मई में सोना ₹6,200 महंगा, चांदी ₹23,019 उछली — कस्टम ड्यूटी बढ़ोतरी का असर
सारांश
मुख्य बातें
घरेलू बाजार में मई 2026 के दौरान कीमती धातुओं की कीमतों में तीव्र उछाल दर्ज किया गया। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव एक महीने में ₹6,200 बढ़कर ₹1,56,463 प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया, जबकि चांदी ₹23,019 की छलाँग के साथ ₹2,63,350 प्रति किलो हो गई। इस तेजी की मुख्य वजह 13 मई को वित्त मंत्रालय द्वारा कीमती धातुओं के आयात पर प्रभावी शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% करना बताई जा रही है।
सोने के भाव: श्रेणीवार विवरण
IBJA के मुताबिक, 30 अप्रैल 2026 को 24 कैरेट सोना ₹1,50,263 प्रति 10 ग्राम पर था, जो 31 मई तक ₹1,56,463 प्रति 10 ग्राम हो गया — यानी एक माह में ₹6,200 की बढ़त।
22 कैरेट सोने का दाम ₹1,37,641 से बढ़कर ₹1,43,320 प्रति 10 ग्राम हो गया। 18 कैरेट सोना भी ₹1,12,697 से उठकर ₹1,17,347 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
चांदी में ऐतिहासिक उछाल
चांदी की कीमत मई में ₹2,40,331 प्रति किलो से बढ़कर ₹2,63,350 प्रति किलो हो गई — एक माह में ₹23,019 की बढ़त। यह घरेलू बाजार में चांदी की हालिया सबसे तीखी मासिक वृद्धियों में से एक है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार: मिला-जुला रुख
वैश्विक स्तर पर तस्वीर अलग रही। COMEX पर सोने का भाव मई में $53 घटकर $4,593 प्रति औंस रह गया, जो अप्रैल के अंत में $4,646 प्रति औंस था। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $2 बढ़कर $76 प्रति औंस हो गई, जो पहले $74 प्रति औंस थी।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में सोने में नरमी के बावजूद भारत में कीमतें चढ़ीं — जो स्पष्ट रूप से घरेलू शुल्क नीति का असर दर्शाता है।
कस्टम ड्यूटी बढ़ोतरी: सरकार का फैसला
वित्त मंत्रालय ने 13 मई 2026 को सोने और चांदी के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया। साथ ही एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1% से बढ़ाकर 5% किया गया। इससे प्रभावी आयात शुल्क 6% से बढ़कर 15% हो गया — जो सीधे घरेलू कीमतों में परिलक्षित हुआ।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम गिरने के बावजूद भारत में कीमतें ऊपर गईं, जो बताता है कि आयात शुल्क की बढ़ोतरी ने वैश्विक गिरावट के असर को पूरी तरह बेअसर कर दिया।
आम उपभोक्ता पर असर
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतें आभूषण खरीदारों, निवेशकों और शादी-ब्याह के सीजन में खरीदारी करने वाले परिवारों की जेब पर सीधा बोझ डाल रही हैं। आने वाले महीनों में यदि आयात शुल्क संरचना में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।