13 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत में 80 लाख से अधिक एचपीवी टीकाकरण पूरे, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया बड़ा मील का पत्थर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत में 80 लाख से अधिक एचपीवी टीकाकरण पूरे, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया बड़ा मील का पत्थर

सारांश

भारत ने एचपीवी टीकाकरण में 80 लाख का आँकड़ा पार कर लिया है — सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन की दिशा में एक ठोस कदम। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे 'बेटियों के लिए कैंसर-मुक्त भविष्य' की ओर यात्रा बताया, लेकिन विशाल किशोर आबादी तक पूर्ण कवरेज अभी भी बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें

भारत में एचपीवी टीकाकरण का कुल आँकड़ा 80 लाख से अधिक हो गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 सितंबर 2026 को इसे प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में बड़ा मील का पत्थर बताया।
हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन 90% तक सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार; वैक्सीन उनसे दीर्घकालिक सुरक्षा देती है।
9 से 14 वर्ष की आयु में 2 डोज ; राष्ट्रीय कार्यक्रम में सिंगल-डोज अप्रोच भी अपनाई जा रही है।
15 से 26 वर्ष (और कुछ मामलों में 45 वर्ष तक) के लिए 6 महीने में 3 डोज कैच-अप के रूप में।
विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सीन वैश्विक निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित सिद्ध हुई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि भारत में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) टीकाकरण का आँकड़ा 80 लाख से अधिक हो गया है — जो देश के सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने क्या कहा

मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'भारत ने 80 लाख एचपीवी टीकाकरण का आंकड़ा पार कर लिया है, जो प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को मजबूत करने और एचपीवी संक्रमण तथा इससे जुड़े कैंसर से सुरक्षा को आगे बढ़ाने में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। हर टीकाकरण के साथ, भारत अपनी बेटियों के लिए एक स्वस्थ, कैंसर-मुक्त भविष्य की ओर एक और कदम बढ़ा रहा है।'

यह ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सर्वाइकल कैंसर को वैश्विक प्राथमिकता घोषित किया है और भारत जैसे विकासशील देशों में इसके बोझ को कम करने के लिए व्यापक टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है।

एचपीवी वैक्सीन क्यों है अहम

एचपीवी वैक्सीन उन वायरल संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करती है जो सर्वाइकल कैंसर, एनल कैंसर, गले के कैंसर और जननांग मस्सों का कारण बनते हैं। शोध के अनुसार, हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन 90 प्रतिशत तक सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, और यह वैक्सीन उन्हीं स्ट्रेन के विरुद्ध दीर्घकालिक सुरक्षा देती है। यह कैंसर में बदलने से पहले होने वाले सेल परिवर्तनों को भी रोकने में सक्षम मानी जाती है।

गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर व्यापक निगरानी अध्ययनों में यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित पाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके सामान्य दुष्प्रभावों में इंजेक्शन स्थल पर दर्द, लालिमा, हल्का बुखार, सिरदर्द या थकान शामिल हैं, जो कुछ समय में स्वयं ठीक हो जाते हैं।

किसे और कितने डोज

विशेषज्ञों के अनुसार, 9 से 14 वर्ष की आयु में यह वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी होती है और इसमें सामान्यतः 2 डोज पर्याप्त होती हैं। भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सिंगल-डोज अप्रोच भी अपनाई जा रही है, जिससे व्यापक आबादी तक पहुँचना आसान हो रहा है।

15 से 26 वर्ष की आयु के किशोरों और युवाओं के लिए तथा कुछ परिस्थितियों में 45 वर्ष तक के वयस्कों के लिए 3 डोज कैच-अप के रूप में दी जाती हैं, जो 6 महीने के भीतर पूरी की जाती हैं। विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि वायरस के संपर्क में आने से पहले टीकाकरण सबसे अधिक असरदार होता है।

आम जनता पर असर

भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। 80 लाख से अधिक टीकाकरण का यह आँकड़ा दर्शाता है कि सरकार की सक्रिय स्वास्थ्य नीति और जागरूकता अभियानों का असर दिख रहा है। यह कार्यक्रम मुख्यतः बालिकाओं को लक्षित करता है, जिससे दीर्घकालिक रूप से सर्वाइकल कैंसर की दर में कमी अपेक्षित है।

आगे की राह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 80 लाख का यह आँकड़ा उत्साहजनक है, लेकिन भारत की विशाल किशोर जनसंख्या को देखते हुए कवरेज और बढ़ाने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों और सुदूर इलाकों तक पहुँच सुनिश्चित करना अगली बड़ी चुनौती बताई जा रही है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत इस दिशा में प्रयास जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि यह कवरेज किन राज्यों और तबकों तक पहुँची है। भारत में सर्वाइकल कैंसर का बोझ सबसे अधिक ग्रामीण और वंचित वर्गों पर है — जहाँ टीकाकरण की पहुँच सबसे कठिन है। सिंगल-डोज अप्रोच एक व्यावहारिक कदम है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता पर स्वतंत्र अध्ययन अभी भी सीमित हैं। बिना राज्यवार और आयु-वर्गवार पारदर्शी आँकड़ों के, यह आँकड़ा समग्र सफलता का प्रमाण नहीं, बल्कि एक शुरुआती संकेत मात्र है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में एचपीवी टीकाकरण की ताज़ा स्थिति क्या है?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में 11 सितंबर 2026 तक 80 लाख से अधिक एचपीवी टीकाकरण पूरे हो चुके हैं। यह सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
एचपीवी वैक्सीन क्या है और यह किन बीमारियों से बचाती है?
एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन एक सुरक्षित और प्रभावी टीका है जो सर्वाइकल कैंसर, एनल कैंसर, गले के कैंसर और जननांग मस्सों का कारण बनने वाले संक्रमणों से बचाती है। शोध के अनुसार, यह हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन से रक्षा करती है जो 90% तक सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं।
एचपीवी वैक्सीन किस उम्र में लगवानी चाहिए और कितने डोज चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, 9 से 14 वर्ष की आयु में यह वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी होती है और इसमें 2 डोज पर्याप्त होती हैं। 15 से 26 वर्ष (और कुछ मामलों में 45 वर्ष तक) के लिए 6 महीने के भीतर 3 डोज कैच-अप के रूप में दी जाती हैं।
क्या एचपीवी वैक्सीन सुरक्षित है?
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर व्यापक निगरानी अध्ययनों में यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित सिद्ध हुई है। इसके सामान्य हल्के दुष्प्रभाव — जैसे इंजेक्शन स्थल पर दर्द, हल्का बुखार या थकान — कुछ समय में स्वयं ठीक हो जाते हैं और इससे कोई दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या नहीं पाई गई है।
भारत के राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम की विशेषता क्या है?
भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम में सिंगल-डोज अप्रोच अपनाई जा रही है, जिससे व्यापक आबादी तक पहुँच आसान हो रही है। यह कार्यक्रम मुख्यतः बालिकाओं को लक्षित करता है और दीर्घकालिक रूप से सर्वाइकल कैंसर की दर में कमी लाने का लक्ष्य रखता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले