प्रकाश आंबेडकर का राहुल गांधी पर सवाल: हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' पर एफआईआर क्यों नहीं?
सारांश
मुख्य बातें
वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता और बाबा साहेब आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने 30 अगस्त को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए पूछा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ कथित 'शुद्धिकरण' कांड पर अब तक कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह सवाल उठाया, जो तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रकाश आंबेडकर ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि भाजपा द्वारा हल्द्वानी में किया गया 'शुद्धिकरण' कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विरुद्ध जातिवाद और छुआछूत का एक घिनौना और निंदनीय कृत्य था, जिसने भाजपा की मनुवादी सोच को एक बार फिर उजागर किया। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि खड़गे को अपनी ही पार्टी के सदस्यों द्वारा इस जातिवादी कृत्य की स्पष्ट निंदा न किए जाने पर सार्वजनिक रूप से दुख जताना पड़ा।
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल
आंबेडकर ने राहुल गांधी से सीधे मुखातिब होते हुए कहा कि उन्होंने घटना के 15 दिन बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेजेंटेशन देकर 'शुद्धिकरण' करने वालों को एक्सपोज़ किया, लेकिन केवल तस्वीरें दिखाने से न्याय नहीं मिलता। उन्होंने तर्क दिया कि यह सर्वविदित है कि यह कृत्य भाजपा ने किया — असली सवाल यह है कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी ने एफआईआर दर्ज करवाने की दिशा में क्या ठोस कदम उठाया।
जवाबदेही पर तीखा प्रश्न
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि राहुल गांधी के कार्यकर्ता उन्हें अगला प्रधानमंत्री बनाने की तैयारी कर रहे हैं, यह अच्छी बात है — लेकिन जो पार्टी के बड़े नेता अपने ही अध्यक्ष पर हुए जातिवाद पर चुप रहते हैं, वे भाजपा के मनुवादियों से किस प्रकार बेहतर हैं? उन्होंने अंग्रेज़ी कहावत 'वॉक द टॉक' का हवाला देते हुए कहा कि शब्दों को कार्रवाई से समर्थन देना ज़रूरी है। उनका सवाल था — जब आप अपने पार्टी अध्यक्ष के लिए नहीं लड़ेंगे, तो गरीब दलित और शोषित समाज क्या समझेगा?
भाजपा की पलटवार
इस पूरे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी राहुल गांधी पर पलटवार किया। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। पासवान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी झूठे नैरेटिव के ज़रिए समाज को बाँटने का प्रयास कर रहे हैं और जिस मुद्दे को जाति से जोड़कर पेश किया गया, उसका जाति से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस दलित समाज का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में करती है, जबकि पार्टी के इतिहास में दलित नेताओं को उचित सम्मान नहीं मिला।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में जाति-आधारित राजनीति का तापमान लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब प्रकाश आंबेडकर ने कांग्रेस की दलित राजनीति पर सवाल उठाए हों — वे पहले भी कांग्रेस के 'प्रतीकात्मक' दलित समर्थन को अपर्याप्त बताते रहे हैं। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी या कांग्रेस इन सवालों का कोई ठोस जवाब देती है या नहीं।