34.17 करोड़ की सब्सिडी किस उद्देश्य के लिए जारी की गई है?
यह अग्रिम पूंजी सब्सिडी 983 स्वच्छता कर्मियों को 364 वाहन खरीदने के लिए दी गई है, जिससे मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा मिलेगा और श्रमिकों की आजीविका सशक्त होगी। यह मैनुअल सफाई पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
ERSU और कार्यशालाओं की भूमिका क्या है?
इमरजेंसी रिस्पांस सेनिटेशन यूनिट्स (ERSU) को 753 सुरक्षा उपकरण भेजे गए हैं, जो नगर निगमों और ज़िलों में आपातकालीन स्थितियों में काम आते हैं। देशभर में 1,562 कार्यशालाएँ भी आयोजित की गई हैं, जिनमें श्रमिकों को खतरनाक सीवर-सेप्टिक टैंक सफाई से बचने और सुरक्षित तरीकों के बारे में प्रशिक्षित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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