सोने में ₹927 की गिरावट, 24 कैरेट का भाव ₹1,55,536 पर; कच्चे तेल की महंगाई का असर
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 1 जून 2026 को सर्राफा बाज़ार में सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा और 24 कैरेट सोना ₹927 टूटकर ₹1,55,536 प्रति 10 ग्राम पर आ गया — यानी ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार यह गिरावट सोमवार को दर्ज की गई, जो पिछले भाव ₹1,56,463 प्रति 10 ग्राम से ₹900 से अधिक की कमी है।
विभिन्न कैरेट में कीमतों का हाल
22 कैरेट सोने का भाव ₹1,43,320 से घटकर ₹1,42,471 प्रति 10 ग्राम हो गया। 18 कैरेट सोने की कीमत ₹1,17,347 से गिरकर ₹1,16,652 प्रति 10 ग्राम पर पहुँची। इस प्रकार तीनों प्रमुख कैरेट श्रेणियों में एकसमान बिकवाली का दबाव देखा गया।
चाँदी की कीमतों में तुलनात्मक रूप से मामूली गिरावट रही। चाँदी का भाव ₹100 घटकर ₹2,63,250 प्रति किलो पर आ गया, जो पहले ₹2,63,350 प्रति किलो था।
MCX वायदा बाज़ार की स्थिति
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.88 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹1,59,501 पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, चाँदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.18 प्रतिशत की हल्की मज़बूती के साथ ₹2,67,467 पर था — जो दर्शाता है कि चाँदी में बिकवाली का दबाव सोने जितना तीव्र नहीं था।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कमज़ोरी
वैश्विक स्तर पर भी धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना 1.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ $4,530 प्रति औंस पर था, जबकि चाँदी 0.14 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ $75 प्रति औंस पर थी। घरेलू और वैश्विक बाज़ारों में एकसाथ आई इस कमज़ोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
LKP Securities के विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने बताया कि सोने में इस कमज़ोरी की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ उछाल है। उनके अनुसार, तेल के महँगा होने से महंगाई की आशंकाएँ फिर से उभरी हैं, जिसका सीधा असर बुलियन बाज़ार की धारणा पर पड़ा है।
त्रिवेदी ने आगे कहा कि बाज़ार अब आगामी अमेरिकी गैर-कृषि वेतन (Non-Farm Payroll) और बेरोज़गारी आँकड़ों पर नज़र रख रहा है। ये आँकड़े सोने और व्यापक कमोडिटी बाज़ारों के लिए अगली दिशा तय करने वाला प्रमुख कारक साबित हो सकते हैं।
आगे क्या
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहेंगी और अमेरिकी श्रम बाज़ार के आँकड़े अनिश्चित रहेंगे, सोने पर दबाव जारी रह सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अमेरिकी आर्थिक संकेतकों और फेडरल रिज़र्व की नीतिगत दिशा पर कड़ी नज़र रखें, जो आने वाले सत्रों में सर्राफा बाज़ार की चाल तय करेंगे।