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पवन कल्याण का वन विभाग को निर्देश: पोलावरम में बाघ की गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखें

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पवन कल्याण का वन विभाग को निर्देश: पोलावरम में बाघ की गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखें

सारांश

पोलावरम के थिम्मापुरम आरक्षित वन में बाघ की बढ़ती सक्रियता और 9 भेड़ों की मौत के बाद उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने वन विभाग को 24 घंटे निगरानी, आधुनिक तकनीकी प्रणाली और हनुमान टीमों की तैनाती का निर्देश दिया — मानव बस्तियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 29 मई 2026 को वन विभाग के साथ समीक्षा बैठक की और पोलावरम में बाघ की गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी का निर्देश दिया।
बुधवार रात चिकिलिंटा पंचायत के मवेशी बाड़े में बाघ के हमले में 9 भेड़ें मारी गईं; हमला वन सीमा से महज 300 मीटर दूर हुआ।
थिम्मापुरम आरक्षित वन में बाघ की सक्रियता दर्ज; बाघ आसपास के गांवों की दिशा में बढ़ रहा है।
वन सीमावर्ती गांवों में हनुमान टीमों की तैनाती और आधुनिक तकनीकी निगरानी प्रणाली स्थापित करने के निर्देश।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक को स्वयं अभियान की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय कार्यालय से वरिष्ठ अधिकारी भेजने का निर्देश।

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं वन मंत्री पवन कल्याण ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर पोलावरम जिले की सीमा से लगे वन क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखने का निर्देश दिया। यह बैठक चिकिलिंटा पंचायत के मवेशी बाड़ों में नौ भेड़ों पर हुए बाघ के हमले के बाद बुलाई गई थी।

मुख्य घटनाक्रम

वन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि थिम्मापुरम आरक्षित वन में बाघ की सक्रियता दर्ज की गई है और यह बाघ वर्तमान में वन क्षेत्र से आसपास के गांवों की दिशा में बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बाघ ने वन सीमा से महज 300 मीटर की दूरी पर स्थित एक ताड़ के बागान में चर रही भेड़ों पर हमला किया था। बुधवार रात हुई इस घटना में नौ भेड़ें मारी गईं।

सरकार की प्रतिक्रिया

पवन कल्याण ने पशुधन के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाघ के घूमने वाले क्षेत्र से सटे गांवों में हनुमान टीमों (वन्यजीवों की निगरानी, सहायता और देखभाल के लिए उपचार एवं पोषण इकाइयाँ) के साथ 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त हनुमान टीमें भी तैनात की जाएँ।

पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक को स्वयं इस पूरे अभियान की निगरानी करनी चाहिए। यदि आवश्यक हो, तो वन विभाग के केंद्रीय कार्यालय से एक वरिष्ठ अधिकारी को घटनास्थल पर भेजा जाए।

तकनीकी निगरानी पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बाघ की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए आधुनिक तकनीक से लैस निगरानी प्रणाली स्थापित की जाए। उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीक की सहायता से हर गतिविधि पर नज़र रखी जाए और सभी कार्रवाइयाँ वन्यजीव संरक्षण नियमों के अनुरूप हों।

गौरतलब है कि बाघ की गतिविधियों की सूचना वन सीमावर्ती गांवों तक तत्काल पहुँचाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि ग्रामीण समय रहते सतर्क हो सकें। जमीनी स्तर के कर्मचारियों को भी समय-समय पर आसपास के गांवों के लोगों को सचेत करते रहने को कहा गया।

आम जनता और पशुपालकों पर असर

पोलावरम जिले के वन सीमावर्ती गांवों में रहने वाले पशुपालकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। बाघ के वन से मात्र 300 मीटर की दूरी पर हमला करने की घटना यह दर्शाती है कि खतरा मानव बस्तियों के करीब पहुँच चुका है। पवन कल्याण ने आश्वस्त किया कि अतीत में भी जब कभी बाघ मानव बस्ती में घुसा, वन विभाग के कर्मचारियों ने स्थिति को कुशलता से संभाला है।

क्या होगा आगे

वन विभाग अब थिम्मापुरम आरक्षित वन और उसके आसपास के क्षेत्र में निगरानी तंत्र को और मजबूत करेगा। हनुमान टीमों की तैनाती और तकनीकी निगरानी प्रणाली की स्थापना के साथ, विभाग का लक्ष्य मनुष्यों और पशुधन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में बाघ की गतिविधियों पर विभाग की कड़ी नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बढ़ते अतिक्रमण का हिस्सा हो सकती है। हनुमान टीमों और तकनीकी निगरानी के निर्देश सराहनीय हैं, लेकिन असली प्रश्न यह है कि थिम्मापुरम जैसे आरक्षित वनों के बफर ज़ोन में पशुपालन गतिविधियों को नियंत्रित करने की दीर्घकालिक नीति क्या है। पशुपालकों को हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्वास की व्यवस्था पर स्पष्टता अभी भी अपेक्षित है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोलावरम में बाघ के हमले की घटना क्या है?
बुधवार रात चिकिलिंटा पंचायत के मवेशी बाड़े में एक बाघ ने हमला कर 9 भेड़ें मार डालीं। यह हमला थिम्मापुरम आरक्षित वन की सीमा से मात्र 300 मीटर दूर एक ताड़ के बागान में हुआ था।
पवन कल्याण ने वन विभाग को क्या निर्देश दिए?
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने वन विभाग को 24 घंटे निगरानी, आधुनिक तकनीकी निगरानी प्रणाली की स्थापना, हनुमान टीमों की तैनाती और वन सीमावर्ती गांवों को तत्काल सतर्क करने के निर्देश दिए। प्रधान मुख्य वन संरक्षक को स्वयं अभियान की निगरानी करने को कहा गया।
हनुमान टीमें क्या होती हैं?
हनुमान टीमें वन्यजीवों की निगरानी, सहायता और देखभाल के लिए गठित उपचार एवं पोषण इकाइयाँ हैं। इन्हें वन सीमावर्ती क्षेत्रों में वन्यजीव गतिविधियों पर नज़र रखने और आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैनात किया जाता है।
पोलावरम के किस वन क्षेत्र में बाघ की गतिविधि दर्ज हुई है?
थिम्मापुरम आरक्षित वन में बाघ की गतिविधि की पहचान की गई है। वन विभाग के अनुसार बाघ वर्तमान में इस वन क्षेत्र में घूम रहा है और आसपास के गांवों की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ग्रामीणों और पशुपालकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि बाघ की गतिविधियों की जानकारी वन सीमावर्ती गांवों तक तुरंत पहुँचाई जाए। जमीनी स्तर के कर्मचारी समय-समय पर ग्रामीणों को सतर्क करेंगे और मनुष्यों व पशुधन की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाए जाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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