30 अगस्त 2026
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प्रकाश आंबेडकर का राहुल गांधी पर सवाल: हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' पर एफआईआर क्यों नहीं?

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प्रकाश आंबेडकर का राहुल गांधी पर सवाल: हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' पर एफआईआर क्यों नहीं?

सारांश

प्रकाश आंबेडकर ने राहुल गांधी की 'शुद्धिकरण' पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को अपर्याप्त बताते हुए पूछा — तस्वीरें दिखाने से न्याय नहीं मिलता, एफआईआर कब होगी? भाजपा ने भी कांग्रेस पर दलित समाज को वोट बैंक बताने का आरोप लगाया। दोनों तरफ से घिरे राहुल गांधी के लिए यह जवाबदेही की परीक्षा है।

मुख्य बातें

प्रकाश आंबेडकर ने 30 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी से हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' कांड पर एफआईआर दर्ज कराने की माँग की।
आंबेडकर ने कहा कि खड़गे को अपनी ही पार्टी के सदस्यों द्वारा निंदा न किए जाने पर सार्वजनिक दुख जताना पड़ा।
राहुल गांधी ने घटना के 15 दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसे आंबेडकर ने 'केवल प्रेजेंटेशन' कहकर अपर्याप्त बताया।
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान और सांसद डॉ.
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर दलित समाज को वोट बैंक बताने का आरोप लगाया।
आंबेडकर ने 'वॉक द टॉक' की कहावत का हवाला देते हुए कहा — शब्द नहीं, कार्रवाई चाहिए।

वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता और बाबा साहेब आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने 30 अगस्त को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए पूछा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ कथित 'शुद्धिकरण' कांड पर अब तक कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह सवाल उठाया, जो तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया।

मुख्य घटनाक्रम

प्रकाश आंबेडकर ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि भाजपा द्वारा हल्द्वानी में किया गया 'शुद्धिकरण' कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विरुद्ध जातिवाद और छुआछूत का एक घिनौना और निंदनीय कृत्य था, जिसने भाजपा की मनुवादी सोच को एक बार फिर उजागर किया। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि खड़गे को अपनी ही पार्टी के सदस्यों द्वारा इस जातिवादी कृत्य की स्पष्ट निंदा न किए जाने पर सार्वजनिक रूप से दुख जताना पड़ा।

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल

आंबेडकर ने राहुल गांधी से सीधे मुखातिब होते हुए कहा कि उन्होंने घटना के 15 दिन बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेजेंटेशन देकर 'शुद्धिकरण' करने वालों को एक्सपोज़ किया, लेकिन केवल तस्वीरें दिखाने से न्याय नहीं मिलता। उन्होंने तर्क दिया कि यह सर्वविदित है कि यह कृत्य भाजपा ने किया — असली सवाल यह है कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी ने एफआईआर दर्ज करवाने की दिशा में क्या ठोस कदम उठाया।

जवाबदेही पर तीखा प्रश्न

प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि राहुल गांधी के कार्यकर्ता उन्हें अगला प्रधानमंत्री बनाने की तैयारी कर रहे हैं, यह अच्छी बात है — लेकिन जो पार्टी के बड़े नेता अपने ही अध्यक्ष पर हुए जातिवाद पर चुप रहते हैं, वे भाजपा के मनुवादियों से किस प्रकार बेहतर हैं? उन्होंने अंग्रेज़ी कहावत 'वॉक द टॉक' का हवाला देते हुए कहा कि शब्दों को कार्रवाई से समर्थन देना ज़रूरी है। उनका सवाल था — जब आप अपने पार्टी अध्यक्ष के लिए नहीं लड़ेंगे, तो गरीब दलित और शोषित समाज क्या समझेगा?

भाजपा की पलटवार

इस पूरे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी राहुल गांधी पर पलटवार किया। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। पासवान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी झूठे नैरेटिव के ज़रिए समाज को बाँटने का प्रयास कर रहे हैं और जिस मुद्दे को जाति से जोड़कर पेश किया गया, उसका जाति से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस दलित समाज का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में करती है, जबकि पार्टी के इतिहास में दलित नेताओं को उचित सम्मान नहीं मिला।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में जाति-आधारित राजनीति का तापमान लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब प्रकाश आंबेडकर ने कांग्रेस की दलित राजनीति पर सवाल उठाए हों — वे पहले भी कांग्रेस के 'प्रतीकात्मक' दलित समर्थन को अपर्याप्त बताते रहे हैं। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी या कांग्रेस इन सवालों का कोई ठोस जवाब देती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कांग्रेस के आंतरिक ढाँचे पर गंभीर सवाल है। भाजपा का पलटवार रणनीतिक है — लेकिन यह कांग्रेस की असली कमज़ोरी को ढकता नहीं। असली परीक्षा यह है कि क्या राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस से आगे बढ़कर कोई कानूनी या संसदीय कदम उठाते हैं — वरना यह विपक्ष की विश्वसनीयता पर एक और प्रश्नचिह्न बन जाएगा।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद क्या है?
कथित तौर पर हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विरुद्ध भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा एक 'शुद्धिकरण' कृत्य किया गया, जिसे जातिवाद और छुआछूत का प्रतीक बताया जा रहा है। इस घटना ने राष्ट्रीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की हैं।
प्रकाश आंबेडकर ने राहुल गांधी से क्या माँग की?
प्रकाश आंबेडकर ने राहुल गांधी से माँग की कि विपक्ष के नेता के रूप में वे इस जातिवादी कृत्य के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराएँ। उनका कहना था कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रेजेंटेशन से खड़गे को न्याय नहीं मिलेगा।
भाजपा ने इस विवाद पर क्या कहा?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह झूठे नैरेटिव से समाज को बाँट रही है और दलित समाज का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में करती है। उन्होंने दावा किया कि जिस मुद्दे को जाति से जोड़ा गया, उसका जाति से कोई संबंध नहीं था।
कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष खड़गे के मामले में क्या रुख अपनाया?
प्रकाश आंबेडकर के अनुसार, कांग्रेस के कई बड़े नेता इस जातिवादी कृत्य की स्पष्ट निंदा करने में विफल रहे, जिससे खड़गे को सार्वजनिक रूप से अपना दुख जताना पड़ा। राहुल गांधी ने घटना के 15 दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
इस विवाद का दलित राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह घटना दलित राजनीति में कांग्रेस और भाजपा दोनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। प्रकाश आंबेडकर जैसे स्वतंत्र दलित नेताओं की आवाज़ इस बहस को व्यापक बनाती है और आगामी चुनावों में दलित मतदाताओं के रुख को प्रभावित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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