स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा: 90,942 सीवर-सेप्टिक टैंक श्रमिकों की प्रोफाइलिंग, PPE किट और स्वास्थ्य बीमा कवरेज
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 13 सितंबर 2026 को खुलासा किया कि देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक से जुड़े 90,942 स्वच्छता कर्मियों की प्रोफाइलिंग पूरी कर ली गई है और उनमें से 89,248 का सत्यापन किया जा चुका है। मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल इन श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
PPE किट वितरण और स्वास्थ्य बीमा की स्थिति
पंत ने बताया कि अब तक 87,037 सफाई कर्मचारियों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट वितरित की जा चुकी हैं। इसके साथ ही 76,247 श्रमिकों को विभिन्न स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के अंतर्गत कवर किया गया है, जो उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा और सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ प्रदान करती हैं। गौरतलब है कि सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई को भारत में अत्यंत जोखिमपूर्ण व्यवसाय माना जाता है, जहाँ हर वर्ष दम घुटने से कई श्रमिकों की मृत्यु की खबरें आती रही हैं।
कचरा बीनने वालों को भी मिला योजना का लाभ
मंत्रालय ने जून 2024 में इस योजना के दायरे का विस्तार करते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कचरा बीनने वालों को भी इसमें शामिल किया। सचिव पंत ने बताया कि कुल 3,78,547 कचरा बीनने वालों की प्रोफाइलिंग की गई है, जिनमें से 2,52,163 का ई-केवाईसी के ज़रिए सत्यापन पूरा हो चुका है। इनमें से 1,31,864 को PPE किट मिली हैं, जबकि 1,24,835 कचरा बीनने वालों का डेटा आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए प्रोसेस किया जा रहा है।
वित्तीय सहायता और मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा
मंत्रालय ने स्वच्छता कर्मियों को वाहन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 983 स्वच्छता कर्मियों को ₹34.17 करोड़ की अग्रिम पूंजी सब्सिडी जारी की है। इस राशि से 364 वाहनों की खरीद की जाएगी, जो मशीनीकृत स्वच्छता अभियान को गति देने के साथ-साथ इन श्रमिकों की आजीविका को भी सशक्त बनाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग उन्मूलन की माँग लंबे समय से उठती रही है।
आपातकालीन सुरक्षा ढाँचा और जागरूकता अभियान
सुरक्षा बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए 753 सुरक्षा उपकरण बड़े नगर निगमों और ज़िलों में स्थापित इमरजेंसी रिस्पांस सेनिटेशन यूनिट्स (ERSU) को भेजे गए हैं। इसके अलावा, सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक मैनुअल सफाई को रोकने के उद्देश्य से देशभर में 1,562 कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें श्रमिकों को सुरक्षित कार्यप्रणाली और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया गया।
आगे की दिशा
सचिव सुधांश पंत ने भरोसा जताया कि ये कदम स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने, कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुँच बढ़ाने और उनकी गरिमा को बनाए रखने की दिशा में मंत्रालय के दीर्घकालिक प्रयासों को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा आधारित इस पहुँच से लाभार्थियों की पहचान पारदर्शी बनेगी — बशर्ते प्रोफाइलिंग के बाद वास्तविक लाभ वितरण की निगरानी भी उतनी ही सख्ती से हो।