चैत्र नवरात्र पर मां तारा-तारिणी के दर्शन से किस्मत में आता है बदलाव

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चैत्र नवरात्र पर मां तारा-तारिणी के दर्शन से किस्मत में आता है बदलाव

सारांश

उड़ीसा का मां तारा-तारिणी मंदिर है एक शक्तिपीठ जहां दर्शन से बदल सकती है किस्मत। जानें चैत्र नवरात्र में यहां की भव्य यात्रा और विशेष पूजा के बारे में।

Key Takeaways

  • मां तारा-तारिणी मंदिर का दर्शन किस्मत बदलने में मदद करता है।
  • चैत्र नवरात्रि में यहां विशेष यात्रा निकाली जाती है।
  • मंदिर का स्थापत्य अद्वितीय और आकर्षक है।
  • यह मंदिर हिंदू और बौद्ध दोनों समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भक्त यहां मुंडन कराने और पूजा करने के लिए आते हैं।

नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हुए अनेक शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिर स्थित हैं, लेकिन कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जहां दर्शन मात्र से ही किस्मत बदल जाती है

ऐसा ही एक अद्भुत मंदिर उड़ीसा में है, जिसे 51 शक्तिपीठों में रखा गया है। कहा जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने के बाद सोई किस्मत भी जाग उठती है। हम बात कर रहे हैं मां तारा-तारिणी मंदिर की, जहां चैत्र महीने में विशेष यात्रा का आयोजन किया जाता है और लाखों श्रद्धालु अपने बच्चों के साथ इस मंदिर में आते हैं.

बहरामपुर से लगभग 30 किमी की दूरी पर कुमारी पहाड़ पर, ऋषिकुल्या नदी के किनारे, जुड़वां देवियों तारा और तारिणी का मंदिर स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां मां सती के स्तन गिरे थे, जिसके बाद मां तारा और तारिणी की स्थापना हुई। यह मंदिर देश के चार प्रमुख आदि शक्ति पीठों और तंत्र पीठों में से एक माना जाता है। स्थानीय मान्यता है कि यदि आप शत्रुओं से परेशान हैं या किसी तंत्र के प्रभाव में हैं, तो यहां आकर विशेष अनुष्ठान करने से सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है.

चैत्र नवरात्रि के दौरान, मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इस दौरान चैत्र माह में यात्रा का आयोजन किया जाता है और हर मंगलवार को विशेष पूजा की जाती है। मां को नए वस्त्र पहनाकर खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाता है। इसके अलावा, भक्त नौ दिनों तक खासकर चैत्र नवरात्रि में बच्चों का मुंडन कराने भी आते हैं.

मंदिर सिर्फ हिंदुओं के लिए आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि बौद्ध धर्म के अनुयायी भी मां तारा को अपनी देवी मानते हैं और उनके निर्माण में भी उनकी भागीदारी रही है। इसीलिए मां तारा को बौद्ध तारा के नाम से भी जाना जाता है.

मंदिर का स्थापत्य अद्वितीय है, जहां मुख्य द्वार रंगीन और जीवंत प्रतिमाओं से भरा हुआ है, जो पारंपरिक 'रेखा' शैली में उकेरे गए हैं। गर्भगृह में मां तारा और तारिणी की दो पत्थर की प्रतिमाएं हैं, जिन्हें हर दिन गहनों से सजाया जाता है.

Point of View

बल्कि बौद्ध समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो इसे अपनी आस्था का केंद्र मानते हैं।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

मां तारा-तारिणी मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर उड़ीसा के बहरामपुर से लगभग 30 किमी दूर कुमारी पहाड़ पर स्थित है।
चैत्र नवरात्र में इस मंदिर में क्या विशेष होता है?
चैत्र नवरात्र में यहां विशेष यात्रा निकाली जाती है और हर मंगलवार को पूजा का आयोजन होता है।
क्या इस मंदिर में बौद्ध धर्म के अनुयायी आते हैं?
हां, बौद्ध धर्म के अनुयायी भी मां तारा को देवी मानते हैं और इस मंदिर में उनकी भागीदारी रही है।
मंदिर का स्थापत्य कैसा है?
मंदिर का मुख्य द्वार रंगीन और पारंपरिक 'रेखा' शैली में सजाया गया है, जिसमें जीवंत प्रतिमाएं हैं।
क्यों लोग यहां मुंडन कराने आते हैं?
भक्त विशेषकर चैत्र नवरात्रि में बच्चों का मुंडन कराने के लिए यहां आते हैं।
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