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चैत्र नवरात्रि का महत्व: जानिए चोट्टानिक्करा मंदिर में मां के तीन रूपों की पूजा

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चैत्र नवरात्रि का महत्व: जानिए चोट्टानिक्करा मंदिर में मां के तीन रूपों की पूजा

सारांश

चैत्र नवरात्रि के दौरान, चोट्टानिक्करा मंदिर में मां भगवती की पूजा के अनोखे तरीके का अनुभव करें। जानें कैसे हर प्रहर में मां के अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है।

मुख्य बातें

चैत्र नवरात्रि में नौ रूपों की आराधना होती है।
चोट्टानिक्करा मंदिर में तीन अलग-अलग रूपों में पूजा होती है।
मंदिर की विशेष पूजा विधि अनोखी है।
मकम थोजल रस्म का आयोजन महत्वपूर्ण है।
गुरुथी पूजा से भक्त भूत-प्रेतों से मुक्ति पाते हैं।

नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर भारत में चैत्र माह के दौरान देवी मंदिरों में भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जाती है, क्योंकि इस नौ दिवसीय अनुष्ठान में मां के नौ रूपों की आराधना की जाती है। चैत्र नवरात्रि में मां भगवती के शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों में विशेष रौनक होती है। इसी तरह, दक्षिण भारत में भी कई मंदिर हैं जहां चैत्र नवरात्रि में मां की विशेष पूजा की जाती है। एक ऐसा ही मंदिर है चोट्टानिक्करा मंदिर, जहां माता रानी की तीन अलग-अलग रूपों में पूजा की जाती है।

केरल के एर्नाकुलम जिले में कोच्चि के पास स्थित चोट्टानिक्करा भगवती मंदिर, लगभग 100 साल पुराना है, और यहां आज भी मां के चमत्कारों की गूंज सुनाई देती है। इस मंदिर में मां को चर्म रोग की देवी माना जाता है, जो भक्तों को चर्म रोग से मुक्ति का आशीर्वाद देती हैं। मंदिर की पूजा विधि में एक विशेषता है, क्योंकि यहां मां के रूपों की पूजा हर प्रहर में बदलती है।

सुबह के समय मां को सरस्वती के रूप में पूजा जाता है और उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाए जाते हैं, जबकि दोपहर में मां को लक्ष्मी के रूप में पूजा की जाती है और उन्हें लाल साड़ी अर्पित की जाती है। शाम के समय मां को नीले वस्त्र पहनाकर भद्रकाली के रूप में पूजा की जाती है। तीनों समय की पूजा विधि और अनुष्ठान अलग-अलग तरीकों से संपन्न होते हैं।

चैत्र माह के दौरान मंदिर में मकम थोजल की रस्म भी होती है, जो मार्च में आयोजित होती है। इस उत्सव में मकम नक्षत्र में मां के विशेष दर्शन होते हैं, और भक्त अलग-अलग राज्यों से इस मुहूर्त में दर्शन के लिए आते हैं। चोट्टानिक्करा भगवती मंदिर को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। मां चर्म रोग के अलावा मानसिक रोगों से मुक्ति और तंत्र विद्या का भी काठ करती हैं।

भूत-प्रेतों से मुक्ति के लिए मंदिर में गुरुथी पूजा का अनुष्ठान भी होता है, जिसमें 12 बर्तनों में मां को मीठा पानी अर्पित किया जाता है। मंदिर की वास्तुकला लकड़ी और पत्थर से बनी है, और इसका डिजाइन बौद्ध धर्म से प्रेरित प्रतीत होता है, जिसमें गुबंद नहीं, बल्कि मंदिर के शिखर पर नुकीली चोटी है। मंदिर के प्रांगण में एक चमत्कारी पेड़ भी है, जहां भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मन्नत का धागा बांधते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें मां भगवती के विभिन्न रूपों की आराधना की जाती है। चोट्टानिक्करा मंदिर की विशेष पूजा विधि इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। यह धार्मिक आस्था और परंपराओं का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चोट्टानिक्करा मंदिर कब स्थापित हुआ?
चोट्टानिक्करा मंदिर लगभग 100 साल पुराना है।
इस मंदिर में मां की किस रूप में पूजा की जाती है?
यहां मां की पूजा सुबह सरस्वती, दोपहर लक्ष्मी और शाम भद्रकाली के रूप में होती है।
मकम थोजल रस्म क्या है?
यह रस्म चैत्र माह में होती है, जिसमें भक्त मां के विशेष दर्शन करते हैं।
मंदिर की वास्तुकला कैसी है?
मंदिर लकड़ी और पत्थर से बना है, और इसका डिजाइन बौद्ध धर्म से प्रेरित है।
गुरुथी पूजा क्या होती है?
इस पूजा में मां को मीठा पानी अर्पित करने की रस्म निभाई जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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