10 जुलाई 2026
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मायावती का तीखा हमला: मेरठ-सहारनपुर जैसी घटनाओं में हिंसा भड़काकर राजनीति करने वालों से सावधान रहें

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मायावती का तीखा हमला: मेरठ-सहारनपुर जैसी घटनाओं में हिंसा भड़काकर राजनीति करने वालों से सावधान रहें

सारांश

मायावती ने मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज और हरदोई की घटनाओं को आधार बनाकर उन दलों पर निशाना साधा जो पीड़ितों को भड़काकर सड़क पर उतारते हैं और बाद में 'मगरमच्छ के आँसू' बहाते हैं। BSP प्रमुख ने अंबेडकर के संवैधानिक मार्ग और वोट की ताकत को ही वंचितों की 'मास्टर की' बताया।

मुख्य बातें

BSP राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 10 जुलाई 2026 को लखनऊ में जारी बयान में मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज और हरदोई की हालिया घटनाओं का हवाला दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल वंचितों को भड़काकर हिंसा व सड़क जाम कराते हैं, फिर 'मगरमच्छ के आँसू' बहाकर राजनीतिक लाभ उठाते हैं।
भीमराव अंबेडकर के संवैधानिक और कानूनी मार्ग को ही न्याय का सही रास्ता बताया।
उन्होंने वंचित वर्गों से आगामी विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में राजनीतिक सतर्कता बरतने की अपील की।
BSP ने एकजुटता और वोट की ताकत को बहुजन समाज की समस्याओं की 'मास्टर की' घोषित किया।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 10 जुलाई 2026 को लखनऊ में जारी बयान में मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज और हरदोई समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हुई हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दल पीड़ित और वंचित वर्गों को भड़काकर सड़कों पर उतारते हैं, हिंसा व सड़क जाम कराते हैं और बाद में घटनास्थल पर पहुँचकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं।

मायावती का मुख्य आरोप

मायावती ने कहा कि ऐसे तरीकों से वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने की जगह उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। उनके शब्दों में, 'विभिन्न राजनीतिक दल और संगठन परेशान और पीड़ित लोगों को भड़काकर तथा गुमराह करके उन्हें सड़कों पर उतार देते हैं। वे पहले हिंसा, धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम और अन्य अशांति फैलाने वाले कार्यों के ज़रिए माहौल बिगाड़ते हैं। इसके बाद उनके नेता घटनास्थल पर पहुँचकर मगरमच्छ के आँसू बहाते हैं और उस घटना का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करते हैं।'

BSP प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की 'राजनीतिक रोटी सेंकने' की प्रवृत्ति से पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में सामाजिक तनाव और सांप्रदायिक घटनाओं की खबरें सामने आई हैं।

अंबेडकर के संवैधानिक मार्ग की दुहाई

मायावती ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के संदेश को याद दिलाते हुए कहा कि बाबा साहब ने दलितों, वंचितों और उपेक्षित समाज को संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ राजनीतिक शक्ति हासिल करने का मार्ग दिखाया था। उनका स्पष्ट निर्देश था कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष कानून के दायरे में रहकर किया जाए।

उन्होंने कहा, 'यदि निचली अदालत से न्याय न मिले तो उच्च अदालतों का दरवाज़ा खटखटाया जाए, न कि हिंसा, सड़क जाम और टकराव का रास्ता अपनाया जाए।' गौरतलब है कि मायावती बार-बार अंबेडकरवादी संवैधानिक मार्ग को BSP की बुनियादी नीति के रूप में रेखांकित करती रही हैं।

वंचित वर्गों से राजनीतिक सतर्कता की अपील

BSP सुप्रीमो ने आगामी विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों का उल्लेख करते हुए वंचित वर्गों से राजनीतिक रूप से सचेत रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनावों के समय विभिन्न संगठनों और दलों के बहकावे में आने के बजाय संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।

मायावती ने भगवान बुद्ध और बाबा साहब अंबेडकर के विचारों को अपनाने की अपील करते हुए दोहराया कि बहुजन समाज की समस्याओं का स्थायी समाधान एकजुटता और लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक सत्ता हासिल करने में है।

BSP का स्थायी रुख

मायावती ने कहा कि 'एकजुटता और वोट की ताकत के माध्यम से राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना ही अनगिनत कठिनाइयों के समाधान की मास्टर की है।' BSP इसी मार्ग के प्रति प्रतिबद्ध है और बिना किसी विचलन के इसी उद्देश्य की दिशा में काम करती रहेगी।

आने वाले चुनावी मौसम में मायावती का यह बयान BSP की रणनीतिक स्थिति को स्पष्ट करता है — हिंसा और आंदोलन की राजनीति से दूरी बनाते हुए संवैधानिक मार्ग पर ज़ोर।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परत चुनावी है — BSP उन दलों को घेरना चाहती है जो दलित-वंचित वर्गों में जमीन बना रहे हैं। विडंबना यह है कि जिन घटनाओं का हवाला दिया गया, उनमें BSP की सक्रिय भूमिका न होना भी पार्टी की सिकुड़ती जमीनी उपस्थिति का संकेत है। संवैधानिक मार्ग की दुहाई देना सही है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या BSP के पास उस मार्ग पर चलने के लिए संगठनात्मक ढाँचा अभी भी मौजूद है — 2022 और 2024 के चुनावी प्रदर्शन इस पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने मेरठ और सहारनपुर की घटनाओं पर क्या कहा?
मायावती ने कहा कि मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज और हरदोई जैसी घटनाओं के बाद कुछ राजनीतिक दल लोगों को उकसाकर आंदोलन कराते हैं, जिससे वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने की संभावना कमज़ोर होती है। उन्होंने इसे 'राजनीतिक रोटी सेंकने' की प्रवृत्ति बताया।
मायावती ने वंचित वर्गों को क्या सलाह दी?
BSP प्रमुख ने कहा कि वंचित वर्गों को हिंसा और सड़क जाम का रास्ता छोड़कर डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बताए गए शांतिपूर्ण, संवैधानिक और कानूनी मार्ग पर चलना चाहिए। यदि निचली अदालत से न्याय न मिले तो उच्च अदालतों का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए।
BSP ने चुनावों के संदर्भ में क्या अपील की?
मायावती ने आगामी विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों का उल्लेख करते हुए वंचित वर्गों से राजनीतिक रूप से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठनों के बहकावे में आने के बजाय संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।
मायावती के अनुसार बहुजन समाज की समस्याओं की 'मास्टर की' क्या है?
मायावती ने कहा कि एकजुटता और वोट की ताकत के माध्यम से राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना ही बहुजन समाज की अनगिनत कठिनाइयों के समाधान की 'मास्टर की' है। BSP इसी मार्ग के प्रति प्रतिबद्ध है।
मायावती ने किन नेताओं या विचारों का हवाला दिया?
मायावती ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर और भगवान बुद्ध के विचारों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब का स्पष्ट संदेश था कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष कानून के दायरे में रहकर किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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