ब्राह्मण समाज का बसपा की ओर बढ़ता झुकाव, मायावती बोलीं — सपा में उड़ी नींद
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 22 जून 2026 को दावा किया कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ब्राह्मण समाज सहित अन्य सवर्ण वर्गों का रुझान तेज़ी से बसपा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से समाजवादी पार्टी (सपा) सहित अन्य विरोधी दलों में 'नींद उड़ा देने वाली बेचैनी' साफ़ दिखाई दे रही है।
एक्स पर मायावती का बयान
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि जब से बसपा ने सवर्ण समाज — विशेषकर ब्राह्मण समाज — को ध्यान में रखकर उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया शुरू की है, तब से विरोधी खेमे में खलबली मची है। उन्होंने इसे 2007 के उस चुनावी समीकरण की पुनरावृत्ति की संभावना बताया, जब ब्राह्मण समर्थन के बल पर बसपा ने उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।
मायावती का दावा — 'ब्राह्मण हित बसपा में सुरक्षित'
मायावती ने कहा कि यह सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश में सवर्णों में से खासकर 'ब्राह्मण समाज का हित बसपा में ही सुरक्षित है।' उनके अनुसार, बसपा की 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की नीति को पार्टी स्तर और सरकार — दोनों स्तरों पर अमल में लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी पार्टियों की सरकारों में यह वर्ग 'उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ' महसूस करता रहा है।
उम्मीदवारी का फ़ॉर्मूला — 'जिसकी जितनी तैयारी, उसकी उतनी भागीदारी'
बसपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज के साथ-साथ क्षत्रिय, वैश्य और अन्य सवर्ण वर्गों को भी 'जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी' के सिद्धांत पर आगामी चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बसपा दूसरी पार्टियों की तरह 'लॉलीपाप थमाने की संकीर्ण राजनीति' नहीं करती, बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण को अपना संवैधानिक कर्तव्य मानती है।
सपा पर निशाना और आगे की राह
मायावती के इस बयान को समाजवादी पार्टी पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है। गौरतलब है कि यूपी में सपा परंपरागत रूप से पिछड़े वर्गों — खासकर यादव समुदाय — पर अपनी पकड़ मज़बूत मानती है। बसपा का ब्राह्मण-बहुजन गठजोड़ का प्रयोग 2007 में सफल रहा था, लेकिन 2012 और उसके बाद के चुनावों में यह समीकरण टिक नहीं सका। अब मायावती एक बार फिर उसी फ़ॉर्मूले को दोहराने की कोशिश में हैं।