भारत में 80 लाख एचपीवी टीकाकरण पूरे, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ बड़ा कदम
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 सितंबर 2026 को जानकारी दी कि भारत में 80 लाख से अधिक एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं — जो देश के निवारक स्वास्थ्य सेवा अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से यह उपलब्धि साझा की।
मंत्रालय का बयान
अपनी पोस्ट में मंत्रालय ने लिखा, 'भारत ने 80 लाख एचपीवी टीकाकरण का आँकड़ा पार कर लिया है, जो निवारक स्वास्थ्य सेवा को मज़बूत करने और एचपीवी संक्रमण तथा इससे जुड़े कैंसर से सुरक्षा को आगे बढ़ाने में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। हर टीकाकरण के साथ, भारत अपनी बेटियों के लिए एक स्वस्थ, कैंसर-मुक्त भविष्य की ओर एक और कदम बढ़ा रहा है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
एचपीवी वैक्सीन क्या है और यह कैसे काम करती है
एचपीवी वैक्सीन एक सुरक्षित और अत्यधिक प्रभावी टीका है जो उन संक्रमणों को रोकता है जो सर्वाइकल कैंसर, एनल कैंसर, गले के कैंसर और जननांग में मस्से का कारण बनते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह वैक्सीन हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन से बचाती है, जो 90 प्रतिशत तक सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं।
यह टीका लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करता है और कैंसर से पहले होने वाले कोशिका-स्तरीय बदलावों को भी रोकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर व्यापक निगरानी से यह सिद्ध हुआ है कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे कोई दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या नहीं होती।
किसे और कितनी डोज़ दी जाती है
विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन 9 से 14 साल की आयु के लिए सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती है, जिसमें सामान्यतः 2 डोज़ की ज़रूरत होती है। भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सिंगल-डोज़ अप्रोच भी अपनाई जा रही है।
15 से 26 साल और कुछ मामलों में 45 साल तक के वयस्कों को कैच-अप के रूप में 3 डोज़ दी जाती हैं, जो छह महीने के भीतर पूरी की जाती हैं। गौरतलब है कि वैक्सीन का सबसे बेहतर असर वायरस के संपर्क में आने से पहले होता है।
साइड इफेक्ट्स की स्थिति
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस वैक्सीन के कुछ सामान्य और हल्के दुष्प्रभाव हो सकते हैं — जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, लालिमा या सूजन, हल्का बुखार, सिरदर्द या थकान। ये सभी अल्पकालिक हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं। वैश्विक स्वास्थ्य निगरानी तंत्र ने इस वैक्सीन को दीर्घकालिक दृष्टि से पूरी तरह सुरक्षित पाया है।
आगे क्या
भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है। 80 लाख का यह आँकड़ा राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम की व्यापकता और समुदाय-स्तरीय जागरूकता में वृद्धि का संकेत देता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की इस उपलब्धि से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय गिरावट देखी जाएगी।