भोपाल में 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक, शेखावत बोले — संस्कृति भविष्य का आधार है
सारांश
मुख्य बातें
संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 8 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सभ्यागत विरासत और सांस्कृतिक विविधता ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री तथा वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए।
मुख्य घटनाक्रम
ब्रिक्स सम्मेलन के अंतिम दिन शनिवार, 8 अगस्त को भोपाल में संस्कृति मंत्रियों की यह बैठक संपन्न हुई। बैठक में सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालयों, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच जुड़ाव जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहा है और बहुपक्षीय सांस्कृतिक कूटनीति को नई दिशा देने की कोशिश में है।
शेखावत का संबोधन
मंत्री शेखावत ने बैठक में कहा, 'हम ये मानते हैं कि संस्कृति केवल बीते हुए कल का प्रतिबिंब नहीं होती, बल्कि ये आने वाले कल यानी भविष्य का आधार है। भारत मानता है कि संस्कृति एक जीवंत शक्ति है जो हमारे अस्तित्व का निर्माण करती है और रचनात्मकता के साथ नवाचार के लिए हमें प्रेरित करती है।'
उन्होंने आगे जोड़ा कि संस्कृति सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने और सतत विकास के लिए शांतिपूर्ण संवाद स्थापित करने में भी सहायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए शेखावत ने कहा कि भारत 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' की थीम के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसके केंद्र में हुनरमंद लोगों, समुदायों और युवाओं को मंच देना है।
ज्ञान भारतम मिशन का उल्लेख
शेखावत ने ज्ञान भारतम मिशन को इस दृष्टिकोण का 'सटीक उदाहरण' बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सुनियोजित प्रयास है। गौरतलब है कि ब्रिक्स के विस्तार के बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधि एक साथ सांस्कृतिक मंच पर एकत्र हुए हैं।
सांस्कृतिक संध्या का आयोजन
शुक्रवार शाम एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसमें मध्य प्रदेश की लोक परंपराओं के साथ-साथ बेलारूस, इंडोनेशिया और ब्राजील के कलाकारों ने प्रस्तुतियाँ दीं। शेखावत ने इस आयोजन को 'सर्वे सुखिनो भवन्तु' की भावना से प्रेरित बताया और कहा कि इस उत्सव ने देशों और लोगों को करीब लाने में संस्कृति की ताकत को फिर से उजागर किया।
आगे की राह
इस बैठक में लिए गए निर्णयों और विचार-विमर्श के परिणाम ब्रिक्स के भावी सांस्कृतिक सहयोग ढाँचे की नींव रखेंगे। भारत की अध्यक्षता में यह पहल बहुध्रुवीय विश्व में सांस्कृतिक कूटनीति को एक नई पहचान दे सकती है, बशर्ते इसे ठोस द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कार्यक्रमों में परिवर्तित किया जाए।