ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी वैश्विक विकास का अगला मोर्चा: डॉ. जितेंद्र सिंह का बेंगलुरु में आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार, 24 जून 2026 को बेंगलुरु में आयोजित ब्रिक्स स्पेस एजेंसियों के प्रमुखों (HOSA) की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि 'ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी' वैश्विक विकास का अगला सबसे बड़ा क्षेत्र बनने की पूरी क्षमता रखती है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से नवाचार, निवेश, उद्यमिता और सतत विकास के नए अवसर सामूहिक रूप से खोलने का आग्रह किया।
बैठक का संदर्भ और महत्व
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तेज़ी से विस्तार ले रही है और ब्रिक्स देश इस उभरते क्षेत्र में अपनी सामूहिक भूमिका को पुनर्परिभाषित करने की कोशिश में हैं।
मंत्री की मुख्य बात
डॉ. सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा, 'भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था उन देशों से नहीं बनेगी जो अलग-अलग काम करेंगे। यह साझेदारी, साझा नवाचार और सामूहिक महत्वाकांक्षा के माध्यम से आकार लेगी। ब्रिक्स देशों में इस उभरते वैश्विक अंतरिक्ष तंत्र का एक मज़बूत स्तंभ बनने की क्षमता है।' उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स देशों के पास वह आकार, वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी ताकत और औद्योगिक संसाधन हैं जो उन्हें वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में एक निर्णायक शक्ति बना सकते हैं।
मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत सभी ब्रिक्स साझेदार देशों के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों को ठोस परिणामों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
बैठक में ब्रिक्स देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें शामिल हैं:
अंतरिक्ष क्षेत्र की स्थिरता (Space Sustainability) और अंतरिक्ष मलबे से मुक्त मिशन की रणनीति; ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (RSSC) को और सुदृढ़ करना; नए ब्रिक्स सदस्य देशों की भागीदारी बढ़ाना; तथा प्रस्तावित ब्रिक्स स्पेस काउंसिल पर आगे की रूपरेखा तय करना।
अंतरिक्ष तकनीक का व्यापक प्रभाव
डॉ. सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि अंतरिक्ष तकनीक आज आर्थिक परिवर्तन और सामाजिक प्रगति की सबसे प्रभावशाली ताकतों में से एक बन चुकी है। उनके अनुसार, इस तकनीक की बदौलत संचार नेटवर्क, नेविगेशन सिस्टम, आपदा प्रबंधन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों को ठोस मज़बूती मिल रही है।
ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका और आगे की राह
मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स समूह दुनिया की विशाल आबादी, आर्थिक क्षमता, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और तकनीकी संसाधनों का प्रतिनिधित्व करता है। उनके अनुसार, सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग नवाचार, औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी हस्तांतरण, निवेश और आर्थिक विकास के नए रास्ते खोल सकता है। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में निजी और सरकारी निवेश दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं। आने वाले महीनों में ब्रिक्स स्पेस काउंसिल के गठन और RSSC के विस्तार पर ठोस निर्णय अपेक्षित हैं।