मध्य प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण अभियान: किशोरियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम
सारांश
Key Takeaways
- एचपीवी टीकाकरण किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।
- राज्य में एक लाख से अधिक किशोरियों का टीकाकरण किया गया।
- यह अभियान सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है।
- उपमुख्यमंत्री ने अभिभावकों से टीकाकरण की अपील की।
- मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, राजगढ़ और खरगोन का योगदान महत्वपूर्ण रहा।
भोपाल, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के उद्देश्य से एचपीवी टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जानकारी दी कि राज्य में अब तक एक लाख से अधिक किशोरियों का टीकाकरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 14 वर्ष आयु वर्ग की एक लाख से ज्यादा बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण पर स्वास्थ्य विभाग की टीम, जिला प्रशासन और सहयोगी संगठनों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 28 फरवरी को अजमेर, राजस्थान से इस विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ किया था। मध्य प्रदेश इस अभियान के तहत एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कर देश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण वाला राज्य बन गया है।
उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, राजगढ़ और खरगोन जिलों का इस उपलब्धि में विशेष योगदान रहा है। प्रदेश में अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता में समन्वय स्थापित किया गया और स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत विभाग के साथ विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला।
उन्होंने अभिभावकों से अनुरोध किया है कि वे अपनी 14 वर्ष आयु की बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं, ताकि सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
उपमुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है और शेष पात्र बालिकाओं का टीकाकरण भी शीघ्र किया जाएगा।
इसके साथ ही, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल रीवा में औचक निरीक्षण किया और वहां भर्ती मरीजों से भेंट कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय व्यवस्थाओं और उपचार की गुणवत्ता की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को मरीजों को बेहतर एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।