मायावती की ब्राह्मण समाज से अपील: बसपा से जुड़े रहें, 2007 की तरह मिलेगा सम्मान और उचित भागीदारी
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 14 अगस्त 2026 को ब्राह्मण समाज से पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े रहने की अपील की और भरोसा दिलाया कि 2007 की तरह उन्हें चुनावी भागीदारी तथा सरकार बनने पर उचित मान-सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बसपा 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' के सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है, जिसका लक्ष्य किसी व्यक्ति विशेष के हित नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना के अनुरूप सर्वसमाज का कल्याण है।
एक्स पर बसपा प्रमुख का संदेश
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बसपा की विशिष्ट पहचान इसी में है कि यह 'परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिए समर्पित है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी में नेताओं की नहीं, बल्कि 'पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की फौज' सक्रिय है। उन्होंने इसे कांशीराम द्वारा स्थापित परंपरा बताया।
निष्ठाहीन नेताओं पर निशाना
बसपा प्रमुख ने उन नेताओं की आलोचना की जो पार्टी से निकाले गए या निजी स्वार्थ के कारण दूसरी पार्टियों में चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों ने बसपा सरकार के दौरान भी 'अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए पार्टी से फायदा उठाया' और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए 'अधिकतर निष्क्रिय व उदासीन बने रहे।' उनके अनुसार, इन्हीं कारणों से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा चुनावों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।
नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं पर भरोसा
मायावती ने बताया कि पार्टी में लंबे समय से ईमानदार और निष्ठावान वरिष्ठ कार्यकर्ता नए कर्मठ लोगों और युवाओं को तैयार करने का अभियान चला रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये नए व पुराने कार्यकर्ता 'मिशनरी मानसिकता' के साथ सच्चे अम्बेडकरवादी संघर्ष में योगदान देंगे। गौरतलब है कि बसपा लंबे समय से चुनावी नुकसान के बाद संगठन पुनर्निर्माण की कोशिशों में जुटी है।
दलित समाज की भूमिका और सर्वसमाज की ताकत
मायावती ने कहा कि सर्वसमाज आधारित बसपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में दलित समाज की अहम भूमिका होगी। उन्होंने पार्टी की 'नर्सरी' को 'सर्वसमाज के हसीन गुलदस्तों' से हरी-भरी बताया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बसपा उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन वापस पाने के प्रयास में है और ब्राह्मण समाज को फिर से अपने साथ लाने की रणनीति पर काम कर रही है।
2007 का संदर्भ और आगे की राह
मायावती ने 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का विशेष उल्लेख किया, जब बसपा ने सर्वसमाज की रणनीति के तहत ब्राह्मण समाज को साथ लेकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। उन्होंने वादा किया कि चुनावी तैयारी के आधार पर ब्राह्मण समाज को उम्मीदवारी और सरकार बनने पर 'पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान' दिया जाएगा। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह अपील बसपा की सामाजिक गठबंधन रणनीति का संकेत मानी जा रही है।