सोना ₹1,258 सस्ता होकर ₹1.55 लाख पर, चांदी ₹3,725 लुढ़की; डॉलर-कच्चे तेल की तेजी का असर
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 3 जून 2026: घरेलू सर्राफा बाज़ार में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जब 24 कैरेट सोना ₹1,258 टूटकर ₹1,55,036 प्रति 10 ग्राम पर आ गया और चांदी ₹3,725 की गिरावट के साथ ₹2,61,575 प्रति किलो पर बंद हुई। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, मज़बूत डॉलर और कच्चे तेल की तेजी ने बुलियन सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर डाला है।
मुख्य कीमत-गतिविधियाँ
मंगलवार को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,56,294 प्रति 10 ग्राम था, जो बुधवार को घटकर ₹1,55,036 रह गया। 22 कैरेट सोना ₹1,43,165 से लुढ़ककर ₹1,42,013 प्रति 10 ग्राम पर आया, जबकि 18 कैरेट की कीमत ₹1,17,221 से घटकर ₹1,16,277 प्रति 10 ग्राम हो गई। चांदी पहले ₹2,65,300 प्रति किलो पर थी।
वायदा बाज़ार और अंतरराष्ट्रीय रुख
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर खबर लिखे जाने तक सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.41% की गिरावट के साथ ₹1,58,690 पर और चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.99% टूटकर ₹2,64,054 पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर कॉमेक्स पर सोना 1.33% कमज़ोर होकर $4,459 प्रति औंस और चांदी 2.62% गिरकर $73 प्रति औंस पर रही।
विशेषज्ञ की राय
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, “सत्र में सोने में कमज़ोरी के साथ कारोबार हुआ। इसकी वजह डॉलर और कच्चे तेल में तेजी होना था, जिससे बुलियन मार्केट के सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर पड़ा।” उन्होंने जोड़ा कि निवेशकों का ध्यान अब अमेरिका से आने वाले बेरोज़गारी आँकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर है, जो सोने की आगे की दिशा तय करेंगे।
तकनीकी स्तर और निवेशकों के लिए संकेत
त्रिवेदी के मुताबिक, MCX पर सोने के लिए सपोर्ट ₹1,56,000 और रुकावट ₹1,61,500 के आसपास बनी हुई है। गौरतलब है कि यह गिरावट उस दौर में आई है जब पिछले कई महीनों से सोने ने रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद निवेशकों को सुरक्षित-आश्रय परिसंपत्ति के रूप में आकर्षित किया था। आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी मैक्रो डेटा और फेडरल रिज़र्व की मौद्रिक नीति के संकेत आने वाले हफ्तों में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं।
आगे क्या
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी रोज़गार और मुद्रास्फीति आँकड़ों के बाद डॉलर-इंडेक्स की चाल बुलियन की अगली दिशा तय करेगी। शादी-विवाह के सीज़न से पहले यह गिरावट खुदरा खरीदारों के लिए राहत साबित हो सकती है।