सोना ₹1,44,782 पर फिसला, चांदी भी ₹2,32,591 प्रति किलो; वैश्विक दबाव से धातुओं में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 11 जून 2026 (गुरुवार) को सर्राफा बाज़ार में तेज बिकवाली का दबाव रहा, जिसके चलते 24 कैरेट सोने की कीमत ₹2,364 की गिरावट के साथ ₹1,44,782 प्रति 10 ग्राम पर आ गई। चांदी भी ₹692 सस्ती होकर ₹2,32,591 प्रति किलो पर पहुँच गई। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आँकड़ों के अनुसार यह गिरावट हाजिर और वायदा — दोनों बाज़ारों में एक साथ देखी गई।
हाजिर बाज़ार में सोने के भाव
आईबीजेए के अनुसार, 24 कैरेट सोना पहले ₹1,47,146 प्रति 10 ग्राम पर था, जो गुरुवार को घटकर ₹1,44,782 पर आ गया। 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,34,786 से गिरकर ₹1,32,620 प्रति 10 ग्राम हो गई। 18 कैरेट सोना भी ₹1,10,360 से घटकर ₹1,08,587 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। गौरतलब है कि आईबीजेए दिन में दो बार सोने-चांदी के भाव जारी करता है, जो आभूषण व्यापार के लिए बेंचमार्क माने जाते हैं।
वायदा बाज़ार में भी दबाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का अनुबंध 0.36 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹1,47,485 पर कारोबार कर रहा था। चांदी का 3 जुलाई 2026 का अनुबंध 0.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹2,33,928 पर था। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार अंतरराष्ट्रीय संकेतों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी गिरावट
वैश्विक स्तर पर कॉमेक्स पर सोना 0.69 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ $4,107 प्रति औंस और चांदी 1.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ $63.97 प्रति औंस पर थी। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की मज़बूती और वैश्विक जोखिम भावना में बदलाव ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एलकेपी सिक्योरिटीज के विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने बताया कि एमसीएक्स पर सोने की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ ₹1,46,500 पर हुई, हालाँकि निचले स्तरों से खरीदारी आने से सोना रिकवरी कर ₹1,48,000 के ज़ोन में पहुँच गया। त्रिवेदी के अनुसार, 'वैश्विक स्तर पर तनाव, कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव और अन्य कारणों के चलते फिलहाल सोने में मुनाफावसूली हावी है।' यह प्रवृत्ति तब तक जारी रह सकती है जब तक वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते।
आगे क्या
बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद सोने का दीर्घकालिक रुझान सकारात्मक बना हुआ है। निवेशकों की नज़र अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत दिशा और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर रहेगी, जो आने वाले सत्रों में धातुओं की चाल तय करेंगे।